Thursday, 26 May, 2022
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तीसरी लहर से निपटने को तैयार तमिलनाडु कैसे हजारों नर्सों को कोविड पीड़ित बच्चों की देखभाल की ट्रेनिंग दे रहा है

तीसरी लहर में बच्चों और नवजात शिशुओं के बीच संक्रमण बढ़ने की आशंका के बीच तमिलनाडु ने जुलाई से ही नर्सों को कम उम्र के कोविड मरीजों की देखभाल के लिए ऑनलाइन और इन-पर्सन ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है.

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चेन्नई: वैज्ञानिक भले ही कह रहे हों कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोरोनावायरस संक्रमण की संभावित तीसरी लहर सबसे ज्यादा बच्चों को ही प्रभावित करेगी लेकिन तमिलनाडु कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. इसने पहले से ही हजारों नर्सों को यह प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है कि शिशुओं को कैसे बचाया जाए और कैसे उन्हें आईवी इंजेक्शन दिए जाएं, और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि क्या नहीं करना है. डमी बच्चों के साथ जूम सेशन और ऑफलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.
बुधवार को आयोजित ऐसे ही एक सेशन, जिसे दिप्रिंट ने भी देखा, के दौरान चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ की डॉ. पूवाझागी ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि कोई बच्चा आपके हाथों में दम तोड़ दे.’

दूसरी लहर के दौरान तमिलनाडु को अपने मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के बावजूद ऑक्सीजन की कमी झेलनी पड़ी थी. संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर अब बुनियादी चिकित्सा ढांचा पहले से ही तैयार किया जा रहा है.

वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कंग ने कहा कि कोई भी इस बात का अनुमान नहीं लगा सकता है कि भारत में तीसरी लहर कैसी होगी या यह बच्चों को कैसे प्रभावित करेगी.

तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव डॉ. जे. राधाकृष्णन ने कहा, ‘इसका कोई आधिकारिक आधार नहीं है, लेकिन हमने देखा है कि अन्य देशों में बच्चों के प्रभावित होने के ज्यादा मामले आए हैं. इसलिए हम कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं. हम बच्चों के लिए 25 फीसदी बिस्तर बेड रिजर्व कर रहे हैं और बच्चों से जुड़े मामलों को संभालने के लिए नर्सों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. साथ ही उन डॉक्टरों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं जो बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं.’

तमिलनाडु अकेला ऐसा राज्य नहीं है जो तीसरी लहर के मद्देनजर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सावधानी बरत रहा है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में एडिशनल डीजी (मीडिया और संचार) मनीषा वर्मा ने दिप्रिंट को बताया कि सभी राज्य डॉक्टरों, नर्सों, विशेषज्ञों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोविड पीड़ित बच्चों की चिकित्सकीय देखभाल के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं.
कर्नाटक जहां प्रत्येक जिला अस्पताल में चाइल्ड केयर डिवीजन शुरू कर रहा है. वहीं, महाराष्ट्र सरकार पर्याप्त संख्या में बाल चिकित्सा इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) बेड, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए अलग वार्ड और वयस्क गहन चिकित्सकों और नर्सों को बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित करना सुनिश्चित कर रही है.

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तमिलनाडु में नर्सों का प्रशिक्षण जुलाई अंत में शुरू हुआ था और इसका आयोजन इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिशियन (आईएपी) के तमिलनाडु चैप्टर की तरफ से किया जा रहा है. सत्र अगस्त अंत तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य राज्य भर में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों से जुड़ी 30,000 से अधिक नर्सों को प्रशिक्षित करना है.

‘बच्चे की देखभाल एक अलग तरह का कौशल’

बच्चों की देखभाल को लेकर नर्सों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम आम तौर पर जूम सेशन के जरिये वर्चुअली आयोजित होता है जो सप्ताह में तीन बार, तीन घंटे के लिए होते हैं. लगभग 3,000 नर्सें इसमें शामिल होती है. यदि उनमें से कोई भी लाइव सत्र में हिस्सा नहीं ले पाती है तो यूट्यूब पर एक रिकैप उपलब्ध होता है.

इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, चेन्नई में आईसीयू प्रभारी डॉ. पूवाझागी ने बताया कि ये सेशन चार मॉड्यूल पर केंद्रित हैं जिसमें यह बताया जाता है कि बच्चों में कैसे कोविड संक्रमण की पहचान करके उनका इलाज किया जाना है. इन सत्र में युवाओं में संक्रमण फैलने से रोकने के उपायों के बारे में भी चर्चा की जाती है.

ट्रेनिंग में शारीरिक और मनोवैज्ञानिक देखभाल संबंधी दिशानिर्देश शामिल हैं. एक तरफ जहां नर्सों को सिखाया जा रहा है कि बच्चों की अतिरिक्त देखभाल—चाहे उन्हें ऑक्सीजन देना हो या फिर आईवी डालना—कैसे करनी है तो दूसरी ओर उन्हें यह भी सिखाया जा रहा कि भावुकता में व्याकुल माता-पिता को कैसे संभालना है.


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अलग-अलग अस्पतालों में 15 से 20 के छोटे समूहों में ऑफलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित हो रहे हैं. ऐसा ही एक सत्र बुधवार को चेन्नई में बाल स्वास्थ्य संस्थान (आईसीएच) में हुआ, जो सिर्फ बच्चों के लिए 800 बेड वाला अस्पताल है. इसमें आईसीएच, मद्रास मेडिकल कॉलेज और ओमांदुरार मेडिकल कॉलेज की नर्सों ने हिस्सा लिया.

डॉ. पूवाझागी ने कहा, ‘किसी बच्चे को संभालना एक नर्स के लिए एक अलग तरह का कौशल है. अभी, तक वे ज्यादातर वयस्कों को संभाल रही हैं. संकट की स्थिति में कुछ और ज्यादा बदलावों की जरूत पड़ेगी और हम उन्हें इन्हीं के बारे में प्रशिक्षित कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि एक वयस्क और एक बच्चे के बीमार होने की स्थिति में बहुत अंतर होता है. उन्होंने कहा, ‘जब बच्चा अस्वस्थ होता है तो पूरा परिवार भावुक हो जाता है. ऐसे में नर्सों के लिए जरूरी होता है कि वे बच्चे की देखभाल के साथ ही उनके अभिभावकों को भी संभालें.’

‘बीमार बच्चों की अब बेहतर देखभाल कर सकते हैं’

आईसीएच में बाल रोग प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी ने बताया कि संभावित तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका का मुख्य कारण यह है कि उन्हें टीका नहीं लगा है. इसके अलावा चिंता का कारण यह भी है कि बच्चों के लिए रेडियोलॉजी ट्रीटमेंट—संक्रमण की पुष्टि के लिए सीटी स्कैन आदि के इस्तेमाल—की सलाह नहीं दी गई थी. यही नहीं, कोविड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेमडेसिविर जैसे दवाएं भी बच्चों के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानी जाती हैं.

प्रशिक्षण सत्रों ने नर्सों को यह विश्वास दिलाने में काफी मदद की है कि वे संभावित संक्रमण की स्थिति में बच्चों की बेहतर ढंग से देखभाल कर सकती हैं.

एक नर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कोविड के युवा रोगियों की देखभाल के बारे में सिखाते हुए | मनीषा मंडल/दिप्रिंट

आईसीएच में बुधवार को ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा लेने वाली 25 वर्षीय नर्स कलेश्वरी ने दिप्रिंट को बताया कि ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स के नाते हमें पता होना चाहिए कि आपातकालीन स्थिति होने पर नवजात शिशुओं और बच्चों को कैसे संभालना है. राज्य में दूसरी कोविड लहर ने बहुत बुरी तरह प्रभावित किया था.’

एक अन्य प्रतिभागी 33 वर्षीय शशिकला, जो पिछले पांच साल से बतौर नर्स कार्यरत हैं, ने बताया कि व्यावहारिक प्रशिक्षण बहुत मददगार था क्योंकि उन्हें विशेष तौर पर बीमार बच्चों की देखभाल और उनके इलाज के तरीकों के बारे में सिखाया गया.
उन्होंने कहा, ‘यदि जरूरत पड़ी और मामलों में उछाल आया तो हम डॉक्टर के बिना भी स्थिति को संभालने में सक्षम हो पाएंगे.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )

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