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Wednesday, 17 July, 2024
होमफीचरUP की IPS अधिकारी ने जिया ‘स्वदेस’ फिल्म वाला पल, 3 दिन में बुजुर्ग के घर पहुंचाई बिजली

UP की IPS अधिकारी ने जिया ‘स्वदेस’ फिल्म वाला पल, 3 दिन में बुजुर्ग के घर पहुंचाई बिजली

बुलंदशहर की एएसपी अनुकृति शर्मा ने कहा कि बूढ़ी महिला अंधेरे में रह रही थी. अगर उन्हें कुछ हो जाता तो हम क्या करते? अपराध को होने से पहले रोकना भी पुलिस का ही काम है.

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बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के खेड़ी गांव में नूरजहां का घर 19 साल तक अंधेरे में डूबा रहा. आसपास के सभी घरों में बिजली काफी समय से है. यह एकमात्र घर था जहां बिजली का कनेक्शन नहीं था, लेकिन बरसों का इंतज़ार बीते हफ्ते जाकर खत्म हुआ जब पुलिस अधिकारियों ने उनके गांव में दस्तक दी.

आईपीएस अधिकारी अनुकृति शर्मा और उनकी टीम को ऐसा करने में सिर्फ तीन दिन का समय लगा. एक ऐसा काम जो सालों से नहीं हो पा रहा था और इसकी शुरुआत 23 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के ‘मिशन शक्ति अभियान’ के तहत हुई. 70-वर्षीय नूरजहां से मिलने के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक अनुकृति शर्मा हरकत में आ गईं. उन्होंने और उनकी टीम ने बिजली विभाग के अधिकारियों से बात की और टिन की छत वाले घर को ग्रिड से जोड़ दिया.

26 जून को पुलिस की टीम फिर खेड़ी पहुंची और इस बार नूरजहां के घर तक गई. ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और इस बीच अनुकृति शर्मा ने नूरजहां से बिजली का स्विच जलाने को कहा. अंधेरे में डूबा घर एलईडी बल्ब की रौशनी से जगमग हो उठा.

26 जून को पुलिस ने बुलंदशहर के खेड़ी गांव में 70-वर्षीय नूरजहां के घर बिजली कनेक्शन लगवा दिया | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

यह नूरजहां के जीवन में ‘रोशनी ला देने’ वाला क्षण था. स्थानीय पुलिस ने इस पर को जीने के लिए पेप्सी की दो बोतलें खोलीं और मिठाइयां बांटीं.

नूरजहां ने मुस्कराते हुए कहा, “मैंने भी एक घूंट पिया.” उन्होंने कहा, “सभी गांव वाले मेरे घर के बाहर जमा हो गए थे. मेरा पूरा जीवन दुख में बीता, अब मुझे कुछ राहत मिली है.” पुलिस टीम ने उन्हें एक स्टैंड फैन भी उपहार में दिया है और अब नूरजहां गर्मी के इन दिनों में पंखा चलाकर चैन से सोती हैं.

शर्मा ने कहा, “नूरजहां कमजोर तबके से आती हैं. यह हमारे लिए एक छोटा सा काम था. हम यह कहकर उन्हें निराश नहीं करना चाहते थे कि यह बिजली विभाग का काम है.”

नूरजहां के घर के ठीक बगल में रहने वाली फरज़ाना, जो वर्षों से उनकी मदद करती रही हैं, वो काफी खुश है. उन्होंने हंसते हुए नूरजहां से कहा, “अम्मा अब तो 5-10 साल उम्र बढ़ गई है तुम्हारी.” ये सुनते ही 70-वर्षीय नूरजहां का चेहरा खिलखिला उठता है.

एक वायरल वीडियो में नूरजहां आईपीएस अधिकारी की पीठ थपथपाती नज़र आती हैं जिसने 2004 की शाहरुख खान की हिट फिल्म ‘स्वदेस’ की यादें ताज़ा कर दीं.

शर्मा ने अगौता पुलिस स्टेशन के एसएचओ, जितेंद्र कुमार सक्सेना और उनकी टीम को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया, “मेरे जीवन का सबसे यादगार पल…नूरजहां आंटी के घर में बिजली कनेक्शन मिलना सचमुच उनके जीवन में रोशनी लाने जैसा है.”

शर्मा ने नूरजहां के घर में बिजली कनेक्शन लगने से पहले अपने दोस्तों से इस बारे में बात की थी. उन्होंने बताया, “मैंने अपने दोस्तों से कहा कि आज का दिन मेरे जीवन का स्वदेस वाला पल होने जा रहा है.”

इस छोटी सी जीत ने शर्मा के दृढ़ विश्वास को मजबूत किया कि टेक्सस के राइस विश्वविद्यालय में पीएचडी छोड़कर भारत लौटने का फैसला एकदम सही था.


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मिशन

बुलंदशहर की एएसपी का बदलाव लाने का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने और उनकी टीम ने 12 से 26 जून तक मिशन शक्ति अभियान के तीसरे चरण के तहत जिले के गांवों का दौरा कर महिलाओं से संपर्क किया.

मिशन के तहत पुलिस अधिकारी महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने और उनकी दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए गांव-गांव गए. शर्मा बातचीत और अपने कार्यों के माध्यम से विश्वास कायम करना चाहती हैं. उन्होंने लोगों को अपना फोन नंबर दिया है और कहा है कि किसी भी व्यक्ति को कोई शिकायत हो तो वे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं.

शर्मा ने कहा. “यहां कई दलाल थे, इसलिए मैंने अपना नंबर सार्वजनिक कर दिया.”

जबकि कानून और व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों पर नकेल कसना पुलिस का काम है, शर्मा इस तरह की बातचीत को अपराध को रोकने और पुलिस विभाग के मानवीय पक्ष को उजागर करने के तरीके के रूप में देखती हैं. उन्होंने कहा कि इस घटना को अपराध के नज़रिये से भी देखा जा सकता है.

उन्होंने कहा, “किसी महिला के घर में अंधेरा है और वह बूढ़ी है. अगर उसके घर पर कुछ हो जाता तो हम क्या करते? अपराध को होने से पहले रोकना भी पुलिस का ही काम है.”

भारत में करियर शुरू में शर्मा की योजना का हिस्सा नहीं था. 2012 में भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, कोलकाता से ग्रेजुएशन करने के बाद, उन्होंने पीएचडी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में राइस विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहां ज्वालामुखी उनका रिसर्च का विषय था, लेकिन कुछ था जो उन्हें खालीपन का एहसास करा रहा था.

राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली शर्मा ने कहा, “मेरे और मेरे पति के मन में चल रहा था कि हमारा काम सीधे लोगों को प्रभावित नहीं कर रहा है और एक समय आया जब देश वापस लौटने की इच्छा काफी बढ़ गई थी और फिर वापस आने का तय हुआ और जब बिजली नूरजहां के घर तक पहुंची तो वो स्वदेस मूमेंट बन गया.”

वह एक साल भर के भीतर भारत लौट आईं और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. अपने तीसरे प्रयास में वह आईआरएस के लिए चयनित हो गईं, लेकिन उन्होंने फिर से प्रतियोगी परीक्षा दी और इस बार 138वीं रैंक हासिल की और 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी बन गईं.

बुलंदशहर में एएसपी के रूप में शर्मा की यह पहली पूर्ण पोस्टिंग है और वह इस अवसर का उपयोग पुलिस की छवि सुधारने के लिए करना चाहती हैं, लेकिन खेड़ी गांव में अपने काम से उन्हें और उनकी टीम को मिली चौतरफा प्रशंसा से काफी चकित हैं.

उन्होंने कहा, “न जाने ये चीज़ कैसे हाइलाइट हो गई, लेकिन हमारा डिपार्टमेंट हर रोज़ लोगों की मदद कर रहा है.”

खेड़ी गांव का पंचायत भवन जहां नूरजहां ने पुलिस अधिकारियों से बिजली कनेक्शन की मांग की थी | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

जिस दिन नूरजहां को बिजली कनेक्शन मिला, उसी दिन शर्मा और उनकी टीम ने बुलंदशहर कोतवाली ग्रामीण क्षेत्र के दरियापुर गांव की एक छोटी लड़की को स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश दिलाने में मदद की. कागज़ी कार्रवाई और आधार कार्ड नहीं होने के कारण उसका प्रवेश कई महीनों से लंबित था. शर्मा ने दरियापुर गांव में महिलाओं और लड़कियों के लिए एक चौपाल के दौरान परिवार से मुलाकात की थी.

आईपीएस अधिकारी बुलंदशहर में ‘पुलिस माई फ्रेंड’ नाम से एक अभियान भी चलाती हैं, जहां वह लोगों से सीधे मिलने के लिए हर महीने अपने अधिकार क्षेत्र के पुलिस स्टेशनों का दौरा करती हैं. विभिन्न पुलिस स्टेशनों में जुलाई महीने में छह बैठके होने वाली हैं.

उन्होंने कहा, “मैंने अपने अंडरट्रेनिंग पीरियड से ही लगातार ऐसा किया है.” इससे पहले शर्मा प्रशिक्षु अधिकारी के तौर पर लखनऊ में तैनात थी.


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सुर्खियों में कैसे आया मामला

शर्मा की ट्विटर पोस्ट को अब तक 16 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है और इस बीच जाट बहुल खेड़ी के लोग अपने गांव का नाम होते देख काफी खुश हैं. पिछले 15 दिनों में , कैमरा क्रू और फोटोग्राफर नूरजहां के घर तक लगातार पहुंच रहे हैं.

नूरजहां की पड़ोसी फरज़ाना अचानक बोलती है, “अम्मा तो सारी न्यूज़ पर छा गई है,”. वहीं एलईडी और स्टैंड फैन ग्रामीणों के बीच भी ‘पर्यटन स्थल’ बन चुका है.

बिजली कनेक्शन के अलावा पुलिस विभाग ने नूरजहां को एक स्टैंड फैन भी गिफ्ट के तौर पर भेंट किया है | फोटो: कृष्ण मुरारी
बिजली कनेक्शन के अलावा पुलिस विभाग ने नूरजहां को एक स्टैंड फैन भी गिफ्ट के तौर पर भेंट किया है | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

खेड़ी गांव के प्रधान कविंद्र सिंह ने कहा, “ये मौका ऐसा है जैसे गांव में चार चांद लग गए हो. खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते.”  खेड़ी भौगोलिक तौर पर भी काफी खूबसूरत गांव है जहां आसपास के खेतों में गन्ने देखे जा सकते हैं और प्राकृतिक दृश्य मन को मोहने वाला है. हर कोई सिंह के लगभग 2500 की आबादी वाले छोटे से गांव के बारे में इन दिनों बात कर रहा है.

आईएएस-आईपीएस बिरादरी भी शर्मा की तारीफ कर रही है. छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अवनीश शरण ने लिखा, “यह अद्भुत है अनुकृति है. इसे जारी रखो.”

नूरजहां के गांव में 19 साल पहले 2004 में बिजली आ चुकी है, लेकिन क्योंकि वह अकेली रहतीं थीं और पढ़-लिख नहीं सकतीं थीं, इसलिए उन्होंने कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया था.

बिजली विभाग के साथ समन्वय करने वाले एसएचओ सक्सेना ने अगौता थाने में अपनी पोस्टिंग की अवधि तक उनके बिजली बिलों का भुगतान करने का वादा किया है.

उन्होंने कहा, “नूरजहां आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर हैं. उन्होंने अपने पति को खो दिया और घर पर उनकी मदद करने वाला भी कोई नहीं है.’

खेड़ी गांव स्थित अपने घर में खाट पर बैठी बूढ़ी नूरजहां | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

इस बीच कविंद्र सिंह ने भी गांव वालों की तरफ से नूरजहां को वित्तीय मदद की पेशकश की. उन्होंने दावा किया कि वह मासिक बिल के खर्च के कारण बिजली कनेक्शन नहीं लेना चाहती थी.

योगी सरकार द्वारा 2020 में शुरू किए गए शक्ति मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के दूर-दराज़ के इलाकों से दिल को छू लेने वाली ऐसी ही कई कहानियां सामने आ रही हैं. बीते दिनों बांदा जिले में, दो युवा लड़कियों को एक दिन के लिए एसएचओ बनाया गया था. उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं, समाधान निकाला और त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए. पिछले साल सितंबर में यूपी विधानसभा और विधान परिषद में एक दिन की कार्यवाही महिला विधायकों को समर्पित की गई थी.


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दोगुना हो गया ईद का जश्न 

जब तक शर्मा ने गांव आकर सभी के साथ बैठक नहीं की तब तक नूरजहां शक्ति अभियान के बारे में अनजान थी. उनके पति का 30 साल पहले निधन हो गया और उनकी दो बेटियां, जिनकी अब शादी हो चुकी है, दिल्ली और पंजाब में रहती हैं.

लेकिन खेड़ी उनका घर है. बारिश में टपकती टिन की छत और मिट्टी के फर्श वाले घर को नूरजहां मरते तक नहीं छोड़ना चाहतीं.

उन्होंने कहा, “मुझे बड़े शहर में रहना अच्छा नहीं लगता. मैं शादी करके यहां आई थी, अब मैं यहीं अपनी आखिरी सांस भी लेना चाहती हूं.” कुछ साल पहले प्रधानमंत्री शौचालय योजना के तहत उनके घर में शौचालय बनाया गया था.

नूरजहां ने कहा, “जब बिजली नहीं आई थी तब रात में बरामदे पर सोना पड़ता था क्योंकि बहुत गर्मी लगती थी. अब आराम से पंखे की हवा में सोती हूं.” नूरजहां ने मासूमियत भरी हंसी हंसते हुए कहा, “रात में लाइट बंद कर देती हूं. रात में कौन जलाकर रखेगा लाइट. लाइट जलाकर नींद भी तो नहीं आती.”

नूरजहां का गुज़ारा विधवा पेंशन के तहत मिलने वाले एक हज़ार रुपये से चलता है. पड़ोस में रहने वाले लोग उनका ख्याल रखते हैं. पड़ोसी कभी-कभी उन्हें खाना भी दे देते हैं और पैसे से भी मदद करते हैं. सरकारी योजना के तहत उन्हें राशन मिल जाता है.

फरज़ाना ने कहा, “गांव वालों ने ही इनकी बेटियों की शादियों में मदद की थी. इनके घर में कभी लाइट नहीं थी. पहले तो मोमबत्ती और डिबिया से काम चलाती थीं.”

नूरजहां की पड़ोसी फरज़ाना जो उनकी देखभाल भी करती हैं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
नूरजहां की पड़ोसी फरज़ाना जो उनकी देखभाल भी करती हैं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

पुलिस प्रशासन से लेकर ग्रामीणों तक किसी के ध्यान में ये बात नहीं आई कि नूरजहां के घर ईद से ठीक कुछ दिन पहले बिजली लग रही है, लेकिन बिजली ने नूरजहां की इस ईद को रोशनी से भर दिया. उन्होंने अपने जीवन में पहली बार अपने घर की रोशनी में ईद मनाई. इस अवसर को यादगार बनाने के लिए उन्होंने मिट्टी के चूल्हे पर खीर बनाई.

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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