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Friday, 10 April, 2026
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भारत के CEO इस बात से सहमत हैं कि AI नौकरियों को बदल देगा लेकिन इसके तरीके पर उनकी राय बंटी हुई है

जेरोधा के नितिन कामथ के AI की वजह से किसी को नौकरी से न निकालने के वादे से लेकर ज़ोहो के श्रीधर वेम्बु की देखभाल जैसे वैकल्पिक कामों की सलाह तक, भारत के शीर्ष CEOs के काम के भविष्य को लेकर अलग-अलग विचार हैं.

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नई दिल्ली: नौकरियों पर AI के खतरे से परेशान हैं? तो अर्थ को किसी और रूप में समझिए. संक्षेप में, हाल ही में एक पोस्ट में जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु का यही नजरिया था. उनके अनुसार मानव समाज धीरे-धीरे ऐसे श्रम की ओर बढ़ रहा है, जो केवल पैसे कमाने तक सीमित नहीं होगा.

श्रीधर वेंबू ने कहा, “अगर हमारी आत्म-मूल्य की भावना इस बात से आती है कि हम आर्थिक रूप से कितना योगदान देते हैं, या फिर हमारी बौद्धिक दिखावेबाज़ी से आती है, तो AI हमारे आत्म-सम्मान के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.” उन्होंने आगे जोड़ा कि बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करना, शास्त्रीय संगीत बजाना या सिर्फ प्रेम के कारण खेती करना—ऐसे काम आगे भी बने रहेंगे. यह AI को लेकर निराशावादी सोच पर एक ‘धार्मिक दृष्टिकोण’ जैसा था.

भारत के शीर्ष कॉरपोरेट नेतृत्व में AI और रोजगार के भविष्य को लेकर गहरी विभाजन रेखा दिखाई देती है. उनके अलग-अलग विचार आर्थिक, तकनीकी और दार्शनिक चिंताओं से प्रेरित हैं. जहां श्रीधर वेंबू आर्थिक मूल्य से परे जीवन की बात करते हैं, वहीं पेटीएम के विजय शेखर शर्मा AI को अपनाने की वकालत करते हैं, और जेरोधा के नितिन कामथ नई तकनीक के कारण कर्मचारियों की छंटनी न करने की नीति लागू करते हैं.

श्रीधर वेंबू, जो नियमित रूप से AI पर अपने विचार साझा करते रहते हैं, ने फरवरी में काम के भविष्य पर अपनी पोस्ट से लोगों का ध्यान खींचा.

एक टिप्पणी में कहा गया, “रचनात्मकता और देखभाल कभी खत्म नहीं होगी, जैसे भाव और अनुभव भी बने रहेंगे.” वहीं एक अन्य ने सवाल उठाया कि क्या यह “विरोधाभासी” नहीं है कि वे युवाओं को कम आर्थिक मूल्य वाले काम करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि खुद ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी से आय कमा रहे हैं. इस बहस में यह तर्क भी आया कि कला भी बिना आर्थिक सहयोग के टिक नहीं पाएगी.

श्रीधर वेंबू ने माना कि आगे का रास्ता दो दिशाओं में बंट सकता है.

उन्होंने कहा, “यदि तकनीक बहुत अधिक संसाधन पैदा करती है, लेकिन रोजगार नहीं, तो यह राजनीतिक और आर्थिक प्रश्न बन जाएगा कि लोग उस संसाधन का उपयोग कैसे करेंगे. प्रकृति, संस्कृति, कला, खेल, संगीत, मनोरंजन और आध्यात्म—ये सभी ऐसे रास्ते हैं, जहां लोग स्वयं को व्यस्त रख सकते हैं. दूसरा समाधान ‘सार्वभौमिक मूल आय’ हो सकता है. कुछ समाज पहला रास्ता चुनेंगे, कुछ दूसरा, और कुछ दोनों का मिश्रण अपनाएंगे.”

लेकिन हर मुख्य कार्यकारी अधिकारी इतनी दूर की सोच नहीं रहा है. कुछ का ध्यान इस बात पर है कि अभी के समय में व्यवसाय और कर्मचारी AI का उपयोग कैसे करें.

AI के समर्थक

‘AI पहले’ की सोच को जोर-शोर से आगे बढ़ाने वालों में पेटीएम के विजय शेखर शर्मा प्रमुख हैं.

विजय शेखर शर्मा ने कहा, “जल्द या देर से हमें AI को एक कर्मचारी या यहां तक कि वित्त प्रमुख के रूप में अपनाना होगा.” हालांकि, उन्होंने इसे हमेशा नौकरी जाने के खतरे के बजाय एक ‘क्रांति’ के रूप में प्रस्तुत किया है.

दिल्ली में फरवरी में हुए एक शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि AI से नौकरियां चली जाएंगी या फिर यह सिर्फ बातचीत के बेहतर टूल बनाएगा, लेकिन असल में यह तकनीक वित्तीय समावेशन बढ़ा सकती है और आखिरी व्यक्ति तक भी लोन पहुंचाने में मदद कर सकती है.

विजय शेखर शर्मा ने कहा, “AI अब केवल बातचीत या तस्वीर संपादन तक सीमित नहीं है; यह व्यापार, वित्त, कृषि और उद्योग में प्रवेश कर रही है और बड़े स्तर पर वास्तविक समस्याओं का समाधान कर रही है. यह नौकरी जाने की नहीं, बल्कि प्रचुर अवसरों की बात है, और भारत इस क्रांति का नेतृत्व करेगा.”

उनका यह दृष्टिकोण ग्लोबल तकनीकी नेताओं जैसे एरिक श्मिट और जेन्सेन हुआंग से मेल खाता है, जिन्होंने कहा है कि अगर लोग AI को नहीं अपनाते, तो वे पीछे रह सकते हैं.

विजय शेखर शर्मा लंबे समय से इस दिशा में विचार रखते आए हैं. 2021 में उन्होंने एक पुराने संदेश को फिर साझा किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक स्मार्टफोन सब कुछ कर सकता है, यहां तक कि नए व्यापार मॉडल भी बना सकता है. 2025 में पेटीएम दुनिया भर में AI अपनाने वाली प्रमुख कंपनियों की सूची में शामिल हुआ.

पिछले वर्ष अक्टूबर में पेटीएम ने ‘साउंडबॉक्स’ नामक एक भुगतान उपकरण पेश किया, जिसमें 11 भाषाओं में बोलने वाला AI सहायक शामिल है. विजय शेखर शर्मा ने इसे साधारण फोन से स्मार्टफोन की ओर बदलाव जितना बड़ा कदम बताया.

उन्होंने कहा, “तकनीक को परिपक्व और प्रभावशाली बनने में समय लगता है. AI अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है.”

‘AI ने हम सभी को परीक्षक बना दिया’

क्रेड के संस्थापक कुणाल शाह अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली विचारों के लिए जाने जाते हैं.

उनका एक प्रसिद्ध कथन है: “AI ने हम सभी को परीक्षक बना दिया है”—अर्थात जब मशीनें काम कर रही हैं, तो मनुष्य उनका परिणाम जांचने का काम कर रहा है.

कुणाल शाह ने कहा, “दो तरह के लोग AI का उपयोग करते हैं—पहले, जो उसकी गलतियों पर ध्यान देकर उसे न अपनाने के कारण ढूंढते हैं; दूसरे, जो उसकी खूबियों का उपयोग करते हैं और उसकी कमियों के साथ काम करते हुए अत्यधिक उत्पादक बन जाते हैं. इसे उच्च बुद्धिमत्ता वाले प्रशिक्षुओं की टीम की तरह इस्तेमाल करें, न कि ऐसे विशेषज्ञ की तरह जिसकी गलती पकड़नी हो.”

लेकिन वह इस बारे में भी साफ़-साफ़ बताते हैं कि इस बदलाव का उन लोगों के लिए क्या मतलब है जो अभी-अभी अपना करियर शुरू कर रहे हैं. Meta से लेकर Oracle तक की कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी और भारत में हायरिंग में आई सुस्ती के बीच, शाह ने एक अनुमान लगाया: “AI की वजह से, एंट्री-लेवल नौकरियों की कमी के चलते नए लोगों को शायद एंटरप्रेन्योर बनना पड़े.”

इस पोस्ट पर लगभग 500 जवाब आए. इसका विरोध करने वालों में convverse.ai के फाउंडर मुकेश कुमार भी थे: “एक ऐसा नया व्यक्ति जिसका नज़रिया जिज्ञासु हो और जो AI टूल्स की मदद से समस्याओं को हल करने का इच्छुक हो, वह बहुत ज़्यादा वैल्यू जोड़ सकता है.”

कुणाल शाह ने यह भी इशारा किया कि इंसानों की कुछ क्षमताएं आसानी से बदली नहीं जा सकतीं.

“AI ने मुझे यह एहसास दिलाया कि बुद्धिमत्ता की एक साफ़ निशानी यह है कि कोई व्यक्ति बिना ज़्यादा संदर्भ के किसी जटिल चीज़ को कितनी तेज़ी से समझ पाता है,” उन्होंने अपनी एक बहुत चर्चित LinkedIn पोस्ट में लिखा. इस बयान पर कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए बताया कि शाह का मतलब क्या था.

“बिल्कुल!! ज़्यादा स्मार्ट मॉडल्स को बस एक इशारा चाहिए होता है, जबकि कम स्मार्ट मॉडल्स को बहुत ज़्यादा संदर्भ की ज़रूरत पड़ती है, और फिर भी वे ग़लती कर देते हैं—और यही बात इंसानों पर भी लागू होती है,” एक यूज़र ने लिखा.

‘टीम को समय दीजिए’

अगर श्रीधर वेंबू को AI का दार्शनिक कहा जाए और विजय शेखर शर्मा को उसका प्रचारक, तो नितिन कामथ को व्यवहारिक दृष्टिकोण रखने वाला कहा जा सकता है.

नितिन कामथ ने मार्च में एक पोस्ट में उस सवाल का जवाब दिया, जो कई छोटे निवेशक पूछते हैं—क्या AI से पैसा कमाया जा सकता है?

नितिन कामथ ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो ऐसा नहीं है. जो लोग लगातार बाजार में लाभ कमा रहे हैं, वे उच्च गति व्यापार करने वाली कंपनियां हैं, जिन्होंने वर्षों में मजबूत ढांचा और डेटा तैयार किया है. AI आपको अनुशासित बना सकती है, लेकिन अधिक बुद्धिमान नहीं.”

उन्होंने पहले भी लिखा था कि हम एक बड़े बदलाव की शुरुआत में हैं, जहां उपयोगकर्ता स्वयं अपने तरीके से सेवाओं का उपयोग करेंगे और मंच केवल पृष्ठभूमि में काम करेगा.

साथ ही उन्होंने व्यवसायों और कर्मचारियों पर इसके प्रभाव को भी स्पष्ट किया.

नितिन कामथ ने कहा, “वास्तविक प्रभाव समझने में कुछ वर्ष लगेंगे. जिन व्यवसायों के पास संसाधन हैं, उन्हें अपनी टीम को बदलाव के अनुसार ढलने का समय देना चाहिए.”

उन्होंने यह भी माना कि AI नौकरियां खत्म कर सकती है, लेकिन उनकी कंपनी ने आंतरिक स्तर पर एक नीति बनाई है.

नितिन कामथ ने कहा, “हमने अपनी टीम को स्पष्टता देने के लिए नीति बनाई है—हम केवल इसलिए किसी कर्मचारी को नहीं निकालेंगे कि नई तकनीक ने उसके काम को अप्रासंगिक बना दिया है.”

यह लेख एक श्रृंखला का दूसरा भाग है, जिसमें भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बदलते कार्यस्थल, कार्य संस्कृति और जीवनशैली पर अपने विचार साझा कर रहे हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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