(जयंत भट्टाचार्य)
अगरतला, छह मई (भाषा) सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कर्मियों की कमी व उचित प्रशिक्षण या प्रेरणा की कमी जैसी कुछ प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमाओं की रक्षा का जिम्मा संभाल रहे बल की एक आंतरिक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश के अंदर अशांति, कानून-व्यवस्था की ड्यूटी और उग्रवाद रोधी अभियानों से निपटने के लिए बीएसएफ जवानों की बार-बार वापसी से ‘सीमा की प्रभावी ढंग से रक्षा करने की उनकी क्षमताएं प्रभावित होती है।’
इसमें कहा गया है कि बल में प्रशिक्षण मानकों में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘हमने कुछ वर्षों में अपने प्रशिक्षण के मानकों को शिथिल किया है और पहला प्रभाव सामूहिक प्रशिक्षण पर पड़ा और उसकी अवधि कम कर दी गई… अब वस्तुतः कोई सामूहिक प्रशिक्षण नहीं है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य रूप से सीमा की रक्षा का जिम्मा संभालने वाले बीएसएफ को देश में कहीं भी ‘चुनाव और वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी’’ पर तैनात किया जाता है। इसमें बल के उच्च अधिकारियों की आलोचना की गई है जो अपने ‘निजी आराम’ के लिए जवानों को तैनात करते हैं।
इस आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश से लोगों के अवैध तरीके से भारत आने का सिलसिला पिछले छह दशकों से लगातार जारी है। इसमें कहा गया है, ‘‘हम अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा पर अनियंत्रित आप्रवासन के प्रभावों के प्रति पूरी तरह से जागरुक नहीं हुए हैं। आज, भारत में लगभग दो करोड़ बांग्लादेशी रह रहे हैं… आने वाली पीढ़ियां हमें अपना काम ठीक से नहीं करने के लिए दोषी ठहराएंगी।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें उठाए गए मुद्दों का ”युद्धस्तर पर समाधान जरूरी है अन्थया बल को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।”
भाषा
अविनाश पवनेश
पवनेश
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