Monday, 24 January, 2022
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सरकार ने राज्यसभा को बताया-CBSE स्कूलों के 327 टीचर और स्टाफ ने कोरोना से गंवाई जान

इस साल के शुरू में महामारी की घातक दूसरी लहर के दौरान कोविड ड्यूटी और चुनाव ड्यूटी दोनों में ही अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के मरने की खबरें आई थीं.

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नई दिल्ली: शिक्षा राज्य मंत्री (एमओएस) सुभाष सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के 300 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की मौत कोविड-19 के कारण हुई है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी शिक्षक की मौत ‘कोविड ड्यूटी’ के दौरान नहीं हुई. उन्होंने इस संबंध में राज्य से संबंधित डेटा साझा नहीं किया.

सुभाष सरकार संसद में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा और निर्दलीय सांसद अजीत कुमार भुइयां की तरफ से पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे.

इस साल के शुरू में महामारी की घातक दूसरी लहर के दौरान कोविड ड्यूटी और चुनाव ड्यूटी दोनों में ही सेवाएं देने वाले शिक्षकों के मरने की खबरें आई थीं. हालांकि, सदन में पूछे गए सवालों में ‘चुनाव’ या ‘मतदान’ शब्द का कोई जिक्र नहीं किया गया था.

सवाल पूछा गया था कि ‘क्या शिक्षा मंत्री यह बताने का कष्ट करेंगे कि कोविड ड्यूटी के दौरान मरने वाले सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल शिक्षकों की संख्या कितनी थी, इनका राज्यवार ब्यौरा क्या है, कितने शिक्षक परिवारों को मुआवजा दिया गया और मुआवजे के पात्र शिक्षकों की संख्या कितनी है.’

सवालों पर अपने लिखित जवाब में सरकार ने केवल सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि केंद्रीय विद्यालय (केवी), जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों के 327 टीचिंग/नॉन-टीचिंग स्टाफ की कोविड-19 के कारण मौत हुई. केवी और जेएनवी सीबीएसई से संबद्ध स्कूल हैं.

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राज्य मंत्री ने अपने जवाब में यह भी साफ किया कि ‘इनमें से किसी भी शिक्षक की मौत कोविड ड्यूटी के दौरान नहीं हुई.’

मुआवजे के सवाल पर मंत्री का कहना था, ‘शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले/वित्त पोषित स्कूलों के अलावा अन्य स्कूल राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.’


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‘सैकड़ों मौतों की सूचना’

शिक्षा मंत्रालय की तरफ से राज्यवार कोई डाटा नहीं दिया गया है लेकिन कुछ अनुमानों में कहा गया है कि अकेले उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के कारण दर्जनों शिक्षकों की मौत हुई है.

इस साल के शुरू में आरएसएस से जुड़े राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ ने भी दावा किया था कि राज्य में पंचायत चुनाव ड्यूटी पर तैनात 135 शिक्षकों की मौत कोविड-19 के कारण हुई है.

जुलाई में एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव सम्पन्न होने के बाद शिक्षक संघों में मरने वालों की संख्या 1,621 बताई थी और उत्तर प्रदेश सरकार ने 1,071 शिक्षकों और शिक्षण कर्मचारियों के परिवारों को मुआवजे का वादा किया था.

मई की एक रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में दूसरी लहर के दौरान सरकारी स्कूल के 120 शिक्षकों की कोविड-19 से मृत्यु हुई थी.

(यह ख़बर अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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