नई दिल्ली: मद्रास हाई कोर्ट ने मशहूर भरतनाट्यम डांसर और कलाक्षेत्र फाउंडेशन की पूर्व डायरेक्टर लीला सैमसन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को एक समझौते के बाद रद्द कर दिया. इससे एथेना सादिक को राहत मिली. 27 साल की सादिक ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि चेन्नई के कलाक्षेत्र फाउंडेशन में उनकी कई सालों की ट्रेनिंग का नतीजा कोर्ट-कचहरी, पुलिस शिकायतें और एक डांसर के तौर पर अपनी पहचान वापस पाने की लड़ाई होगा.
कोर्ट ने 17 मार्च को सैमसन के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द कर दिया, जब उन्होंने सादिक को 8 लाख रुपये देकर मामला सुलझा लिया. यह मामला दिसंबर 2022 की एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ा था, जिसमें सैमसन ने सादिक — जो उस समय डांस इंटर्न थीं — को एक पुरुष फैकल्टी मेंबर की “मिस्ट्रेस” बताया था.
जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने लिखा, “यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता और दूसरे प्रतिवादी ने अपना विवाद सुलझा लिया है, और क्योंकि IPC की धारा 509 के तहत अपराध समझौता करने योग्य है, इसलिए यह कोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कार्यवाही को रद्द करने के पक्ष में है.” यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (किसी महिला की गरिमा का अपमान) के तहत दर्ज किया गया था.
सैमसन ने 23 दिसंबर 2022 को वह फेसबुक पोस्ट किया था. इस पोस्ट के बाद हुए विवाद से आहत होकर, सादिक ने 23 मार्च 2023 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा कि इन अपमानजनक टिप्पणियों से उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी दोनों पर गहरा असर पड़ा.
शिकायत के बाद पुलिस ने 2023 में IPC की धारा 509 के तहत FIR दर्ज की और बाद में कई गवाहों के बयान लेने के बाद चार्जशीट दाखिल की. यह मामला चेन्नई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रायल के लिए लंबित था.
इसके साथ ही सादिक ने एक सिविल केस भी दायर किया, जिसे मीडिएशन के लिए भेजा गया. आखिर में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. सैमसन ने खेद जताया और कुछ शर्तें मानने पर सहमति दी, जिसमें 8 लाख रुपये का भुगतान भी शामिल था. इसके बाद सादिक ने आपराधिक कार्यवाही रद्द करने पर सहमति दे दी.
हालांकि सादिक के लिए यह कानूनी प्रक्रिया खुद एक अलग लड़ाई बन गई. उनका आरोप है कि शुरुआत में FIR दर्ज नहीं की गई थी, जिसके कारण उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट जाना पड़ा. उन्होंने कहा, “उन्होंने यह कहकर केस बंद कर दिया कि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे. FIR दर्ज कराने के लिए मुझे कोर्ट जाना पड़ा.”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान बयानों में बदलाव किया गया और शुरुआत में जिन लोगों के नाम थे, उनमें से कई के नाम चार्जशीट से हटा दिए गए. उन्होंने कहा, “यहां तक कि मेरे और मेरे दोस्तों के बयान भी बदल दिए गए.” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने जांच के कुछ हिस्सों को अलग से चुनौती दी है.
सादिक ने कहा कि 2022 की उस पोस्ट के बाद असर तुरंत दिखा और वह पूरी तरह अकेली पड़ गईं. केरल की रहने वाली 27 साल की सादिक ने कलाक्षेत्र फाउंडेशन में सात साल से ज्यादा समय बिताया था, जिसमें रुक्मिणी देवी कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में डांस इंटर्न के तौर पर काम करना भी शामिल है.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “अगर वहां 100 छात्र थे, तो उनमें से 99 ने मेरी बात पर विश्वास नहीं किया. जो लोग मुझे निजी तौर पर नहीं जानते थे, उन्होंने वही मान लिया जो कहा जा रहा था. मुझे दुश्मन की तरह देखा जाने लगा.”
दिप्रिंट ने लीला सैमसन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
‘पैसा नहीं, माफ़ी’
घटना के समय सादिक़ परफॉर्मिंग ग्रुप का हिस्सा थीं और छात्रों से उनका ज्यादा मेल-जोल नहीं था. उन्होंने कहा कि इसी वजह से कई लोगों ने उन्हें बिना जाने ही उनके बारे में राय बना ली. इस विवाद के कारण उन्हें कलाक्षेत्र छोड़ना पड़ा और करीब एक साल तक अपने घर केरल में रहना पड़ा. “मेरा वापस आने का मन नहीं था. मैं बस चली गई,” उन्होंने कहा.
मामला छोड़ने की सलाह मिलने के बावजूद सादिक़ ने कहा कि उन्होंने कानूनी रास्ता चुना. “कई बार लोगों ने कहा कि इसे छोड़ दो. लेकिन मुझे पता था कि मैं कौन हूं,” उन्होंने कहा. “मुझे दुख हुआ, निराशा हुई और अकेलापन लगा, लेकिन आपको सच के साथ मजबूती से खड़ा रहना पड़ता है.”
सैमसन की पोस्ट ने कलाक्षेत्र फाउंडेशन के अंदर फैकल्टी सदस्यों पर दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी. उस पोस्ट और बाद की टिप्पणियों में सैमसन ने एक पुरुष फैकल्टी सदस्य को अथीना सादिक़ से जोड़ने के संकेत दिए और उनका नाम भी लिया.
दिप्रिंट की 2023 की एक रिपोर्ट में हरि पद्मनाभन समेत कई फैकल्टी सदस्यों पर लगे आरोपों को सामने लाया गया, जिससे इस मुद्दे पर व्यापक ध्यान गया. पद्मनाभन को अप्रैल 2023 में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई और उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया है.
हालांकि यह मामला दो साल तक चला, सादिक़ ने कहा कि उनका मकसद नहीं बदला. “मेरा मकसद कभी पैसा नहीं था,” उन्होंने कहा. “मुझे सार्वजनिक माफी चाहिए थी. जिस तरह यह बात सार्वजनिक रूप से सामने आई थी, उसी तरह इसे सार्वजनिक रूप से वापस भी लिया जाना चाहिए था.”
माफी और वापसी
जून 2025 में सैमसन ने फेसबुक पर उस पोस्ट के लिए खेद जताया. “23 दिसंबर 2022 को मैंने फेसबुक पर अथीना के बारे में एक पोस्ट डाली थी, जो कलाक्षेत्र फाउंडेशन की पूर्व छात्रा और अब ट्यूटर हैं. मैंने गलती से उनका नाम एक पुरुष फैकल्टी सदस्य के साथ जोड़ दिया था. मुझे इस गलती का अफसोस है और आगे मैं उनके बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगी,” उन्होंने लिखा.
सादिक़ ने कहा कि इस अनुभव ने कला के क्षेत्र में सत्ता को देखने का उनका नजरिया बदल दिया. “हमें कलाकारों की सराहना उनकी कला के लिए करनी चाहिए, न कि उनके निजी जीवन के लिए,” उन्होंने कहा. “एक कलाकार मंच पर बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह निजी जिंदगी में भी वैसा ही हो.”
एक साल बाहर रहने के बाद सादिक़ कलाक्षेत्र लौटीं, इस बार फैकल्टी मेंबर के रूप में. उन्होंने कहा कि यह बदलाव शुरुआत में काफी मुश्किल था.
“शुरू में माहौल बहुत ठंडा था. कोई मुझसे बात नहीं करता था. स्टूडेंट्स भी झिझकते थे,” उन्होंने कहा. समय के साथ बातचीत थोड़ी बेहतर हुई, लेकिन पूरी तरह नहीं. “अब हम सहकर्मी हैं. हम तभी बात करते हैं जब जरूरत हो.”
सादिक़ ने कहा कि इस अनुभव से यह भी समझ आया कि कला से जुड़ी कम्युनिटीज़ में सत्ता कैसे काम करती है. “जब कोई ऐसा व्यक्ति, जिसके पास ताकत और पहचान हो, कुछ कहता है, तो लोग बिना सवाल किए उस पर भरोसा कर लेते हैं. मेरे मामले में भी ऐसा ही हुआ.”
उन्होंने कहा कि जहां पहले भरतनाट्यम समुदाय के कई लोग उनके खिलाफ एकजुट हो गए थे, वहीं अब उनकी चुप्पी बहुत कुछ कहती है. “जब मैं अपनी बात खुलकर रख रही थी, तब सब मेरे खिलाफ थे. अब फैसले के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं है. यही सबसे दुख की बात है,” उन्होंने कहा.
इस घटना का असर लंबे समय तक रहा. “मैं बहुत मशहूर हो गई, लेकिन एक डांसर के तौर पर नहीं,” उन्होंने कहा. “मुझे किसी और वजह से पहचाना जाने लगा. मैं इसे बदलना चाहती हूं. मैं अपनी पहचान अपनी कला से बनाना चाहती हूं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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