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Friday, 24 April, 2026
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उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थापित होंगे ‘छात्र सेवा केंद्र’ : यूजीसी ने जारी किए दिशानिर्देश

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नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के स्वास्थ्य, कल्याण, मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक सेहत तथा शारीरिक दक्षता एवं खेलों को बढ़ावा देने के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं तथा संस्थानों से इनका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमों, विनियामक प्रावधानों में जरूरी बदलाव करने का सुझाव दिया है।

इन दिशानिर्देशों में विविधतापूर्ण कैम्पस जीवन को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में एक छात्र सेवा केंद्र (एसएससी) होगा जो तनाव और भावनात्मक तालमेल से जुड़ी समस्याओं से निपटने एवं प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होगा।

यूजीसी के सचिव मनीष जोशी ने 12 अप्रैल को सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों एवं कालेजों के प्राचार्यो को लिखे पत्र में कहा कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के स्वास्थ्य, कल्याण, मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक सेहत तथा शारीरिक दक्षता, खेलों को बढ़ावा देने के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं।

पत्र में कहा गया है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों से आग्रह किया जाता है कि इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं।

यूजीसी के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि छात्रों के लिए जीवंत कैम्पस जीवन बेहतर पठन पाठन का माहौल, अच्छी मूल्यांकन प्रणाली और सभी के साथ निष्पक्ष एवं समावेशी व्यवहार के उद्देश्य से जरूरी है। यह अकादमिक और पाठ्येत्तर गतिविधियों के साथ समाज एवं पारिस्थितिकी से संबंधित जमीनी प्रशिक्षण, रोजगार से जुड़ी प्लेसमेंट गतिविधियों, शैक्षणिक यात्रााओं और ग्रीष्माकालीन इंटर्नशीप के माध्यम से हो सकती है। इसमें कहा गया है कि सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में छात्र सेवा केंद्र (एसएससी) होना चाहिए जो तनाव और भावनात्मक तालमेल से जुड़ी समस्याओं से निपटने एवं प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होगा।

छात्र सेवा केंद्र में सक्षम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य परामर्शक, शारीरिक एवं मानसिक विशेषज्ञ तथा शारीरिक-मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन उपकरण जैसे जरूरी संसाधन होने चाहिए जिसके माध्यम से छात्रों को जानकारी दी जाए और उनका मूल्यांकन एवं मार्गदर्शन हो।

छात्र सेवा केंद्र (एसएससी) का प्रबंधन निदेशक/डीन स्तर के प्रोफेसर रैंक का पदस्थ व्यक्ति करेगा जिसका मनोविज्ञान, शारीरिक शिक्षा तथा खेल, सामाजिक कार्य या समाज शास्त्र विषय से होना जरूरी है। एसएससी छात्रों से जुड़े प्रासंगिक मुद्दों के समाधान के लिए एकल खिड़की का काम करेगा। इन संस्थानों में एसएससी में पर्याप्त संख्या में महिला एवं पुरूष प्रशिक्षक/परामर्शक होना चाहिए।

दिशानिर्देश में शारीरिक दक्षता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि छात्रों की पढ़ाई के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों को उनकी शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए ताकि उन्हें शारीरिक एवं मानसिक तंदरूस्ती बनाये रखने में मदद मिले।

यूजीसी के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां छात्रों को शारीरिक रूप से सक्रिय होने के लिए कहा जा सके। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) स्तर पर छात्रों को सार्थक रूप से जोड़ने के लिए इन्हें मजबूत बनाया जाना चाहिए।

उच्च शैक्षणिक संस्थानों को नियमित रूप से आत्मरक्षार्थ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए, खास तौर पर लड़कियों के लिए।

इसमें कहा गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रमुख खेल/शारीरिक शिक्षा/योग संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने का प्रयास करना चाहिए।

दिशानिर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए), राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (एनआईआरएफ) इन उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्र सेवा केंद्र (एसएससी के प्रावधानों के लिए कुछ प्वायंट/ग्रेड प्रदान करने पर विचार कर सकते हैं।

भाषा दीपक

दीपक नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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