नई दिल्ली: ईरान ने 28 फरवरी के बाद जवाबी कार्रवाई में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के छह सदस्य देशों पर 4,300 से ज्यादा मिसाइल और बिना पायलट वाले ड्रोन दागे. तुलना में, इसी समय के दौरान उसने इजरायल पर लगभग 930 मिसाइल और ड्रोन दागे.
इसका मतलब है कि ईरान के कुल हमलों में से करीब 83 प्रतिशत मिसाइल और ड्रोन GCC देशों पर निशाना बनाए गए, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत शामिल हैं.
संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी से अब तक तेहरान ने यूएई पर कम से कम 1,815 ड्रोन और 372 मिसाइल दागी हैं, जिनमें 357 बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं. यह जानकारी यूएई के रक्षा मंत्रालय के डेटा में दी गई है.
पिछले एक महीने में यूएई के खिलाफ हुए हमलों के आंकड़ों को अगर आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) के अनुसार देखें, तो यूएई को 112 ऐसे हमलों का सामना करना पड़ा, जिससे कम से कम 20 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं.
ACLED अपने डेटा में सफल और रोके गए दोनों तरह के ड्रोन और मिसाइल हमलों को शामिल करता है. अगर एक ही दिन में एक ही जगह पर कई हमले होते हैं, तो उसे एक ही घटना माना जाता है.
ACLED के डेटा के अनुसार, पिछले एक महीने में GCC के छह देशों को लगभग 416 हमलों का सामना करना पड़ा, जबकि इजरायल को करीब 317 हमलों का सामना करना पड़ा.
इजरायल पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों का डेटा अरब न्यूज द्वारा इकट्ठा किया गया है.
ईरान की जवाबी कार्रवाई में पूरे क्षेत्र के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें ऊर्जा से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिकी सैन्य ठिकाने शामिल हैं. पिछले हफ्ते ईरान ने 18 और 19 मार्च को कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया. इस हमले से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) बनाने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान हुआ, जिससे हर साल होने वाले लगभग 20 अरब डॉलर के गैस निर्यात पर असर पड़ा. रास लफ्फान में उत्पादन रुकने से दोहा के सालाना LNG निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत प्रभावित होगा.
इसी तरह, ईरान ने यूएई के हबशन गैस फील्ड पर भी हमला किया, जो पश्चिम एशिया में सबसे बड़ा तेल और गैस का केंद्र है. यूएई ने इस फील्ड पर लगभग एक हफ्ते के लिए काम रोक दिया था और इस हफ्ते की शुरुआत में फिर से काम शुरू किया.
ईरान ने सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको द्वारा संचालित रास तनुरा और यानबू पर भी पिछले कुछ हफ्तों में हमले किए, जिससे वहां काम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा.
ईरान के ये हमले उसकी घोषित नीति का हिस्सा हैं, जिसमें कहा गया है कि जो देश इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जगह देते हैं, वे निशाना बन सकते हैं, क्योंकि अमेरिका और इजरायल तेहरान के मुख्य विरोधी हैं. इसके अलावा, भौगोलिक स्थिति भी ईरान को GCC देशों पर हमला करने में मदद करती है. ईरान और इजरायल के बीच दूरी 1,300 किलोमीटर से ज्यादा है, और मिसाइलों को इराक, सीरिया और जॉर्डन जैसे देशों के ऊपर से गुजरना पड़ता है.
ध्यान देने वाली बात है कि यह डेटा 25 मार्च तक का है और पूरी तस्वीर नहीं दिखाता, क्योंकि सभी पक्षों के बीच युद्ध अभी भी जारी है.
इन आंकड़ों में सफल और रोके गए दोनों तरह के हमले शामिल हैं.
GCC सदस्य देशों पर हमले
यूएई के बाद जिस देश को ईरान के सबसे ज्यादा हमलों का सामना करना पड़ा, वह सऊदी अरब है.
रियाद के रक्षा मंत्रालय के डेटा और इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) के क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट (CTP) द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में ईरान ने सऊदी अरब पर कम से कम 733 ड्रोन और 49 मिसाइल दागी हैं. डेटा के अनुसार 16 और 20 मार्च को ईरान ने क्रमशः 75 और 76 ड्रोन सऊदी अरब के अलग-अलग ठिकानों पर दागे, जो सबसे ज्यादा तीव्र हमलों वाले दिन थे.
CTP और ISW द्वारा इकट्ठा किया गया डेटा 28 फरवरी से 25 मार्च के बीच का है.
18 मार्च को ईरान ने सऊदी अरब पर 12 बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो रियाद के लिए सबसे बड़ा हमला था. सऊदी के बाद जिस देश पर सबसे ज्यादा हमले हुए, वह कुवैत है.
पिछले चार हफ्तों में कुवैत पर कम से कम 365 मिसाइल और 268 ड्रोन दागे गए. हालांकि कुवैत ने 28 फरवरी, 2 से 5 मार्च और 11 मार्च के हमलों का डेटा साझा नहीं किया है.
1 मार्च को कुवैती सेना ने बताया कि उसे 283 मिसाइल और 93 ड्रोन का सामना करना पड़ा. यह साफ नहीं है कि इनमें से कितने हमले 28 फरवरी को हुए और कितने 1 मार्च को हुए.
बहरीन, जो इस क्षेत्र का एक और GCC सदस्य है, उसे 28 फरवरी से 25 मार्च के बीच 331 ड्रोन और 153 मिसाइल का सामना करना पड़ा, यह जानकारी मनामा के रक्षा मंत्रालय ने दी है.
ओमान और कतर को तुलना में ईरान के कम हमलों का सामना करना पड़ा है. कतर पर अब तक कम से कम 270 मिसाइल और ड्रोन मिलाकर दागे गए, जबकि ओमान पर अब तक कम से कम 22 ड्रोन हमले हुए हैं.

हालांकि, पिछले हफ्ते ईरान के हमले में कतर के ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान हुआ. रास लफ्फान के LNG प्लांट पर हमला ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमलों के जवाब में किया गया था, जिसे ईरान कतर के साथ साझा करता है. यहां तेहरान की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस सुविधा है.
अमेरिका ने इस हमले से खुद को जल्दी अलग कर लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड जे. ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि वह जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना रुकावट गुजरने दे. पिछले हफ्ते दिए गए इस अल्टीमेटम में ईरान को 48 घंटे का समय दिया गया था. हालांकि सोमवार को ट्रंप ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर 27 मार्च कर दी और कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे पक्ष के जरिए बातचीत चल रही है.
ईरान ने ट्रंप के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया और अपनी पांच शर्तें रखीं, जिनमें अमेरिका और इजरायल की तरफ से पूरी तरह हमले बंद करना, भविष्य में हमलों को रोकने की सुरक्षा गारंटी, हुए नुकसान का मुआवजा, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की ऊर्जा सप्लाई गुजरती है. इस रास्ते से जहाजों के गुजरने में रुकावट के कारण युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमत लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर गुरुवार को करीब 107 डॉलर प्रति बैरल हो गई, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के अनुसार.
लेबनान का सशस्त्र समूह हिज्बुल्लाह भी ईरान के समर्थन में इस संघर्ष में शामिल हो गया है, जिससे पिछले दो हफ्तों में इस समूह और इजरायल के बीच भारी लड़ाई हुई है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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