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Friday, 27 March, 2026
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अधिवक्ता आयुक्त बदलने की मांग वाली याचिका पर अब मंगलवार को सुनवाई

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वाराणसी (उप्र), नौ मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट कमिश्नर (अधिवक्ता आयुक्त) को बदले जाने के अनुरोध वाली याचिका के साथ ही अधिवक्ता आयुक्त को सर्वे का कार्य पूर्ण करने के लिए और समय देने के मुद्दे पर अदालत मंगलवार को सुनवाई करेगी।

सिविल न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों मुद्दों से जुड़े मामले की सुनवाई की अगली तारीख 10 मई तय की है।

हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने सोमवार को बताया कि अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने सर्वे के लिए नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा पर निष्पक्षता के साथ सर्वे ना कराये जाने का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की याचिका दायर की थी। अधिवक्ता ने बताया कि साथ ही अधिवक्ता आयुक्त की ओर से सर्वे का काम पूर्ण नहीं हो पाने के कारण जांच पूर्ण करने के लिए और समय के अनुरोध को लेकर अर्जी अदालत को दी गई।

यादव ने कहा कि इन दोनों पक्षों पर अदालत में जिरह हुई। इस पर अदालत ने सुनवाई और फैसला मंगलवार के लिए टाल दिया।

ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी के साथ अन्य विग्रहों के नियमित दर्शन पूजन के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने अजय कुमार मिश्र को अधिवक्ता आयुक्त (कोर्ट कमिश्नर) नियुक्त किया था। दोनों पक्षों की मौजूदगी में अधिवक्ता आयुक्त ने छह मई को ज्ञानवापी परिसर का सर्वे का काम शुरू किया था। सर्वे के पहले दिन ही ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पहुंची सर्वे टीम के खिलाफ नारेबाजी की गई। सर्वे के दूसरे दिन सात मई को मुस्लिम पक्ष ने अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र पर निष्पक्षता के साथ सर्वे ना कराये जाने का आरोप लगाते हुए, उन्हें बदले जाने की याचिका दायर की थी। वहीं हिन्दू पक्ष का आरोप था कि ज्ञानवापी परिसर में मौजूद भारी संख्या में मुस्लिमों ने उन्हें सर्वे करने के लिए अंदर नहीं घुसने दिया।

शनिवार को अदालत द्वारा नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के वकीलों के साथ ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मंदिर परिसर के अंदर गए, लेकिन करीब दो घंटे अंदर बिताने के बाद सर्वे टीम बिना काम पूरा किए ही बाहर आ गयी। सर्वेक्षक के साथ परिसर के अंदर गए हिंदू पक्ष के एक वकील विष्णु जैन ने संवाददाताओं से कहा था कि मस्जिद में मौजूद मुसलमानों ने टीम को अदालत के आदेश के अनुसार वीडियोग्राफी और सर्वे कार्य करने के लिए मस्जिद क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी।

उन्होंने आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन ने सर्वे टीम को अपना काम करने में मदद नहीं की। जैन ने कहा कि वे मामले के बारे में अदालत को बताएंगे और ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी और सर्वे करने के लिए विशेष आदेश मांगेंगे।

दिल्ली की महिला राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और अन्य की याचिका पर उसी अदालत के पहले के आदेश पर वीडियोग्राफी और सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें देवताओं श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान और नंदी की दैनिक पूजा करने की अनुमति मांगी गई है। इन देवताओं की मूर्तियां ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हैं। याचिकाकर्ताओं ने 18 अप्रैल, 2021 को अपनी याचिका के साथ अदालत का रुख किया था और विरोधी पक्ष को मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से रोकने की मांग की थी।

मस्जिद प्रबंधन समिति (अंजुमन इंतजामिया मस्जिद) के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने पत्रकारों से शनिवार को कहा था कि अदालत ने मस्जिद परिसर के अंदर वीडियोग्राफी करने का कोई आदेश नहीं दिया था, बल्कि बैरिकेडिंग के बाहर चबूतरे की वीडियोग्राफी का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि अदालत द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने शुक्रवार को वाराणसी की एक अदालत के आदेश पर यहां ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर में ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर कुछ इलाकों की वीडियोग्राफी और सर्वे किया था। कोर्ट कमिश्नर ने शुक्रवार को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर में ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर कुछ इलाकों की वीडियोग्राफी और सर्वे किया था।

भाषा सं आनन्द राजकुमार अमित

अमित

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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