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Monday, 16 March, 2026
होमफीचरNRIs और पॉप स्टार्स के बाद अब गांव के सरपंच निशाने पर, पंजाब में गैंगस्टरों का नया टारगेट

NRIs और पॉप स्टार्स के बाद अब गांव के सरपंच निशाने पर, पंजाब में गैंगस्टरों का नया टारगेट

जनवरी से अब तक मारे गए चार सरपंचों में से दो AAP से जुड़े थे—यह बात पंजाब की राजनीतिक हलकों में चुपचाप चर्चा का विषय बनी हुई है.

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तरनतारन: पंजाब के तरनतारन में हाल ही में मारे गए वल्टोहा गांव के सरपंच की 28 साल की बेटी चुपचाप सोफे पर बैठी थीं—हाथ में चाय का कप और दुख से भरी आंखें सामने दीवार पर टिकी हुई थीं. उस दीवार पर उनके पिता जरमल सिंह हर जगह दिखाई देते हैं—राजनीतिक नेताओं के साथ मुस्कुराते हुए फ्रेम की गई तस्वीरों में और अपने कार्यकाल के दौरान मिले पुरस्कार लेते हुए.

गांव के बीचों-बीच बने बड़े से मकान में, जहां परिवार और रिश्तेदार रहते हैं, अब भी शोक का माहौल है. बेटी ने इसे एक प्रिय सरपंच की बेवजह और अहंकार से भरी हत्या बताया.

उन्होंने कहा, “जब कोई आपसे झगड़ा करता है तो गुस्सा आता है, लेकिन जब कोई आपसे सब कुछ छीन ले—आपके पिता को छीन ले, तो गुस्सा भी नहीं आता. बस लाचारी रह जाती है.”

जरमल को 4 जनवरी को अमृतसर के एक रिजॉर्ट में शादी में शामिल होने के दौरान गोली मार दी गई थी. बाद में पुलिस ने इस हत्या को अफरीदी गैंग से जोड़ा, जो विदेश में बैठे हैंडलरों के जरिए स्थानीय शूटरों से काम कराता है.

18 फरवरी को, थथियां महंतन गांव के सरपंच हरबिंदर सिंह की भी एक शादी में हत्या कर दी गई. इस हमले की जिम्मेदारी बाद में कनाडा में बैठे लखबीर लांडा गैंग ने ली.

पंजाब के कुख्यात गैंग, जो लंबे समय से NRIs, राणा बलाचौरिया जैसे कबड्डी खिलाड़ियों और सिद्धू मूसेवाला जैसे संगीतकारों को निशाना बनाते रहे हैं—अब ग्रामीण नेताओं और आम लोगों को भी निशाना बना रहे हैं. सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने पंजाबी मनोरंजन जगत को हिला दिया था.

पिछले तीन महीनों में राज्य में चार सरपंचों की हत्या हो चुकी है. गैंगस्टर अब वसूली के लिए नए इलाकों की तलाश में हैं. शहर के व्यापारियों और पॉप सिंगर्स से आगे बढ़कर वे अब ग्रामीण पंजाब की ओर बढ़ रहे हैं, जहां सरपंच जैसे लोग प्रभावशाली होते हैं और उनसे वसूली के लिए पर्याप्त पैसा भी होता है. वे अब छोटे और कम चर्चित निशानों को ढूंढ रहे हैं.

पंजाब के कई सरपंच अब अपनी सुरक्षा के लिए बंदूकें रखने लगे हैं और बड़े एसयूवी वाहन खरीदने से भी बच रहे हैं, ताकि वे आसान निशाना न बन जाएं. वसूली, ड्रग्स और हत्याओं का यह कभी खत्म न होने वाला चक्र पंजाब के लोगों को लगातार डर के माहौल में रख रहा है. अपराध अब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. कई लोग रात 8 बजे के बाद अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं और जो बाहर निकलते हैं वे समूह में चलते हैं. जिनके पास साधन हैं, वे सुरक्षा के लिए हथियार रखते हैं.

रात के समय लोग अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टरों या उनके स्थानीय गुर्गों से आने वाली फिरौती की कॉल के डर में रहते हैं और फिरौती देने से भी हमेशा वसूली से छुटकारा नहीं मिलता. कुछ मामलों में एक ही लोगों को बार-बार परेशान किया गया है. हालांकि, पंजाब में हाल में हुई सभी सरपंच हत्याएं गैंग से जुड़ी नहीं थीं. एक मामला निजी दुश्मनी का भी था.

पट्टो हीरा सिंह गांव के सरपंच हरविंदर सिंह हैप्पी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
पट्टो हीरा सिंह गांव के सरपंच हरविंदर सिंह हैप्पी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

पट्टो हीरा सिंह गांव के सरपंच हरविंदर सिंह हैप्पी को 6 मार्च को बाघा पुराना में उनके जिम के बाहर गोली मार दी गई थी. आरोपी ने आरोप लगाया कि सरपंच का उसकी पत्नी के साथ संबंध था और गुस्से में उसने उनकी हत्या कर दी. पुलिस ने कहा कि पति को लंबे समय से गंभीर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी, जिसने उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया. हालांकि, सरपंच के परिवार का कहना है कि वह केवल उस महिला की मदद कर रहे थे, जिसे उसका पति परेशान करता था.

लगभग उसी समय जालंधर के बूटियां दियां छन्ना गांव के सरपंच महिंदर सिंह को ड्रग तस्करों ने पीट-पीटकर मार डाला. यह हत्या पंजाब में चल रहे एंटी-ड्रग अभियान के बीच हुई. महिंदर के परिवार ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मांग की कि उन्हें शहीद घोषित किया जाए, क्योंकि उनका कहना है कि वह ड्रग तस्करों के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे.

‘गैंग्स ऑफ पंजाब’ किताब के लेखक जुपिंदरजीत सिंह ने कहा, “सरपंचों को निशाना बनाना एक नया ट्रेंड लगता है. ये हत्याएं अच्छी तरह से योजनाबद्ध दिखाई देती हैं और इसके राजनीतिक असर भी हो सकते हैं. खास तौर पर जिला परिषद और स्थानीय समिति चुनावों के बाद यह पैटर्न तेज हुआ है.”

तरनतारन के एसएसपी सुरेंद्र लांबा के अनुसार, इन हत्याओं के पीछे मुख्य कारण वसूली है.

उन्होंने कहा, “जो लोग पैसे देने से इनकार करते हैं, उनकी हत्या का खतरा रहता है. कुछ हत्याएं निजी दुश्मनी की वजह से भी होती हैं, जो अक्सर अपराध से जुड़ी होती हैं, या उन लोगों को निशाना बनाया जाता है जो गैंग के खिलाफ काम करते हैं. ये लोग गांव के लोगों को 10,000 या 15,000 रुपये जैसी छोटी रकम देकर अपने साथ जोड़ लेते हैं. गैंग एक नेटवर्क की तरह काम करते हैं, कुछ लोग अपराध करते हैं, कुछ परिवहन संभालते हैं और कुछ पैसे का प्रबंधन करते हैं.”

‘एक अच्छा सरपंच’

शादियां, जिनमें भीड़, तेज़ संगीत और अफरा-तफरी होती है, अक्सर हमलावरों के लिए बिना ध्यान दिए अंदर घुसने का अच्छा मौका देती हैं, लेकिन तरनतारन के वल्टोहा गांव के सरपंच जरमल सिंह ने सबसे बुरे हालात के लिए तैयारी कर रखी थी. अमृतसर के वेरका बाईपास के पास मैरीगोल्ड पैलेस रिज़ॉर्ट में हुई उस शादी में उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी.

उस शाम वहां 100 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे, जिनमें खेमकरण के विधायक सर्वन सिंह धुन भी शामिल थे, तभी दो आदमी आगे आए, निशाना साधा और गोली चला दी. जैकेट कोई सुरक्षा नहीं दे पाई. जरमल को सिर में गोली लगी.

लोग अब बहुत डरे हुए हैं. कोई भी कहीं से भी आकर किसी को मार सकता है. तरनतारन पहले से ही ड्रग्स, हत्याओं और बेरोज़गारी के लिए बदनाम है.

—अमरकोट निवासी

पुलिस के अनुसार, यह उनकी हत्या की चौथी कोशिश थी. लगभग एक साल से उन्हें बार-बार वसूली की धमकियां मिल रही थीं. इन धमकियों के बारे में लोगों को उनके मरने के बाद ही पता चला, जब धुन ने एक बयान में इसका ज़िक्र किया.

गैंगस्टर प्रभदीप सिंह उर्फ प्रभ दासूवाल ने 50 लाख रुपये की मांग की थी. जरमल ने दो बार पैसे देने से मना कर दिया था.

जरमल एक ठेकेदार और स्थानीय कॉन्ट्रैक्टर थे और गैंग उन्हें सिर्फ आसान पैसे का जरिया मानता था. एक ग्रामीण ने कहा, “उन्होंने उनसे कहा था कि पैसे देने से बेहतर है कि वह मर जाएं.”

अमरकोट में सदर हरि सिंह नलवा सेकेंडरी स्कूल चलाने वाले सुरजीत सिंह ने कहा कि जब जरमल ने दो बार मना कर दिया, तो प्रभदीप को डर था कि बाकी लोग भी पैसे देने से मना कर सकते हैं. इससे उसका धंधा प्रभावित होता. इसलिए उसने उन्हें मार दिया.

सुरजीत सिंह, जो अमरकोट में सदर हरि सिंह नलवा सेकेंडरी स्कूल चलाते हैं | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट
सुरजीत सिंह, जो अमरकोट में सदर हरि सिंह नलवा सेकेंडरी स्कूल चलाते हैं | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट

लंबे समय तक कुछ गांव वालों को लगता था कि धमकियां बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं. उन्हें लगता था कि जरमल सिर्फ सुरक्षा पाने के लिए ऐसा कह रहे हैं. यह धारणा तब बदली जब पिछले साल उन पर बंदूकधारियों ने गोली चलाई. एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई और उनका ड्राइवर भी घायल हो गया. एक और मौके पर हमलावरों ने उनके घर पर गोली चलाई और जरमल ने अपनी बंदूक से जवाबी फायरिंग की.

एक पड़ोसी गांव के सरपंच ने कहा, “कुछ महीनों के लिए उन्हें सुरक्षा दी गई थी, लेकिन गार्ड अक्सर रात में शराब पी लेता था और अपनी ड्यूटी नहीं करता था. इसलिए जरमल सिंह के पास उसे हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.”

लगातार धमकियों के बाद, लोगों का कहना है कि जरमल ने वसूली के पैसे देने के बारे में सोचा था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. गांव में आम धारणा है कि गैंगस्टर आम तौर पर दो बार फोन करता है—उसके बाद वह शूटर भेज देता है. वल्टोहा में सिंह की हैसियत सिर्फ एक सरपंच की आधिकारिक ताकत से कहीं ज्यादा थी. आसपास के गांवों के लोग उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में जानते थे जिनकी पहुंच पंचायत कार्यालय से काफी आगे तक थी.

बिजली कनेक्शन और सिंचाई से जुड़ी शिकायतों से लेकर चंडीगढ़ के सरकारी दफ्तरों में काम करवाने तक, गांव वालों के लिए हर समस्या का समाधान जरमल के पास था. उनके राजनीतिक संबंधों ने उनकी इस स्थिति को और मजबूत किया.

उनका घर भी उसी हैसियत को दिखाता था. सफेद रंग का बड़ा बंगला गांव में अलग ही नज़र आता था, जबकि वहां बड़े घर आम हैं. चौड़ी बालकनियां, बड़ा लॉन और एक बड़ा गेट जो आंगन में खुलता था, जहां गाड़ियां कतार में खड़ी रहती थीं—दो सफेद फॉर्च्यूनर और एक एटिओस. गांव वालों के अनुसार, सिंह के पास 70 से 80 एकड़ खेती की ज़मीन भी थी.

ग्रामीण पंजाब में, जहां ज़मीन का मालिक होना और राजनीतिक संबंध अक्सर साथ-साथ चलते हैं, सिंह के पास दोनों थे. वह ज़मीन के मालिक और राजनीतिक प्रभाव वाले मुखिया थे—ठीक वैसे ही लोग जिन्हें गैंग अब पैसे वसूलने के लिए निशाना बना रहे हैं.

अमरकोट गांव में एक मोटर मैकेनिक की दुकान पर बैठे साठ साल के एक व्यक्ति ने कहा, “वह बहुत अच्छे सरपंच थे. गरीब लड़कियों की शादी में वह अपनी जेब से 6,000 रुपये तक दे देते थे. लोगों ने उन्हें इतना पसंद किया कि तीन बार सरपंच चुना.”

फिर भी उनकी हत्या को लेकर होने वाली बातें अब धीरे-धीरे खत्म हो गई हैं. और डर का माहौल फैल गया है.

अमरकोट गांव का एक निवासी सरपंच जरमल सिंह के पोस्टर की ओर इशारा करते हुए | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट
अमरकोट गांव का एक निवासी सरपंच जरमल सिंह के पोस्टर की ओर इशारा करते हुए | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट

समूह में मौजूद एक और व्यक्ति ने कहा, “अब लोग बहुत डर गए हैं. कोई भी कहीं से आकर किसी को भी मार सकता है. तरनतारन पहले ही ड्रग्स, हत्याओं और बेरोजगारी के लिए बदनाम है.”

हत्या के कुछ ही दिनों के भीतर पंजाब पुलिस ने कई राज्यों में अभियान चलाया और 12 जनवरी तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें छत्तीसगढ़ से लाए गए दो शूटर और पंजाब व राजस्थान के अन्य लोग शामिल थे. जांच के दौरान दो मुख्य सहयोगी—हरनूर सिंह उर्फ नूर और सुखराज सिंह बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए.

जरमल पंजाब की सत्तारूढ़ पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) के सदस्य थे. दरअसल, हाल के महीनों में राज्य में मारे गए कई सरपंच AAP से जुड़े हुए थे—यह बात राजनीतिक हलकों में चुपचाप ध्यान खींच रही है.

5 जनवरी को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जरमल की हत्या के बाद पुलिस को तेज़ी और सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया. रिपोर्ट के अनुसार, मान ने डीजीपी गौरव यादव से बात की और जांच की विस्तृत जानकारी मांगी.

लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की मौत पर ज्यादातर चुप ही रहा है.

शादी में हत्या

18 फरवरी को तरनतारन–बठिंडा हाईवे पर स्थित सिद्धू फार्म हाउस में उनके चचेरे भाई की शादी थी. जश्न अभी ठीक से रुका भी नहीं था. तरनतारन जिले के थाठियां महंतां गांव के 45 साल के आम आदमी पार्टी से जुड़े सरपंच हरबिंदर सिंह अभी दोस्तों के साथ डांस करके स्टेज से नीचे उतरे थे. जैसे ही वह सोफे पर बैठे, तीन हथियारबंद आदमी भीड़ भरे शादी हॉल में अंदर आ गए.

उनमें से एक भीड़ में घुलमिल गया, फिर अचानक उसने बंदूक निकाली और पास से चार गोलियां चला दीं—उनके पेट और सिर पर.

मारे गए सरपंच के 35 साल के भाई हरप्रीत सिंह ने यह पूरी कहानी शादी में मौजूद मेहमानों से सुनी. इसी तरह वह अपने भाई के आखिरी पलों की याद को जोड़कर समझते हैं.

अकेले हमारे गांव में ही कम से कम 80 से 90 लोगों को ऐसे कॉल आए होंगे. किसानों को आते हैं. दुकानदारों को आते हैं, जिसके पास थोड़ा भी पैसा होता है, उसे टारगेट किया जाता है.

—वल्टोहा के पास एक गांव का सरपंच

हत्या के कुछ घंटों बाद कनाडा में बैठे गैंगस्टर लखबीर लांडा, जिसे हरिके भी कहा जाता है, ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली. वह 9 दिसंबर 2022 को तरनतारन के सरहाली पुलिस स्टेशन पर हुए रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) हमले का भी एक मुख्य साजिशकर्ता था.

लांडा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फैलाए गए एक अपुष्ट पोस्ट में कहा, “हमने सरपंच की हत्या की क्योंकि उसने हमारे छोटे भाई नोनी को नुकसान पहुंचाया था, जिसमें वह गवाह था. यह तो सिर्फ ट्रेलर था…पुलिस गैरकानूनी एनकाउंटर कर रही है—या तो उन्हें रोको, नहीं तो हमारे सभी भाइयों का बदला एक ही दिन में लिया जाएगा.”

एसएसपी लांबा ने कहा कि पुलिस ने इस हत्या के मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने शूटरों को पनाह दी और उनकी मदद की.

उन्होंने कहा, “जिन लोगों को हमने गिरफ्तार किया, उनमें से हर एक को इस अपराध में शामिल होने के लिए लगभग 18,000 रुपये दिए गए थे, और उनमें से एक को 56,000 रुपये मिले.”

इसे छिपा हुआ रोज़गार बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग जल्दी पैसे कमाने के लालच में इसमें शामिल हो जाते हैं. पुलिस ने आरोपियों से एक एके-47 राइफल और चार पिस्तौल भी बरामद कीं, जिनमें देसी कट्टा (हाथ से बनी अवैध पिस्तौल) भी शामिल हैं. ऐसे अपराधों में शामिल कई साथी स्थानीय ड्रग तस्कर या आदतन अपराधी होते हैं, जिन्हें गैंग आसानी से अपने साथ जोड़ लेते हैं.

हरप्रीत के लिए यह हिंसा प्रतिष्ठा और डर से भी जुड़ी है. उन्होंने कहा, “वो ऐसा करते हैं और फिर इसकी जिम्मेदारी लेते हैं क्योंकि वो बड़े बनना चाहते हैं और पूरे पंजाब में डर फैलाना चाहते हैं.”

अब थाठियां महंतां में सरपंच के घर के बाहर एक पुलिस अधिकारी बैठता है. बड़ा धातु का ग्रे रंग का गेट बहुत कम खुलता है और जब खुलता है, तो अंदर आंगन में प्लास्टिक की कुर्सियों पर चुपचाप बैठे रिश्तेदार और आने वाले लोग दिखाई देते हैं.

परिवार अभी भी घर के सबसे बड़े बेटे के खोने के दुख को स्वीकार करने की कोशिश कर रहा है.

हरप्रीत ने कहा, “अब पंजाब में लोग कानून से डरना बंद कर चुके हैं. हालात सरकार के काबू से बाहर हो गए हैं. कानून-व्यवस्था गिरती जा रही है, इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.” यह वही भावना है जो इलाके के कई लोग व्यक्त कर रहे हैं.

गैंगस्टर अक्सर पैसे मांगते हैं और पैसे न देने पर हत्या की धमकी देते हैं, लेकिन हरबिंदर के मामले में, हरप्रीत ने कहा, कोई चेतावनी नहीं थी.

उन्होंने कहा, “कोई फोन नहीं आया, कोई धमकी नहीं मिली, कोई मौका नहीं दिया गया. उन्होंने बस उसे मार दिया.”

अपने हाथ जोड़कर और हल्की सी मुस्कान के साथ वह वापस अंदर चले गए और गेट बंद कर दिया. उन्होंने कहा, “मुझे बस इतना ही पता है. मुझमें और कुछ कहने की ताकत नहीं है.”

ऑपरेशन प्रहार

पंजाब सरकार ने जनवरी 2026 में “गैंगस्टरां ते वार” (गैंगस्टरों के खिलाफ युद्ध) अभियान शुरू किया. इसके तहत 19 से 22 जनवरी के बीच ऑपरेशन प्रहार चलाया गया, जिसमें लगभग 12,000 पुलिस कर्मियों ने पूरे राज्य में 2,000 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे.

इस ऑपरेशन का निशाना विदेशों में बैठे 60 गैंगस्टर थे. पूरे राज्य में संगठित अपराध के नेटवर्क को खत्म करने के लिए करीब 2,000 पुलिस टीमें और लगभग 12,000 पुलिसकर्मी लगाए गए. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस ऑपरेशन में 3,126 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें 49 सक्रिय गैंगस्टर और 3,077 अन्य वांछित अपराधी शामिल थे.

इन कोशिशों के बावजूद, गैंगस्टर और ड्रग्स के नेटवर्क अभी भी यहां के लोगों के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं.

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को और ज्यादा सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए. एक निवासी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने जेसीबी से जो किया, वैसी ही तेजी और सख्ती पंजाब में भी चाहिए.”

डीआईजी बॉर्डर रेंज कार्यालय द्वारा दिप्रिंट को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 9 मार्च 2026 के बीच सबसे ज्यादा वसूली के मामले तरनतारन में दर्ज किए गए (11.21 प्रतिशत). इसके बाद बटाला (10.94 प्रतिशत), अमृतसर ग्रामीण (8.05 प्रतिशत), कमिश्नरेट अमृतसर (6.6 प्रतिशत), एसएएस नगर (6.42 प्रतिशत) और कमिश्नरेट लुधियाना (6.42 प्रतिशत) का स्थान रहा.

ग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
ग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि समस्या का दायरा कुछ अलग-अलग घटनाओं से कहीं ज्यादा बड़ा है.

जुपिंदरजीत ने कहा, “पंजाब में 500 से ज्यादा गैंग और उनके मॉड्यूल हैं, जिन्हें 10 ‘मदर गैंग’ नियंत्रित करते हैं. इनके नेता जेलों में, कनाडा में, अमेरिका में और यहां तक कि पाकिस्तान में भी फैले हुए हैं.”

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल तस्करी की घटनाएं बढ़ी है. 350 छोटे हथियार, ज्यादातर गैंगस्टरों के लिए—बरामद किए गए, जबकि पिछले साल 35 से भी कम हथियार मिले थे. इसके साथ ही ऑपरेशन प्रहार के बाद पहली बार पाकिस्तान से तस्करी करके लाई गई एके-47 राइफलें भी बरामद हुईं.

इन नेटवर्क से निपटने के लिए पुलिस ने अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय बड़े गैंगस्टर समूहों की पहचान की है.

तरनतारन, अमृतसर ग्रामीण और बटाला में पुलिस मुख्य रूप से गोपी घनशामपुरिया, जग्गू भगवानपुरिया, हैरी चाठा और रिंदा-लांडा नेटवर्क पर नजर रख रही है. अमृतसर शहर में जग्गू भगवानपुरिया, बंबीहा और रिंदा-लांडा गैंग पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. एसएएस नगर (मोहाली) में जांचकर्ता रिंदा और लांडा से जुड़े मॉड्यूल पर ध्यान दे रहे हैं, जिनमें से कई को विदेश में बैठे हैंडलर संचालित करते हैं. वहीं लुधियाना में बंबीहा और जग्गू भगवानपुरिया गैंग और उनके विदेश में बैठे सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.

डीआईजी बॉर्डर रेंज कार्यालय ने दिप्रिंट को बताया, “इन गैंगों के खिलाफ कार्रवाई में छापे, गिरफ्तारियां, अवैध निर्माण गिराना, संपत्तियां फ्रीज करना, हथियारों के लाइसेंस रद्द करना और वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना शामिल है.”

डीआईजी बॉर्डर रेंज कार्यालय के अनुसार, इन प्रयासों का असर अब दिखने लगा है. फरवरी 2026 तक पंजाब में वसूली के मामलों में जनवरी की तुलना में 15.14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

छिपकर रहना

सड़क किनारे एक छोटे से रेस्टोरेंट में बैठे वल्टोहा के पास के एक गांव के सरपंच ने बताया कि उन्हें भी लगभग 10 दिन पहले ऐसा ही एक फोन आया था. कई लोगों की तरह वह भी खुलकर बोलने से बहुत डर रहे थे. वास्तव में ज्यादातर सरपंच रिकॉर्ड पर बोलने से मना कर देते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि कहीं गैंग का ध्यान उनकी ओर न चला जाए.

फोन करने वाले ने खुद को प्रभदीप सिंह गैंग से बताया और 10 लाख रुपये की मांग की.

उन्होंने कहा, “मेरे पास देने के लिए इतने पैसे नहीं थे. चार दिन तक मैं लगातार अपने घर के अंदर बंद रहा. मैं इतना डर गया था कि अपने परिवार को भी बाहर जाने नहीं देता था.”

आखिर में उन्होंने बताया कि उन्होंने एक जान-पहचान वाले व्यक्ति की मदद से, जो गैंग के कुछ लोगों को जानता था, इस मामले को किसी तरह शांत कराया.

उन्होंने कहा, “अब मैं अपनी बंदूक हर जगह साथ रखता हूं. हम सब रखते हैं.” उन्होंने अपनी पैंट की जेब की ओर इशारा करते हुए कहा, जहां वह पिस्तौल रखते थे. “कभी भी गोलीबारी हो सकती है.”

रेस्टोरेंट के मालिक ने भी सहमति में सिर हिलाया और अपनी जेब को छूकर देखा. दोनों लोगों ने बताया कि उनके गांव में और लोगों को भी ऐसे ही फोन आए थे, जिनमें से कुछ ने आखिरकार पैसे दे दिए.

सरपंच ने कहा, “सिर्फ हमारे गांव में ही कम से कम 80 से 90 लोगों को ऐसे फोन आए होंगे. किसानों को आते हैं. दुकानदारों को आते हैं, जिसके पास थोड़ा भी पैसा है, उसे निशाना बनाया जाता है.”

अब डर की वजह से लोग अपनी बुनियादी इच्छाओं पर भी समझौता कर रहे हैं.

सरपंच ने कहा कि वह लंबे समय से नई कार खरीदना चाहते थे, लेकिन ऐसा करने से बचते रहे, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्होंने अपनी संपत्ति दिखाई तो गैंगस्टरों का ध्यान फिर से उनकी ओर जा सकता है. उन्होंने बताया कि गांव के कई लोगों ने इसी डर से छोटे-छोटे कारोबार शुरू करने की योजना भी टाल दी है.

गांवों में लोग धीरे-धीरे, दबे स्वर में उन वसूली वाले फोन कॉल्स के बारे में बात करते हैं जो उन्हें भी आए हैं. कभी-कभी वे अपनी दीवारों पर लगे गोलियों के निशान दिखाते हैं—एक ऐसा सबक जिसे वे भूल नहीं सकते.

तरनतारन के एक रेस्टोरेंट में गोली का निशान | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट
तरनतारन के एक रेस्टोरेंट में गोली का निशान | फोटो: साक्षी मेहरा/दिप्रिंट

एक रेस्टोरेंट मालिक ने कहा, “हम कुछ नहीं कर सकते. अगर वे पैसे मांगते हैं तो हमें देना ही पड़ता है—किसी भी तरह, चाहे इसके लिए कर्ज लेना पड़े या जो भी हमारे पास है उसे इकट्ठा करना पड़े. और इतना पैसा देने के बाद मानसिक दबाव से निपटना और भी मुश्किल हो जाता है.”

उधर जरमल सिंह के घर में परिवार अभी भी उनकी मौत को समझने की कोशिश कर रहा है.

उनका एक बेटा कनाडा में रहता है. दूसरा बेटा, जो सिर्फ 21 साल का है, अचानक घर की जिम्मेदारियां संभालने लगा है.

जरमल की बेटी ने कहा, “मेरे पिता हमारे लिए सब कुछ करते थे. उन्होंने हमें पढ़ाया, बहुत मेहनत की, और हमें विदेश भी भेजा ताकि हमारी जिंदगी बेहतर हो सके. हम अब बड़े हो गए थे—अब हमारी बारी थी उनकी देखभाल करने की.”

वह थोड़ी देर रुकीं, अपने चेहरे से आंसू पोंछे और खाली चाय का कप मेज पर रख दिया, लेकिन वह मौका हमसे छीन लिया गया.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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