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Saturday, 3 January, 2026
होमफीचर4 बच्चों की मौत, हरियाणा की ‘किलर मां’, एक कबूलनामा और कई सवाल

4 बच्चों की मौत, हरियाणा की ‘किलर मां’, एक कबूलनामा और कई सवाल

सिर्फ एक पोस्टमॉर्टम, बदलते बयान और देर से हुई फॉरेंसिक जांच—अफवाहों, सामाजिक बदनामी और महिलाओं की हिंसा को लेकर गहरे लैंगिक पूर्वाग्रहों के बीच चल रही इस जांच को और जटिल बना रहे हैं.

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पानीपत/सोनीपत: एक बदहाल अस्पताल के कमरे के अंदर, सिर पर शॉल ओढ़े, 32-साल की पूनम एक मनोचिकित्सक और कुछ पुलिस अधिकारियों के सामने बैठी थी. तीन दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद, उसकी रेगुलर मनोवैज्ञानिक जांच की जा रही थी. 50 आसान सवाल—उसकी याददाश्त, समझ और इरादे को परखने के लिए. उसने कुछ सवालों के जवाब दिए, कुछ से बचती रही. जब मनोचिकित्सक ने पूछा कि क्या उसने चार बच्चों—इशिका, शुभम, जिया और विधि की हत्या की है, तो पूनम रुकी, फिर सिर हिला दिया.

उसने कहा, “मुझे नहीं पता बाकी तीन कैसे मरे, मैंने सिर्फ विधि को मारा था.”

करीब 40 किलोमीटर दूर, पानीपत के सिविल अस्पताल के कमरे से अलग, पानीपत के नौलथा गांव और सोनीपत के सिवाह में परिवार और पड़ोसी एक बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं. यह कहानी शादियों, पानी की टंकियों, बंद दरवाजों और एक ऐसे पैटर्न से जुड़ी है, जिसे नजरअंदाज करना असंभव है.

भावड़ गांव की रहने वाली पूनम पर 2023 से 2025 के बीच चार बच्चों की हत्या का आरोप है, जिनमें उसका अपना दो साल का बेटा भी शामिल है. आरोप है कि उसने इन मौतों को हादसों में डूबने के रूप में दिखाया. हरियाणा पुलिस का कहना है कि उसने “ईर्ष्या” और “गहरे मानसिक असंतुलन” के चलते ऐसा किया और उन बच्चों को निशाना बनाया, जिन्हें वह “ज्यादा सुंदर” या “ज्यादा प्यार पाने वाले” मानती थी. जांचकर्ताओं के मुताबिक, हत्याओं का एक पैटर्न था—बच्चों को अकेला छोड़ा जाना, पानी के बर्तन ठीक जगह पर रखे जाना, संघर्ष के कोई निशान नहीं और मौतों को दुखद हादसा मान लिया जाना.

हाल ही में एक पारिवारिक शादी में 6 साल की विधि की मौत के बाद पूनम की गिरफ्तारी हुई और इसके साथ ही उस पर तुरंत नैतिक फैसला सुना दिया गया. परिवार और गांव में परिचित ठप्पे लगभग तय समय पर लग गए, साइको, तंत्र-मंत्र में विश्वास रखने वाली, ईर्ष्यालु महिला, हत्यारी मां. हर वजह समाज की उस समझ में फिट बैठती है, जिससे वह उन महिलाओं को देखता है जो तय सीमाओं को लांघती हैं, कि वे भूत-प्रेत से ग्रस्त हैं, जलनखोर हैं, अस्थिर हैं या बुरी हैं.

जिस पर कम ध्यान दिया गया है, वह है पूनम के अपने बदलते बयान—कबूलनामा, फिर उससे मुकरना, तीन मौतों से इनकार और एक क्लिनिकल जांच जिसमें कोई पहचानी जा सकने वाली मानसिक बीमारी नहीं पाई गई. आखिरी मौत के अलावा अब तक कोई ठोस फॉरेंसिक सबूत न होने के कारण, यह मामला अपराध और समझ के बीच एक असहज जगह पर अटका हुआ है. यह मंशा, जिम्मेदारी और उन सामाजिक दबावों पर कठिन सवाल खड़े करता है, जिनके चलते महिलाओं द्वारा की गई हिंसा को समझने से पहले ही समझा लिया जाता है.

मनोवैज्ञानिक और मनोविश्लेषक नीतू सरीन ने कहा, “पूनम के मामले में जो हुआ, उसे इस तरह देखा जा सकता है कि हमारा समाज लड़कियों को एक खास तरह से दिखने की सीख देता है. वे गोरी हों, पतली हों और ठीक-ठाक दिखें, ताकि दूसरों को स्वीकार्य हों, लेकिन हम उन्हें यह नहीं सिखाते कि अपने लिए कुछ चाहने का मतलब क्या होता है. एक तरह से, ये चरम हालात इस बात का विकृत रूप हैं कि महिला होने का मतलब क्या बना दिया गया है, सिर्फ अच्छी शक्ल-सूरत तक सीमित.”

गिरफ्तारी के बाद पूनम, पानीपत पुलिस से घिरी हुई | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
गिरफ्तारी के बाद पूनम, पानीपत पुलिस से घिरी हुई | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

अधूरी शादी

नौलथा में, मखमली कुर्सियों के ढेर ही उस शादी की आखिरी निशानी हैं, जो कभी ठीक से खत्म ही नहीं हो सकी.

1 दिसंबर को जब बारात निकलने की तैयारी हो रही थी, तब नए कपड़े पहने विधि, जो रिश्तेदार बच्चों के बीच इधर-उधर दौड़ रही थी, अफरा-तफरी में गायब हो गई. एक घंटे से ज्यादा वक्त तक परिवार के लोग उसे ढूंढते रहे—घर में, उसका नाम पुकारते हुए, उन कमरों में भी जहां पहले ही तलाश हो चुकी थी.

फिर किसी ने छत के स्टोररूम का दरवाजा आजमाया. वह बाहर से बंद था. अंदर, विधि का शव पानी से आधी भरी एक प्लास्टिक की टंकी पर झुका हुआ मिला.

विधि के दादा और हरियाणा पुलिस के सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर सतपाल सिंह ने कहा, “जिस पल हमने उसे उस हालत में देखा, हमें समझ आ गया कि यह हादसा नहीं है और फिर हमने एक बात नोटिस की—सिर्फ हमारी बहू पूनम की साड़ी गीली थी.”

उन्होंने कहा, उसी एक बात ने सब कुछ बदल दिया.

जब पुलिस ने पूछताछ शुरू की, तो पूनम ने कई तरह की कहानियां बताईं, लेकिन आखिरकार उसने बच्चे की हत्या की बात कबूल कर ली और फिर एक और चौंकाने वाला खुलासा किया: इससे पहले वह तीन और बच्चों को मार चुकी थी.

जिन मौतों पर किसी ने सवाल नहीं उठाया

कबूलनामे ने पुलिस को फरवरी 2023 तक पहुंचा दिया. तीन साल की इशिका, जो पूनम की भतीजी थी, पानीपत में उसके घर के बाथरूम के पास एक प्लास्टिक की बाल्टी में सिर के बल पाई गई. पास ही पूनम का अपना बेटा शुभम भी पड़ा था.

पूनम के पति नवीन ने कहा, “कोई दिखाई देने वाली चोट नहीं थी. हमें लगा वे फिसल गए होंगे. किसी ने सोचा भी नहीं कि यह हत्या हो सकती है.”

कोई पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया. परिवार ने शोक मनाया और आगे बढ़ गया, लेकिन नवीन का कहना है कि उनकी पत्नी आगे नहीं बढ़ पाई.

उन्होंने कहा, “उसका व्यवहार बदल गया था. हमें लगा वह इन मौतों को सह नहीं पा रही है. उसकी तबीयत ठीक नहीं थी.”

जांचकर्ताओं का कहना है कि इशिका ही इरादा किया गया और अकेला निशाना थी और शुभम को इसलिए मारा गया क्योंकि उसने अपराध होते देख लिया था, लेकिन बेटे की मौत के बाद पूनम खुद को संभाल नहीं पा रही थी.

नवीन ने कहा, “वह बार-बार बेहोश हो जाती थी, बहुत ज्यादा रोती थी और ऐसा व्यवहार करती थी जैसे कुछ गड़बड़ है.”

कुछ दिनों बाद, पूनम ने आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन पूछताछ के दौरान, पूनम ने दावा किया कि उसे नहीं पता या उसे याद नहीं कि क्या हुआ था. उसे जींद और चंडीगढ़ के न्यूरोलॉजिस्ट के पास ले जाया गया, जिन्होंने “शॉक” बताया और महीनों तक इलाज चला, लेकिन तब भी किसी मानसिक बीमारी का कोई निदान नहीं हुआ था.

सिवाह में जिया का घर, पूनम के घर के सामने | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सिवाह में जिया का घर, पूनम के घर के सामने | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

अगस्त 2025 में, सुराग सिवाह तक पहुंचा.

पूनम ने अपनी भतीजी जिया के साथ सोने की इच्छा जताई, उसकी मौसी पारुल ने याद किया. जिया और पूनम के घर आमने-सामने हैं.

परिवार ने इसकी इजाजत दे दी. देर रात, पारुल ने पूनम को छत की ओर जाते देखा. उसे कुछ भी गलत नहीं लगा, उसने कहा. सुबह तक जिया गायब थी.

एक घंटे तक तलाश के बाद, पारुल ने पानी की टंकी में तैरता एक कपड़ा देखा. जिया का शव मिला, सिर पानी में डूबा हुआ, पैर बाहर लटके हुए.

परिवार को लगा कि जिया नींद में चल रही थी. जब परुल ने पिछली रात की घटनाओं को लेकर पूनम से सामना किया, तो कथित तौर पर पूनम ने धमकी दी कि अगर उस पर जिया की हत्या का आरोप लगाया गया तो वह खुद को मार लेगी.

पारुल ने कहा, “हम चुप हो गए. हमें नहीं होना चाहिए था.”

सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित अपने घर पर विधि के दादा सतपाल सिंह और उनके पड़ोसी | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित अपने घर पर विधि के दादा सतपाल सिंह और उनके पड़ोसी | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

‘बच्चों से प्यार करती थी, पढ़ी-लिखी थी’

सिवाह में पड़ोसी पूनम को बड़ों से दूरी बनाए रखने वाली, लेकिन बच्चों के प्रति ध्यान देने वाली बताते हैं.

पारुल ने कहा, “वह परिवार के दूसरे लोगों से बहुत कम बात करती थी, लेकिन बच्चों के साथ वह हमेशा रहती थी.” पारुल ने कहा कि जब गांव के माता-पिता काम पर जाते थे, तो पूनम अक्सर बच्चों को मॉल ले जाया करती थी.

उन्होंने कहा, “हम ऐसे गांव से हैं जहां बहुत से लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं. कई बार बातचीत इस पर होती थी कि कौन ज्यादा सुंदर दिखता है, कौन ‘गोरा’ है, कौन अच्छे कपड़े पहनता है.”

कई परिवारों को परेशान करने वाली घटनाएं याद हैं—विधि पर गरम चाय गिरना, जिया के चेहरे पर जलती हुई तीली फेंकना. हर बार पूनम का जवाब होता था—“हादसा”. हर बार इसके बाद चुप्पी छा जाती थी.

सतपाल सिंह ने कहा, “हमें झटका लगा था, उसके चेहरे पर कोई मलाल नहीं था. जब हमने उससे सवाल किए, तो उसने ठीक से जवाब भी नहीं दिया, लेकिन क्योंकि वह रिश्तेदार थी, हमने आवाज़ नहीं उठाई.”

सिवाह में, पूनम के पड़ोसी कुछ हद तक राहत महसूस कर रहे हैं कि उनकी आशंकाएं सच साबित हो गईं.

उसके पड़ोसी, बिल्लो और सुनीता, गरम चाय पीते हुए चर्चा करते हैं कि कहां गलती हुई.

बिल्लो ने सुनीता से कहा, “किसके मन में क्या चल रहा है, कौन जानता है? जिया की मौत के वक्त भी हम सब जानते थे कि किसी ने उसे मारा है. अब यह पक्का हो गया कि वह पूनम ही थी.”

पूनम ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री और ग्रेजुएशन की थी.

बिल्लो ने हंसते हुए कहा, “वह इतनी पढ़ी-लिखी थी. अपनी ज़िंदगी के साथ बहुत कुछ कर सकती थी और देखिए उसने क्या चुना. शक्ल की ना सूरत की, सुथरी ना थी वो—अगर वह खुद को ही सुंदर मानती है, तो क्या सबको मार देगी?”

स्थानीय मीडिया, जिसने पूनम को “साइको किलर” करार दिया है, खबर सामने आने के बाद से उसके घर के चक्कर काट रहा है.

पूनम की मां सुनीता माइक्रोफोन और मोबाइल फोन लिए पत्रकारों के बार-बार सामने आने से थक चुकी हैं. सुनीता दरवाजे के पीछे से झांकती हैं, उलझन में.

आंखे मिलाए बिना सुनीता ने कहा, “मैं इन सवालों का क्या जवाब दूं? उसे कोई बीमारी नहीं थी. हम उसे एक तांत्रिक के पास ले गए थे, लेकिन और कुछ नहीं था…उसने परिवारों के साथ जो किया है, उसकी सजा उसे मिलेगी.”

सिवाह में अपने घर पर जिया की मौसी पारुल | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सिवाह में अपने घर पर जिया की मौसी पारुल | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन

पूनम की मानसिक स्थिति और मकसद को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन ज़रूरी हो गया. दो दिनों से ज्यादा समय तक मनोचिकित्सक डॉ. संदीप अंटिल ने पूनम का मूल्यांकन किया. उनका फैसला: उसमें किसी गंभीर मानसिक बीमारी या साइकोपैथी के कोई लक्षण नहीं मिले. पूनम एक सामान्य बच्ची थी और उसकी मां ने भी उसके बचपन के दौरान उसके व्यवहार में कुछ भी असामान्य नहीं देखा था.

अंटिल ने कहा, “वह डिप्रेशन में नहीं है और किसी गंभीर मेडिकल स्थिति से पीड़ित नहीं है. उसका व्यक्तित्व अलग है, लेकिन उसके जवाब टालने वाले थे. उसने जानबूझकर गलत जवाब दिए.”

पूनम ने यह भी नहीं बताया कि उसने विधि को क्यों मारा, जबकि पुलिस और उसका परिवार इसके लिए ‘जलन’ को वजह बता रहे हैं.

संदीप ने कहा, “शुरुआत में कहा गया कि उसे ब्यूटी कॉम्प्लेक्स था और वह नहीं चाहती थी कि कोई उससे ज्यादा सुंदर दिखे, लेकिन अब वह यह नहीं बता रही कि उसने विधि को क्यों मारा. पूनम की भावनात्मक बुद्धिमत्ता ऊंची है.”

मनोवैज्ञानिक के पास सिर्फ एक सिद्धांत है. “कुछ लोगों को दूसरों के दर्द से सुख मिलता है.”

लेकिन मनोवैज्ञानिक नीतू सरीन की व्याख्या अलग है. उन्होंने कहा,“मनोविश्लेषण में, जब हम पूनम जैसे व्यक्ति को देखते हैं, जो कथित तौर पर इन इच्छाओं के चलते एक बच्चे की हत्या कर रही है, तो वह अपने ही कुछ हिस्सों को मार रही होती है.”

पूछताछ के दौरान, पूनम में चयनात्मक याददाश्त की कमी दिखी—वह साधारण मुहावरे, नंबर या शब्द सुनने के कुछ मिनट बाद ही याद नहीं कर पा रही थी. जब डॉक्टर ने पूनम से साधारण गणित करने को कहा, तो वह कुछ देर तक हिचकिचाई.

डॉक्टर ने कहा कि उसे पछतावा है, लेकिन फिर भी कुछ न कुछ गड़बड़ है.

संदीप ने कहा, “वह रोने लगी, लेकिन आंसू नहीं थे, लेकिन उसने अपनी गलती सुधारने का मौका मांगा.”

सिवाह में पूनम का घर | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सिवाह में पूनम का घर | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

पुलिस का बयान

पुलिस का कहना है कि पूनम के बदलते बयानों से मामला जटिल ज़रूर होता है, लेकिन कमजोर नहीं पड़ता. जांचकर्ताओं ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं और सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक सबूत जुटा रहे हैं. केवल विधि के शव का पोस्टमॉर्टम हुआ है; फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार है.

एसपी पानीपत भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पहली पूछताछ के दौरान पूनम ने स्वीकार किया था कि “उसे सुंदर लड़कियां पसंद नहीं थीं.”

सिंह ने कहा, ‘‘उसकी काफी ‘साइको किलर’ वाली सोच है.”

डीएसपी नवीन संधू ने कहा कि पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने कबूलनामे दर्ज किए हैं और उन्हें भरोसा है कि सबूत टिकेंगे.

एक अधिकारी ने कहा, “पहली बार उसका मारने का तरीका काम कर गया. किसी को मां पर शक नहीं हुआ. या किसी रिश्तेदार पर. जब तक एक दरवाजा बाहर से बंद नहीं मिला.”

भारतीय न्याय संहिता के तहत, केवल कबूलनामा किसी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं होता, जब तक कि उसे स्वतंत्र सबूतों का समर्थन न मिले. इस मामले में, सिर्फ आखिरी मौत—विधि का ही पोस्टमॉर्टम हुआ; पहले की मौतें हादसा दर्ज की गईं, बिना किसी फॉरेंसिक जांच के. हालांकि, कबूलनामे से मुकर जाना अपने आप में उसे अमान्य नहीं करता, लेकिन जब मामला ट्रायल में जाएगा तो स्वेच्छा और पुष्टि जैसे सवाल बड़ी खामियां बन सकते हैं.

सोनीपत के भावड़ गांव में अपने घर पर पूनम के पति नवीन, उनके माता-पिता और बेटे के साथ | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सोनीपत के भावड़ गांव में अपने घर पर पूनम के पति नवीन, उनके माता-पिता और बेटे के साथ | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

सवालों में घिरा परिवार

घर लौटकर, नवीन अपने छोटे बेटे, अब दो साल का, को फर्श पर खेलते देखते हैं, उसके चारों ओर खिलौना ट्रक बिखरे पड़े हैं.

उन्होंने कहा, “उसने जो किया, उससे मेरा पूरा परिवार टूट गया और हमारी इज्जत मिट्टी में मिल गई. अगर इस बार उसकी गिरफ्तारी नहीं होती, तो वह किसी और बच्चे को मार देती.” उनके पिता बीच में टोकते हैं.

वे बुदबुदाते हैं, “वो मां नहीं थी,वो डायन थी.”

नवीन अपने बच्चे को देखते रहते हैं और बस घूरते रह जाते हैं.

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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