नई दिल्ली: यूके लॉयर्स फॉर इज़रायल के दबाव में आकर ब्रिटिश म्यूजियम ने अपने प्राचीन मध्य-पूर्व गैलरी से “फिलिस्तीन” शब्द हटा दिया. इस फैसले की घोषणा पिछले हफ्ते म्यूजियम की एंशिएंट लेवांत और इजिप्ट गैलरी के ज़रिए की गई.
7 फरवरी को यूकेएलएफआई ने म्यूजियम के डायरेक्टर निकोलस कुलिनन को लिखे पत्र में कहा, “हज़ारों साल के पूरे क्षेत्र के लिए पीछे जाकर एक ही नाम—फिलिस्तीन लगाना, ऐतिहासिक बदलावों को मिटा देता है और लगातार एक जैसा होने का गलत प्रभाव देता है.”
इज़रायल समर्थक इस समूह ने 1700-1500 ईसा पूर्व की डिस्प्ले लेबल्स पर आपत्ति जताई थी, जिनमें पूर्वी भूमध्यसागर तट को फिलिस्तीन कहा गया था. अब इसे बदलकर “कनान” और “कनानाइट वंश” कर दिया गया है.
ब्रिटिश म्यूजियम के प्रवक्ता ने कहा, “हम आधुनिक सीमाएं दिखाने वाले नक्शों में संयुक्त राष्ट्र की शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं, जैसे गाज़ा, वेस्ट बैंक, इजरायल, जॉर्डन और जहां ज़रूरी होता है, वहां ‘फिलिस्तीनी’ शब्द को सांस्कृतिक या जातीय पहचान के रूप में इस्तेमाल करते हैं.”
म्यूजियम ने कहा कि यह फैसला “ऐतिहासिक सटीकता” के लिए लिया गया है.
लेकिन इस बदलाव के बाद विद्वानों और एक्टिविस्टों ने विरोध किया. उनका कहना है कि यह म्यूजियम के काम में राजनीतिक दखल का उदाहरण है और फिलिस्तीन की ऐतिहासिक पहचान को कमज़ोर या मिटाने की कोशिश का हिस्सा है.
राजनीतिक एक्टिविस्ट तगरीद अल-मावेद ने चेंज डॉट ओआरजी पर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसमें ब्रिटिश म्यूजियम में फिलिस्तीन नाम फिर से बहाल करने की मांग की गई.
याचिका में लिखा है, “इस तरह से नाम हटाना म्यूजियम के मानकों में असंगति दिखाता है और यह चिंता पैदा करता है कि इतिहास को दिखाने में राजनीतिक दबाव का असर हो रहा है.”
ब्रिटिश म्यूजियम पहला संस्थान नहीं है, जिस पर यूकेएलएफआई ने दबाव डाला. इससे पहले इस महीने, इस समूह के दबाव के बाद एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका ने ब्रिटानिका किड्स में फिलिस्तीन से जुड़े कई लेखों में बदलाव किया था.
2023 में, लंदन के चेल्सी एंड वेस्टमिंस्टर हॉस्पिटल ने गाजा के बच्चों द्वारा बनाई गई एक आर्टवर्क भी हटा दी थी.
‘बेहद हास्यास्पद और शर्मनाक’
स्कॉटिश कला इतिहासकार विलियम डालरिम्पल ने एक्स पर कई पोस्ट में म्यूजियम के इस कदम को “हास्यास्पद, शर्मनाक और चौंकाने वाला” बताया.
उन्होंने लिखा, “ब्रिटिश म्यूजियम का ‘फिलिस्तीन’ शब्द हटाना हास्यास्पद है, क्योंकि यह शब्द ‘ब्रिटिश’ शब्द से भी ज्यादा पुराना है.”
डालरिम्पल ने कहा कि फिलिस्तीन का पहला उल्लेख 1186 ईसा पूर्व में मिस्र के मेडिनेट हाबू स्मारक पर मिलता है.
उन्होंने कहा, “ब्रिटेन का पहला उल्लेख चौथी सदी ईसा पूर्व में ग्रीक यात्री पाइथियस की रचना में मिलता है.”
उन्होंने बताया कि थीब्स के पास मेडिनेट हाबू मंदिर में चित्रलिपि में उन लोगों का नाम लिखा है, जिन्होंने उत्तर से नील डेल्टा पर हमला किया था. मिस्र के लोग उन्हें “पेलेसेट” कहते थे.
उन्होंने लिखा, “यानी फिलिस्तीन नाम, ब्रिटेन और यूरोप के ज्यादातर स्थानों के नाम से भी बहुत पहले का है.”
ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी की क्लासिकल स्टडीज की लेक्चरर मार्चेला वार्ड और यूरोपियन लीगल सपोर्ट सेंटर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जियोवानी फैसिना ने कहा कि प्राचीन समय में इस क्षेत्र के लिए फिलिस्तीन शब्द ऐतिहासिक रूप से सही है.
ग्लोबल एनर्जी एम्बार्गो फॉर पैलेस्टाइन नाम के अभियान ने कहा, “मध्य-पूर्व से फिलिस्तीनी वस्तुएं लूटने के बाद अब इतिहास को फिर से लिखने और फिलिस्तीन और उसके लोगों को इतिहास से मिटाने की कोशिश की जा रही है.”
यूके के ट्रेड यूनियन नेता और एक्टिविस्ट हावर्ड बेकेट ने एक्स पर लिखा, “यूके में इजरायली लॉबी का प्रभाव अब म्यूजियम और इतिहास तक पहुंच गया है. यह डराने वाला है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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