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Thursday, 8 January, 2026
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राखीगढ़ी महोत्सव ने हड़प्पा साइट को बना दिया क्लासरूम—केबीसी-स्टाइल क्विज़, मॉक खुदाई

हरियाणा के पुरातत्व विभाग ने 26 से 28 दिसंबर तक राखीगढ़ी महोत्सव का आयोजन किया. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की कि इस स्थल के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

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राखीगढ़ी: हरियाणा में 26 दिसंबर को आयोजित राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान हड़प्पा संग्रहालय के अधूरे परिसर में एक रोमांचक क्विज़ प्रतियोगिता देखने को मिली. माहौल ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मशहूर थीम म्यूज़िक से गूंज उठा और संचालक ने अमिताभ बच्चन की खास अंदाज़ की नकल करते हुए भारत की प्राचीन विरासत से जुड़े सवाल नाटकीय ढंग से पूछे.

संचालक ने महोत्सव के पहले दिन छात्रों से पूछा, “राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल की खुदाई सबसे पहले किसने की?”, छह टीमों में से एक ने जवाब दिया, “सूरज भान,” . सवाल आगे बढ़ा और अगली टीम ने जवाब दिया—अमरेंद्र नाथ. संचालक टीम के पास गया, थोड़ा झुका, और दर्शकों में उत्साह बढ़ने के बीच बोला: “एकदम सही जवाब!”

हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने 26 से 28 दिसंबर तक तीन दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव का आयोजन किया, जिसकी थीम थी—‘माटी से महोत्सव तक’. इसका उद्देश्य खोज के ऐतिहासिक महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है.

राखीगढ़ी का 5,000 साल पुराना पुरातात्विक स्थल प्राचीन हड़प्पा सभ्यता के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण अवशेषों में से एक है. यह भारत का पहला हड़प्पा स्थल है, जहां ऐसा महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें विजिटर्स कलाकृतियों से सीधे जुड़ सकते हैं. यह उन पांच प्रतिष्ठित स्थलों में भी शामिल है, जिनकी घोषणा मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2020-21 में की थी. अब इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के प्रयास भी चल रहे हैं.

राखीगढ़ी महोत्सव में क्विज़ प्रतियोगिता | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
राखीगढ़ी महोत्सव में क्विज़ प्रतियोगिता | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
मॉक खुदाई किया गया क्षेत्र, जो राखीगढ़ी से निकाले गए अवशेषों को दर्शाता है | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
मॉक खुदाई किया गया क्षेत्र, जो राखीगढ़ी से निकाले गए अवशेषों को दर्शाता है | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

राखीगढ़ी महोत्सव ने इस स्थल को एक लाइव क्लासरूम में बदल दिया, जहां पुरातत्व को लोक संस्कृति, छात्रों की भागीदारी और सार्वजनिक उत्सव के साथ जोड़ा गया. यह प्राचीन सभ्यता को अकादमिक दायरे से बाहर लाने की कोशिश है, हालांकि, अतिक्रमण, रुका हुआ बुनियादी ढांचा और लंबे समय से लंबित संग्रहालय कार्य स्थल के भविष्य पर सवाल खड़े करते हैं.

हरियाणा के पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक अमित खत्री ने दिप्रिंट से कहा, “हरियाणा को भारतीय सभ्यता की पालना माना जाता है. राखीगढ़ी महोत्सव हरियाणा की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को स्वीकार करने और उसके प्रति आभार जताने की एक कोशिश है.”

महोत्सव का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि केंद्रीय बजट में राखीगढ़ी के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

सैनी ने कहा, “यह हमारी प्राचीन और गौरवशाली संस्कृति का उत्सव है. राखीगढ़ी वह धरती है जहां हड़प्पा सभ्यता फली-फूली और दुनिया ने यहां की नगर योजना, जल प्रबंधन और स्वच्छता को जाना.” उन्होंने कहा कि वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पिछले साल इस महोत्सव की शुरुआत की थी.

राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान मॉक खुदाई स्थल पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी | फोटो: विशेष व्यवस्था
राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान मॉक खुदाई स्थल पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी | फोटो: विशेष व्यवस्था

एक लर्निंग हब

हाथों में करणी (ट्रॉवेल) लिए स्कूली छात्रों का एक समूह 10×10 की खाई के अंदर था. यह असली खुदाई नहीं थी, बल्कि प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए की गई मॉक खुदाई थी.

खाई के बगल में एक मॉक खुदाई क्षेत्र था, जो राखीगढ़ी से निकाले गए अवशेषों को दर्शाता था. इसमें राखीगढ़ी के माउंड 3 से निकाला गया प्रसिद्ध 4,600 साल पुराना कंकाल भी दिखाया गया था.

पुरातात्विक अवशेष आगंतुकों और छात्रों के लिए सबसे आकर्षक चीज़ों में से थे. वे फोटो खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे और स्थल के इतिहास के बारे में धीमे-धीमे बातें कर रहे थे.

हिसार से आए क्लास 9 के स्टूडेंट रोहित कंसल ने कहा, “मैंने राखीगढ़ी के बारे में सुना था, लेकिन यह मेरी पहली यात्रा है. यह मेरे लिए रोलर-कोस्टर राइड जैसी है, जहां मैं इतिहास और संस्कृति को रोचक तरीके से जान पा रहा हूं.”

राखीगढ़ी महोत्सव में कलाकृतियों की प्रतिकृतियों के स्टॉल पर स्कूली छात्र | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
राखीगढ़ी महोत्सव में कलाकृतियों की प्रतिकृतियों के स्टॉल पर स्कूली छात्र | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
साइट म्यूज़ियम में प्रदर्शनी, जिसमें राखीगढ़ी और अग्रोहा स्थल से निकली कलाकृतियां दिखाई गईं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
साइट म्यूज़ियम में प्रदर्शनी, जिसमें राखीगढ़ी और अग्रोहा स्थल से निकली कलाकृतियां दिखाई गईं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

महोत्सव में पुरातत्व को हरियाणा की ग्रामीण परंपराओं के साथ जोड़ा गया. इसमें खोरिया और धमाल जैसे लोक नृत्य, साथ ही कुश्ती और कबड्डी जैसे ग्रामीण खेल शामिल थे. यहां हस्तनिर्मित वस्त्र, टेराकोटा कलाकृतियां और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए.

महोत्सव में एक पोस्टर पर लिखा था, “आईए इस महोत्सव का हिस्सा बनकर अपनी माटी और संस्कृति से जुड़ें.”

स्टॉलों पर सिंधु घाटी प्रिंट वाली टी-शर्ट, हड़प्पा काल की मुहरें और हड़प्पाई कलाकृतियों की प्रतिकृतियां बिक रही थीं. सिंधु स्मारिका स्टॉल पर लगे एक पोस्टर पर लिखा था. “भूली सभ्यता की महक अपने घर में बसाएं.”

राखीगढ़ी महोत्सव में बिक्री के लिए रखी हड़प्पा मुहरों की प्रतिकृतियां | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
राखीगढ़ी महोत्सव में बिक्री के लिए रखी हड़प्पा मुहरों की प्रतिकृतियां | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
हड़प्पा मुहर वाले बैग | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
हड़प्पा मुहर वाले बैग | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

सबसे प्रभावशाली आकर्षण राज्य के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों—जैसे राखीगढ़ी और अग्रोहा, पर केंद्रित एक प्रदर्शनी थी. प्रदर्शनी में राखीगढ़ी के खुदाई स्थल की तस्वीरें, कंकाल अवशेषों और स्थल के कब्रिस्तान का संक्षिप्त विवरण भी प्रदर्शित किया गया था.

प्रदर्शनी के एंट्री बोर्ड पर लिखा था, “प्रत्येक पुरावशेष सभ्यता की कहानी बताते हैं.”

पिछले 10 साल में राखीगढ़ी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभरा है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और हरियाणा राज्य के पुरातत्व विभाग ने हाल के वर्षों में यहां खुदाई के कई चरण पूरे किए हैं.

कुश्ती मुकाबले महोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
कुश्ती मुकाबले महोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

विरासत और पर्यटन के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल ने कहा, “राखीगढ़ी भारत की प्राचीन सभ्यता का साक्षी है. यह महोत्सव ऐसा मंच प्रदान करता है, जहां रचनात्मकता और विरासत एक साथ आती हैं, जिससे अतीत के प्रति सराहना और वर्तमान की गहरी समझ विकसित होती है.”

वर्षों से कई राजनेताओं ने इस स्थल का दौरा किया है, लेकिन ठोस कार्रवाई से ज्यादा खोखले वादे ही सामने आए हैं. स्थल से अतिक्रमण हटाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और संग्रहालय का निर्माण कार्य अब भी अधर में लटका है.

हालांकि, मुख्यमंत्री सैनी आश्वस्त हैं. उन्होंने कहा, “यह नया भारत है, जहां हम अतीत से प्रेरणा लेते हैं और भविष्य की ओर देखते हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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