Friday, 24 June, 2022
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स्कूलों को छोड़, छात्रों के बीच महंगे क्रैश कोर्स की होड़- कैसे CUET उच्च शिक्षा में बदलाव का कारण बन रहा

एक तरफ निजी स्कूल के छात्र सीयूईटी के क्रैश कोर्स में दाखिला लेने के लिए स्कूल छोड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जो छात्र इन कोचिंग सेंटरों का खर्चा नहीं उठा सकते, नुकसान में रहने की बात कह रहे हैं.

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नई दिल्ली: पहले 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का एक डर छात्रों के मन में हमेशा बना रहता था लेकिन अब ये परीक्षाएं उनके लिए खास मायने नहीं रखतीं. फिलहाल उनका सारा ध्यान कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम (CUET) की तैयारियों की तरफ है, जिसके लिए महंगे क्रैश कोर्स में दाखिला लेने की होड़ लगी हुई है.

2021 में शुरू की गई CUET, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा फंडेड देशभर के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातक कोर्स में दाखिला पाने के लिए एक कॉमन प्रवेश परीक्षा है.

करिअर लॉन्चर में सीयूईटी के प्रोडक्ट हेड अमितेंद्र कुमार ने बताया कि सीयूईटी पाठ्यक्रमों के बारे में पूछताछ के लिए देशभर के कोचिंग संस्थानों में हर दिन कम से कम 200 कॉल आते हैं. ‘कुछ हज़ार’ छात्रों तो पहले ही क्रैश कोर्स में दाखिला ले चुके हैं. इन क्रैश कोर्स की फीस 35,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये के बीच है.

दिल्ली के 122 स्कूलों का संघ, नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस (एनपीएससी) की चेयरपर्सन सुधा आचार्य ने कहा, ‘मुझे पैरेंट्स की तरफ से अपने बच्चों को स्कूल से निकालने की अर्जी मिल रही हैं. उनके अनुसार, चूंकि 12वीं के अंक अब केवल 40 प्रतिशत वेटेज रखेंगे, इसलिए वे अपने छात्रों को ओपन स्कूलों में दाखिला दिलाना चाहते हैं. अब उनका सारा ध्यान सीयूईटी कोचिंग पर है.’

दूसरी ओर, सरकारी स्कूल के छात्र इसलिए परेशान हैं क्योंकि वे CUET के महंगे क्रैश कोर्स का खर्च उठाने में असमर्थ हैं. ऐसे में किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन पाना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा.

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‘कस्टमाइज्ड पैकेज’

यूजीसी ने मार्च में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए एक कॉमन प्रवेश परीक्षा की घोषणा की थी. इसके कुछ दिनों के बाद ही कोचिंग सेंटरों ने इस साल सीयूईटी के लिए क्रैश कोर्स की शुरुआत भी कर दी.

करिअर लॉन्चर में तीन प्रकार के CUET क्रैश कोर्स हैं: ऑनलाइन, ऑफलाइन और प्री-रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर. ये कोर्स साइंस, ह्यूमिनिटी और कॉमर्स से लेकर 14 डोमेन विषयों को कवर करते हैं. छात्र अपनी पसंद के विषयों के साथ ‘कस्टमाइज्ड पैकेज’ का विकल्प चुन सकते हैं.

अमितेंद्र कुमार ने दिप्रिंट को बताया, ‘हमने इस साल आने वाले छात्रों के लिए क्रैश कोर्स शुरू कर दिया है. 2023 में आने वाले छात्रों के लिए एक साल का कोर्स और 2024 में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए दूसरा बैच है.’

एनईईटी/जेईई उम्मीदवारों के लिए कोचिंग देने वाला आकाश इंस्टीट्यूट फिलहाल साइंस के स्टूडेंट को ध्यान में रखकर सीयूईटी के लिए 24-दिन का एक क्रैश कोर्स लेकर आया है. आकाश + बायजूस के नेशनल एकेडमिक डायरेक्टर (मेडिकल) अनुराग तिवारी ने कहा, ‘हमारी टेस्ट सीरीज़ के कोर्स 6 जून से शुरू होंगे. इसमें छात्रों के 14 टेस्ट लिए जाएंगे. इन कोर्सेस को आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से कर सकते हैं.’

आकाश में अब तक 100 छात्र सीयूईटी पाठ्यक्रम में दाखिला ले चुके हैं. इसकी फीस 20,000 रुपये से 30,000 रुपये के बीच है. 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद छात्रों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध रामानुजन कॉलेज ने भी एक CUET क्रैश कोर्स शुरू किया था. जहां प्रति छात्र 12,000 रुपये का शुल्क लिया गया, लेकिन एक फैसले के बाद इसे वापस ले लिया गया.

रामानुजन कॉलेज के प्रिंसिपल एस.पी. अग्रवाल ने कहा, ‘हमें अपने कोचिंग सेशन को वापस लेना पड़ा क्योंकि अन्य कॉलेजों के कई प्रोफेसरों ने इस पर आपत्ति जताई थी. हालांकि हमारा इरादा नेक था. हम निजी कोचिंग सेंटरों की तुलना में छात्रों को कम फीस में प्रशिक्षण देना चाहते थे.’


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‘वैचारिक शिक्षा पर अब ध्यान नहीं’

सुधा आचार्य कहती हैं, CUET क्रैश कोर्स कराने वाले सेंटर जिस तेजी से बढ़ रहे हैं यह चिंताजनक है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘छात्र अपनी टर्म -1 की परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं. लेकिन अब अपने टर्म -2 परीक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर रहे हैं. उनकी ओवरऑल प्रसंटेज वैसे ही बेहतर हो जाएगी. चूंकि सीयूईटी एमसीक्यू पर आधारित है इसलिए कॉन्सेप्चुअल लर्निंग, प्रेजेंटेशन स्किल और छात्रों की रचनात्मक अभिव्यक्ति पर अब ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाएगा.’

सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए CUET की शुरुआत के बाद कॉलेज सीटों के लिए मुकाबला और कड़ा हो गया है.

एक सरकारी स्कूल के छात्र ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि उसे अब चिंता होने लगी है. अगर वह सिर्फ अपनी स्कूल की किताबों से तैयारी करेगा तो शायद ही दूसरे छात्रों के साथ मुकाबला कर पाए.

उसने कहा, ‘मैं पढ़ने और अभ्यास करने के लिए फ्री में किताबें या अन्य सामग्री खोज भी लूं तो भी उनके साथ कैसे प्रतिस्पर्धा करू पाऊंगा? वे निश्चित घंटों में पेपर हल करने की प्रैक्टिस करते रहते हैं. उनका मुकाबला करना मेरे लिए मुश्किल है. जाहिर है वे मुझसे बेहतर स्कोर करेंगे? यह नई प्रणाली कैसे एक समान अवसर प्रदान करती है.’

कक्षा 11 में पढ़ने वाली एक छात्रा की मां नीतू देवी (40) ने कहा, ‘पिछले साल तक मेरी बेटी को लगता था कि डीयू की हाई कट-ऑफ की वजह से उसे वहां एडमिशन नहीं मिल पाएगा. आज भी कुछ नहीं बदला है. क्योंकि मेरे पास उसे कोचिंग क्लास में पढ़ाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं.’

CUET पैटर्न

CUET आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कहा है कि प्रवेश परीक्षा के लिए प्रश्न कक्षा 12 NCERT की पाठ्य पुस्तकों से ही लिए जाएंगे.

CUET पेपर को तीन भागों में बांटा जाएगा.

पहला खंड लैंग्वेज टेस्ट है, जिसमें छात्रों को 13 भाषाओं में से एक को चुनने का विकल्प होगा – असमिया, बंगाली, अंग्रेजी आदि. ज्यादातर सवाल रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, वर्बल एबिलिटी और व्याकरण पर आधारित होंगे.

दूसरे खंड में, छात्रों को एक से चार डोमेन- अलग-अलग विषयों जैसे अकाउंटिंग, बुक कीपिंग, इतिहास, अर्थशास्त्र या भूगोल पर प्रश्नों के उत्तर देने होंगे.

तीसरे भाग में दो उपखंड होंगे. पहले में वोकेशनल और ओपन एलिजिबिलिटी प्रोग्राम के लिए एक सामान्य परीक्षा शामिल है. यहां छात्रों को उनके सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, सामान्य मानसिक क्षमता, लॉजिकल और एनालिटिकल रीजनिंग का टेस्ट लिया जाएगा. दूसरे उप-भाग में एक एडिशनल लैंग्वेज का टेस्ट लिया जाएगा, जिसमें छात्रों का परीक्षण 13 भाषाओं में से एक के उनके ज्ञान पर किया जाएगा.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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