भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों एक ऐसा क्राइम ड्रामा गूंज रहा है, जिसकी प्लॉटिंग मनोहर कहानियों जैसी लगती है. लोग समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे दो मुस्लिम महिलाओं ने गरीब परिवारों की कई युवा लड़कियों को नौकरी का लालच देकर फंसाया और फिर उन्हें अजनबी पुरुषों के साथ सेक्स रैकेट में धकेल दिया. भोपाल के सागर रॉयल विला कॉम्प्लेक्स का फ्लैट 301 अब वहां रहने वाले लोगों के लिए डर का कारण बन गया है.
रिक्शा ड्राइवरों से लेकर पान की दुकान वालों तक, लगभग हर कोई इस मामले की चर्चा कर रहा है. जो नौकरी का वादा किया गया था, वह बेहद आकर्षक था—महीने के 10,000 रुपये, फ्री रहने की सुविधा और ग्लैमरस लाइफ, लेकिन जल्दी ही पता चला कि यह गरीब और स्थिर आय न रखने वाली युवा लड़कियों के लिए जाल था.
मामला और जटिल इसलिए बन गया क्योंकि दोनों आरोपी बुर्का पहनने वाली मुस्लिम महिलाएं थीं. इससे कई अफवाहें फैलीं और हिंदुओं के कथित रक्षकों की चिंताओं को हवा मिली, जैसे ‘जबरन धर्मांतरण’, ‘लव जिहाद’ और इस्लामिक राजनीति. बजरंग दल ‘जबरन धर्मांतरण’ के दावे बढ़ा रहा है, जबकि भोपाल पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
हॉउसिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर, महिलाएं और उनकी बेटियां अब एक फ्लैट में इकट्ठा होती हैं, थ्योरी, अफवाहें और व्हाट्सएप अपडेट्स शेयर करती हैं और अपने बच्चों की चिंता करती हैं. वे फ्लैट 301 के आसपास हो रही काली कहानी से नज़रें नहीं हटा पा रही हैं. वे मैसेज में यूट्यूब स्टोरीज़ के लिंक भेजती हैं, जिनके कुछ हज़ार फॉलोअर्स हैं और जो इस मामले का फायदा उठाकर सब्सक्राइबर बढ़ा रहे हैं. वीडियो ऐसे भड़काऊ टाइटल्स के साथ हैं जैसे “रूममेट ने अपने भाई को ब्यूटीशियन से बलात्कार करवाया.” कुछ लोग इसे “केरल स्टोरी 2” फिल्म से जोड़ रहे हैं, जिसे प्रोपेगेंडा माना जाता है और कई लोग यह कह रहे हैं कि फ्लैट के अंदर क्या चल रहा था: “हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बना कर जिहादी बहनों ने करोड़ कमाए”; “रील के पीछे रियल क्राइम, दो बहनों की घिनौनी करतूत.” कुछ इसे अनुराग कश्यप की अगली फिल्म के लिए “परफेक्ट” प्लॉटलाइन कह रहे हैं.

शुरुआत में इस मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया, लेकिन अब पुलिस और मीडिया की रुचि कम हो गई है. स्थानीय अखबारों ने शुरू में “लव जिहाद” और मुस्लिम महिलाओं द्वारा सेक्स रैकेट चलाने की कहानियां छापीं—“स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार”, लेकिन अब उनका फॉलो-अप कवरेज बंद हो गया है. पुलिस जांच ने भोपाल से अहमदाबाद कनेक्शन भी ट्रैक किया, लेकिन अब “आरोपी फरार” स्थिति में अटकी हुई है.
इस मामले के केंद्र में दो बुर्का पहने बहनें हैं, जो कथित रूप से कॉम्प्लेक्स में अकेली मुस्लिम परिवार थीं.
स्नेगिता ने अपने मेहमान को अपने बालकनी से कुख्यात फ्लैट 301 दिखाते हुए कहा, “अमरीन और आफरीन कभी किसी से नहीं बोलती थीं और उनके घर अक्सर लोग आते रहते थे. वो सभी बुर्का पहनते थे और कभी-कभी तेज़ बहसें सुनाई देती थीं. कौन सोच सकता था कि यह सब अंदर हो रहा था?”
दो पीड़ित, उम्र 21 और 32, मुंगेली जिले (छत्तीसगढ़) और होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) की रहने वाली, ने 22 फरवरी को बीएनएस सेक्शन 64 (बलात्कार), 123 (ड्रग देने का आरोप), 351 (आपराधिक धमकी) और मध्य प्रदेश के एंटी-कन्वर्ज़न कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई. अमरीन, आफरीन और साथी चंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया गया. पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें फंसाया गया, धमकाया गया, ड्रग्स दिए गए और कई पुरुषों द्वारा बार-बार उनका बलात्कार किया गया, जिनमें फरार आरोपी बिलाल, चानू और यासिर शामिल हैं.
32-वर्षीय पीड़िता, जो अब होशंगाबाद (नर्मदापुरम) में अपने घर लौट चुकी हैं, उन्होंने कहा, मैं बस सब छोड़कर अपनी बेटी के साथ भाग जाना चाहती थी, लेकिन मुझे डर था कि वे मेरी मां के साथ क्या कर सकते हैं.
बदलते नैरेटिव्स
मुकाबला अब नैरेटिव को कंट्रोल करने पर शिफ्ट हो गया है. कई बातें सामने आई, हर एक का अपना नज़रिया है, लेकिन कोई भी पूरा सच नहीं लगता.
पीड़ित, जिन्हें बजरंग दल का समर्थन प्राप्त है, उनका आरोप है कि उन्हें बुर्का पहनने, गोश्त खाने और इस्लामिक किताबें पढ़ने के लिए मजबूर किया गया—ऐसे दावे जो अन्य लव जिहाद मामलों और हाल ही में फिल्म “केरल स्टोरी 2” (2026) में देखे गए हैं.
स्थानीय पुलिस, हालांकि, इन आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं देखती. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे इसे “सेक्स रैकेट” तक भी नहीं कहने में आश्वस्त हैं, क्योंकि अब तक कोई अन्य महिला जांच में सामने नहीं आई है.
अमरीन, आफरीन और चंदन के जेल में होने और उनके परिवारों के गायब होने के कारण, आरोपी पक्ष की कहानी में कई अनसत्यापन योग्य विवरण जुड़ गए हैं. कई लोगों का सुझाव है कि यह सिर्फ कमजोर और मुश्किल हालात वाली महिलाओं की कहानी हो सकती है, जो जीवन यापन के लिए प्रयास कर रही थीं, न कि किसी बड़े साजिश का हिस्सा.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “हमने प्रभावशाली लोगों, राजनेताओं या व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं पाया. हम यौन शोषण या जबरन धर्मांतरण की संभावना को खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह संभव है कि पीड़ितों का शुरुआती शोषण हुआ हो और समय के साथ वे साथ काम करने लगीं. यह क्लासिक ‘लव जिहाद’ पैटर्न से मेल नहीं खाता. हालांकि, संकेत हैं कि पीड़ितों को कुछ प्रथाओं को अपनाने के लिए दबाव डाला गया हो, जैसे कि बुर्का पहनना.”

फ्लैट 301 में क्या हुआ
बैग सेवेनिया थाने के बाहर 32 साल की पीड़िता रोते हुए खड़ी थीं. उनके सिर पर दुपट्टा था, चेहरे पर मास्क था. सिर्फ उनकी बड़ी गोल आंखें और काली बिंदी दिख रही थीं.
उन्होंने कहा कि बहुत घंटों की निराशा और हताशा के बाद एफआईआर दर्ज की गई.
उन्होंने बताया, “लेकिन जब मैंने अपनी बेटी को देखा, तो मुझे लगा कि मैं यह उसके साथ या किसी भी छोटी लड़की के साथ होने नहीं दे सकती. उसका चेहरा देखकर मुझे लड़ने की ताकत मिली.”
वे पहली बार 2023 में काम की तलाश में भोपाल आई थीं. इवेंट मैनेजमेंट, सिलाई या दिहाड़ी मजदूरी, वह कुछ भी करने को तैयार थीं, बस इतना कि वह घर पैसे भेज सकें.
होशंगाबाद में उनकी मां मजदूरी करती थीं. उनके पिता की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. उनका भाई बस चलाता था. पिछली शादी से तीन बच्चे थे—दो बेटियां और एक बेटा, जिनकी उम्र 10 साल से कम है. उन्हें एक स्थिर आमदनी की ज़रूरत थी.
भोपाल पहुंचने के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात आशिमा मॉल में अमरीन से हुई.
उन्होंने याद किया, “मैं अपनी मौसी की बेटी के साथ मॉल गई थी. वह अमरीन को जानती थी. अमरीन ने रुककर मेरी आंखों की तारीफ की. बाद में उसने कहा कि अगर मुझे कभी काम चाहिए हो तो मैं उसके पास आ सकती हूं.”
कुछ दिनों बाद उन्होंने सागर विला कॉम्प्लेक्स में अमरीन के फ्लैट पर घरेलू कामगार और उनकी बेटी की देखभाल करने वाली के रूप में काम शुरू कर दिया. उस समय उनकी बेटी तीसरी क्लास में पढ़ती थी. उन्हें महीने के 10,000 रुपये मिलते थे और बाद में वह वहीं रहने भी लगी.
पहले तीन महीनों तक, उन्होंने कहा कि उनका काम सिर्फ घर की सफाई करना और बच्चे की देखभाल करना था. अमरीन वहां अपने बॉयफ्रेंड चंदन के साथ रहती थी, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ अजीब लगने लगा था क्योंकि अमरीन अक्सर देर रात पार्टियों में जाती थी, छोटे सफेद पैकेट साथ रखती थी और नशे की हालत में घर लौटती थी.
पीड़िता ने बताय, “जब मैंने पूछा कि ये क्या है, तो उसने कहा कि मैं समझने के लिए बहुत भोली हूं.” और दावा किया कि वे ड्रग्स थे.
हालांकि, पुलिस को घर में कोई नशीला पदार्थ नहीं मिला.
काम शुरू करने के लगभग दो महीने बाद, अमरीन उन्हें अपनी तीसरी बहन के घर ले गई और बताया कि वहां पार्टी है और उन्हें सिर्फ खाना बनाने और सफाई में मदद करनी होगी. उस पार्टी में पीड़िता ने अमरीन की बहन के पति जमाल से मुलाकात की.
उन्होंने आरोप लगाया, “मुझे बार-बार संतरे का जूस पिलाया गया. उसके बाद मैं बेहोश हो गई. उसी हालत में जमाल और उसके तीन-चार दोस्तों ने मेरा बलात्कार किया.”
उन्होंने कहा कि अमरीन और चंदन ने उनके वीडियो बनाए और फोटो खींचे, जिन्हें बाद में धमकाने के लिए इस्तेमाल किया गया.
उन्होंने चंदन पर उन्हें परेशान करने का भी आरोप लगाया. जब उन्होंने अमरीन से इसका विरोध किया, तो अमरीन और चंदन के बीच एक ‘नकली’ झगड़ा हुआ और चंदन गुस्से में घर छोड़कर चला गया. बाद में अमरीन उन्हें चंदन की बहन के घर ले गई ताकि उन्हें वापस आने के लिए मनाया जा सके.
उन्होंने कहा कि चंदन ने अमरीन से कहा कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी, तो वह “खुद को मार लेगा और उसके सारे राज खोल देगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि उसी दिन बाद में चंदन ने उनका फिर बलात्कार किया.

दूसरी पीड़िता
पीड़िता का दावा है कि करीब एक साल तक यह सब चलता रहा. वह कभी-कभी 15 से 20 दिनों के लिए अपनी मां के घर चली जाती थीं. एक समय ऐसा भी आया जब वह दो से तीन महीने तक घर पर रही. उस दौरान, उन्होंने कहा कि अमरीन ने दो छोटी लड़कियों को फंसा लिया, जिनके साथ भी ऐसा ही हुआ. उनका दावा है कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें स्पा मालिक शामिल थे. वहां महिलाओं की तस्वीरें साझा की जाती थीं और ग्राहक उनमें से चुनते थे.
जब वह आखिरकार भोपाल लौटीं, तो अमरीन ने कथित तौर पर उन्हें धमकाया.
दिसंबर 2025 में, उन्होंने तय किया कि वह किसी भी हालत में वहां से चली जाएंगी.
कुछ दिनों बाद, इस मामले की दूसरी पीड़िता और दूसरी शिकायतकर्ता ने उनसे इंस्टाग्राम के ज़रिए संपर्क किया. दोनों को जल्द ही पता चला कि फ्लैट 301 में उनके साथ एक जैसी घटना हुई थी.
उन्होंने कहा कि वे पहले मिसरोद थाने गई थीं, लेकिन वहां उन्हें हतोत्साहित किया गया.
“हमें कहा गया कि अगर यह साबित हो गया कि हमने उनके साथ काम किया है, तो हमें जेल भी हो सकती है.”
अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई कार्रवाई न होने पर वे दोनों निराश होकर घर लौट आईं.
फिर भी, उन्होंने कहा कि चुप रहना कोई विकल्प नहीं था. जनवरी 2026 में, वे बजरंग दल, जो कि दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की युवा शाखा के पास गईं और बैग सेवेनिया पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने से पहले उनका बयान कई बार रिकॉर्ड किया गया.

झुग्गियों से आई दो बहनें
अमरीन और अफरीन पहले अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थी, उसके बाद वे भोपाल के ज्यादा पॉश इलाके सागर विला कॉम्प्लेक्स में रहने लगीं. मामला सामने आने के कई दिनों बाद भी दोनों की ज़िंदगी के बारे में बहुत कम साफ जानकारी मिल पाई है.
पुलिस ने कहा कि दोनों बहनें शायद सिर्फ 12वीं तक ही पढ़ी थीं, लेकिन पीड़िताओं में से एक ने इससे अलग बात कही. उन्होंने बताया, “उनकी अंग्रेज़ी बहुत अच्छी थी. ऐसा लगता था कि दोनों कॉलेज गई हैं. मैं तो उनसे कहती भी थी कि मुझे अंग्रेज़ी सिखा दें.”
दोनों बहनें बिखरे हुए परिवार में बड़ी हुई. जब वो अभी किशोरावस्था में थी तभी पिता की मौत हो गई थी और उसके बाद घर चलाने की जिम्मेदारी उन दोनों पर आ गई.
पुलिस सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, 18 साल की उम्र के बाद दोनों ने सेक्स वर्क शुरू किया और आशिमा मॉल के 21 स्पा में से एक में काम करने लगी.
सागर विला के रहने वाले लोगों ने बताया कि वे कभी-कभी अमरीन को मॉल में देखते थे.
कॉम्प्लेक्स के एक निवासी ने कहा, “हम उसे कई बार फूड कोर्ट के पास देखते थे. वह बस इतना कहती थी कि वह वहीं काम करती है.”
समय के साथ निजी ज़िंदगी भी उलझती चली गई.
अमरीन ने दीपक गुप्ता नाम के व्यक्ति से शादी की थी. पुलिस के अनुसार, बाद में उसने इस्लाम अपना लिया और अपना नाम बदलकर अयान खान रख लिया. दंपति की एक नौ साल की बेटी है, लेकिन यह शादी ज्यादा समय तक नहीं चली. पीड़िताओं में से एक ने दावा किया कि दीपक को अमरीन का काम पसंद नहीं था और वह कभी-कभी उसे मारता भी था. आखिरकार दोनों अलग हो गए.
आफरीन की शादी भी मुश्किलों भरी रही. उसकी शादी अहमदाबाद में हुई थी और उस रिश्ते से उसकी भी एक नौ साल की बेटी है. अब वह भी तलाकशुदा है.
करीब चार साल पहले जब अमरीन सागर विला में रहने आई, तो वह चंदन यादव के साथ रहने लगी. लगभग तीन साल तक दोनों साथ रहे, फिर बाद में अलग हो गए. पुलिस के अनुसार, चंदन आशिमा मॉल के अंदर होलिस्टिक स्पा सेंटर में मैनेजर के तौर पर काम करता था.

इमारत में रहने वाले लोग उसे स्टाइलिश बताते हैं. वह अक्सर अपने बालों को सीधा और ब्लीच किए हुए रखती थी. कुछ लोगों को लगता था कि वह किसी सैलून या ब्यूटी पार्लर में काम करती है और वे उससे इसके बारे में पूछ भी लेते थे, लेकिन वह हमेशा इससे इनकार करती थी.
संगीता, जो अब अपने फ्लैट में बैठी यह सोचकर हैरान हैं कि उस अपार्टमेंट में क्या-क्या हो रहा होगा, ने कहा, “वह कभी हमारे साथ लिफ्ट में भी नहीं आती थी. वह हमेशा लोगों से बात करने से बचती थी.”
उनकी किशोर बेटी को याद है कि अमरीन की छोटी बेटी ज्यादातर दिन बिल्डिंग में इधर-उधर घूमती रहती थी. वह लोगों का सामान इधर-उधर कर देती, डोरबेल बजाकर भाग जाती और अक्सर बाहर ही घूमती दिखती थी.
कभी-कभी वह पड़ोसियों के घर जाने की जिद करती थी.
बेटी ने कहा, “वह जिद करती थी कि हम उसे अपने घर ले चलें. हम मना कर देते थे, लेकिन कई बार वह फिर भी हमारे साथ आ जाती थी.”
अब पीछे मुड़कर देखते हुए संगीता को लगता है कि उस बच्ची का व्यवहार अब समझ में आता है. “वह अकेली थी…शायद अकेलापन महसूस करती थी. या शायद घर में होने वाली चिल्लाने और झगड़ों से डरती थी, जिसकी शिकायत आसपास के पड़ोसी अक्सर करते थे. किसी भी बच्चे को यह सब नहीं झेलना चाहिए.”
पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अमरीन की मां को भी इस सब की जानकारी थी. उनके अनुसार, वह कभी-कभी खुद भी पुरुषों से बात करती थी और अपनी बेटियों की तस्वीरें भेजकर ग्राहकों को फंसाती और मुलाकात तय कराती थी.
“छोटे शहरों से कई लड़कियां काम की तलाश में बड़े शहरों में आती हैं. कुछ लड़कियां बहुत अत्याचार झेलने वाले घरों से निकलकर आती हैं, उम्मीद करती हैं कि उन्हें नौकरी मिलेगी और वे अपनी जिंदगी बना पाएंगी, लेकिन बड़े शहर के 50,000 रुपये भी इसकी कीमत नहीं हैं.”
32-साल की पीड़िता ने कहा, “बड़े शहरों की चमक-दमक सिर्फ एक दिखावा है.”
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