नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि पिछले पांच साल में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) ने देशभर में 121 आर्कियोलॉजिकल प्रोजेक्ट्स (पुरातात्विक परियोजनाओं) चलाए हैं.
लोकसभा सांसद टीआर बालू ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से 2021 से 2025 के बीच हुई आर्कियोलॉजिकल प्रोजेक्ट्स में मिले ऐतिहासिक खोजों की जानकारी मांगी.
शेखावत ने लिखित जवाब में बताया कि 2021-22 में 24 आर्कियोलॉजिकल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. 2022-23 में 31, 2023 में 19, 2024 में 22 और 2025 में 25 प्रोजेक्ट्स को अनुमति दी गई.
ASI ने दिल्ली के पुराना किला, राजस्थान के बेनवा और बहाज, और हरियाणा के राखीगढ़ी में खुदाई की है.
शेखावत ने लिखा, “खुदाई के दौरान संरचनाओं के अवशेष, दफन स्थल, मिट्टी के बर्तन और सिक्के, मनके, आभूषण, खेती के औजार, हड्डियों से बनी वस्तुएं जैसी पुरावशेष मिले हैं. तय प्रक्रिया के तहत जरूरत पड़ने पर इनके नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए अलग-अलग संस्थानों को भेजे जाते हैं.”
खुदाई में मिले पुरावशेषों को जांच के लिए एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (AnSI) और बिरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज भेजा गया.
शेखावत ने आगे बताया कि पिछले पांच साल में किसी भी पुरातात्विक परियोजना को जारी रखने या बंद करने को लेकर कोई अदालत का आदेश नहीं आया है.
खुदाई जारी है
शेखावत के मुताबिक, इस समय 16 जगहों पर खुदाई चल रही है. इनमें हरियाणा के अग्रोहा और राखीगढ़ी, गुजरात के द्वारका और प्राचीन स्थल लोथल, कर्नाटक के ब्रह्मगिरी और कमलापुरा, बिहार के बलिराजगढ़, उत्तर प्रदेश के पिपरहवा, ओडिशा के जौगढ़ किला और महाराष्ट्र के एलिफेंटा द्वीप का मोराबंदर इलाका शामिल हैं.
शेखावत ने इन खुदाई परियोजनाओं पर हुए खर्च की जानकारी भी दी. दिप्रिंट के विश्लेषण के मुताबिक, अब तक इन 16 स्थलों की खुदाई पर करीब 6.8 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
इन 16 स्थलों में सबसे ज्यादा 2.16 करोड़ रुपये राखीगढ़ी की खुदाई पर खर्च हुए हैं. अग्रोहा पर 1.26 करोड़ रुपये, द्वारका पर 1 करोड़ रुपये, एलिफेंटा द्वीप पर 99.17 लाख रुपये और गुजरात के भावनगर में 93.34 लाख रुपये खर्च किए गए हैं.
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