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Monday, 13 April, 2026
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दिल्ली: पब्लिक में शराब पीने का विरोध करने पर ब्रिगेडियर और बेटे से मारपीट, अभी तक FIR दर्ज नहीं

शुक्रवार रात की घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सेना ने दिल्ली पुलिस को लिखा.

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नई दिल्ली: भारतीय सेना के एक कार्यरत ब्रिगेडियर और उनके बेटे के साथ कथित तौर पर कुछ लोगों के एक समूह ने मारपीट की, जब उन्होंने दक्षिण दिल्ली के एक सोसाइटी परिसर में खड़ी एक एसयूवी में देर शुक्रवार रात शराब पीने का विरोध किया.

सेना के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि ब्रिगेडियर गुजरात में एक एनसीसी (नेशनल कैडेट कॉर्प्स) यूनिट में तैनात हैं और वसंत एन्क्लेव में अपने परिवार से मिलने दिल्ली आए हुए थे.

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सेना ने एक बयान जारी कर कहा, “भारतीय सेना के अधिकारियों ने इस मामले का गंभीर संज्ञान लिया है. एक मिलिट्री पुलिस टीम को अधिकारी की मदद के लिए निर्देशित किया गया है.”

बयान में कहा गया कि दिल्ली पुलिस से तेज़ जांच और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के लिए संपर्क किया गया है.

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने कहा कि एफआईआर दर्ज की जा रही है. डीसीपी ने दिप्रिंट को बताया, “आरोपियों की तलाश की जा रही है. प्रारंभिक जांच में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर की ओर से लापरवाही पाई गई, और उसे जिला लाइन भेज दिया गया है.”

सेना अधिकारियों को दिए गए बयान और अपनी शिकायत में ब्रिगेडियर ने कहा कि 11 अप्रैल को रात करीब 10:15 बजे वे और उनका बेटा रात के खाने के बाद टहलने निकले थे. तभी उन्होंने देखा कि एक मर्सिडीज एसयूवी में दो लोग बैठे शराब पी रहे थे और शोर कर रहे थे.

ब्रिगेडियर की पत्नी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, एसयूवी में दो लोग शराब पी रहे थे. दिप्रिंट ने शिकायत को देखा है.

शिकायत में लिखा है, “जब हमने उनके गलत व्यवहार पर सवाल किया, तो उन्होंने मेरे साथ बदसलूकी करने की कोशिश की. उनके व्यवहार से परेशान होकर मैंने अपने पति और बेटे को बुलाया. इसी दौरान मैंने पुलिस हेल्पलाइन पर भी कॉल किया.”

शिकायत के अनुसार, मौके पर पीसीआर वाहन पहुंचा, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ, और शिकायतकर्ता को लगातार ‘अश्लील टिप्पणियों’ का सामना करना पड़ा.

इस बीच, सेना के सूत्रों ने बताया कि ब्रिगेडियर वसंत विहार थाने गए और उनकी शिकायत पर जनरल डायरी नंबर दिया गया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई.

सूत्रों ने कहा कि ब्रिगेडियर ने मिलिट्री अस्पताल में इलाज कराया और अगले दिन ही सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच करवा पाए.

सेना मुख्यालय को घटना की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली सब एरिया यूनिट और फिर मिलिट्री पुलिस को ब्रिगेडियर की मदद के निर्देश दिए गए.

ब्रिगेडियर के परिवार के करीबी लोगों ने बताया कि इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. “अधिकारियों ने फुटेज पाने के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क किया है,” उन्होंने कहा.

ब्रिगेडियर की पत्नी ने दिप्रिंट को बताया कि टहलते समय परिवार ने मर्सिडीज कार देखी, जिसमें दो लोग शराब पी रहे थे.

उन्होंने कहा, “जांच करने पर मेरे बेटे ने उन्हें ऐसा न करने को कहा. लेकिन उनका व्यवहार बहुत खराब था; वे हमारी कॉलोनी के नहीं थे. उनका रवैया देखकर हमने पुलिस को बुलाया.”

उन्होंने बताया कि पीसीआर वाहन जल्दी पहुंच गया.

“लेकिन वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी का व्यवहार मददगार नहीं था. कार्रवाई करने के बजाय, मर्सिडीज में बैठे लोगों ने उसे किसी से फोन पर बात करवाई. इसके बाद वह जाकर पीसीआर गाड़ी में बैठ गया.”

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पुलिसकर्मी से शिकायत दर्ज करने को कहा, तो उसने “रुखाई से” बात की. “अचानक दो गाड़ियां आईं, जिनमें 7-8 लोग थे. हम कुछ समझ पाते उससे पहले उन्होंने मेरे बेटे को पीटना शुरू कर दिया और मेरे पति ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें भी मारा गया.”

उन्होंने कहा कि इस दौरान पीसीआर में बैठा पुलिसकर्मी बिना कुछ किए देखता रहा. “मैंने उससे मदद मांगी, लेकिन उसने कहा, ‘मैं अकेले नहीं संभाल सकता, अपनी टीम का इंतज़ार कर रहा हूं.’ लेकिन कोई मदद नहीं आई.”

इसके बाद तीनों गाड़ियां वहां से भाग गईं. परिवार थाने पहुंचा, जहां उन्हें मेडिकल सहायता के लिए वाहन देने में असमर्थता जताई गई. “हमें कहा गया कि हम अपनी गाड़ी से जाएं.”

उन्होंने कहा, “हम रविवार को भी पुलिस के पास जाते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. आखिर में हमने अपने आर्म्ड फोर्स कम्युनिटी से मदद मांगी, जिन्होंने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया, तब जाकर मामला आगे बढ़ा.”

ब्रिगेडियर की पत्नी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया है कि गाड़ी का नंबर और दोनों लोगों की पहचान कर ली गई है. “हमने पुलिस से दो सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांचने का अनुरोध किया है.”

बाद में डीसीपी ने दिप्रिंट को बताया कि मेडिकल सहायता दी गई थी और परिवार ने सरदारजंग अस्पताल के बजाय आर्मी अस्पताल जाना पसंद किया. डीसीपी ने यह भी कहा कि पीसीआर कर्मियों से जुड़ी शिकायतों की जांच की जाएगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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