नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया ने मंगलवार को अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को बड़ा विस्तार दिया. दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त खरीद, अस्त्र Mk-1 बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) में सहयोग और रणनीतिक रूप से अहम सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
ये समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई बातचीत के बाद हुए. सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन से जुड़ा है. इसके तहत भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण में निवेश करेगा. इस क्षेत्र में फिलहाल चीन का दबदबा है.
दिप्रिंट पहले ही अपनी रिपोर्ट में बता चुका था कि इंडोनेशिया भारत से अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की योजना बना रहा है. वहीं, नई दिल्ली इंडोनेशियाई कंपनियों के साथ मिलकर खासकर निकेल जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए संयुक्त परियोजनाएं (जॉइंट वेंचर) शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहा था.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर काफी समय से बातचीत चल रही थी. इंडोनेशिया ने इसी साल एक ब्रह्मोस बैटरी खरीदने का अनुबंध किया था. अब नए समझौते के तहत वह चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त ब्रह्मोस सिस्टम भी खरीदेगा. दोनों देशों ने इंडोनेशिया के 16 Su-30 लड़ाकू विमानों के लिए अस्त्र Mk-1 एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने पर भी सहमति बनाई.
सूत्रों ने बताया कि यह अतिरिक्त ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों के लिए एक व्यापक समझौता है. इस पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी और बाद में औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.
इस व्यवस्था के तहत सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), जो अस्त्र मिसाइल बनाती है, इंडोनेशिया के Su-30 लड़ाकू विमानों में इस मिसाइल को एकीकृत (इंटीग्रेट) करेगी. यह मिसाइल पहले से ही भारतीय वायुसेना में इस्तेमाल हो रही है. सॉलिड रॉकेट मोटर से चलने वाली अस्त्र Mk-1 एक बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता करीब 80 से 110 किलोमीटर है.
भारत इससे भी लंबी दूरी वाली अस्त्र Mk-2 मिसाइल भी विकसित कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 160 किलोमीटर होने की उम्मीद है. पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए अस्त्र Mk-2 खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इससे वायुसेना की हवाई युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
एक और बड़ा रणनीतिक नतीजा सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास का समझौता रहा. यह बंदरगाह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी छोर पर, मलक्का जलडमरूमध्य के सामने स्थित है और भारत के प्रस्तावित ग्रेट निकोबार ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट से लगभग 160 किलोमीटर दूर है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास है, जहां से दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इसी वजह से इस बंदरगाह की रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है.
सूत्रों ने बताया कि सबांग पोर्ट से भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री पहुंच और मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिलेगी. यह गहरे पानी का बंदरगाह है, जहां पनडुब्बियों सहित हर तरह के नौसैनिक जहाज आ सकते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2018 में इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप से बढ़ाकर नई व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था.
उस फैसले के बाद दोनों देशों ने सबांग और उसके आसपास बंदरगाह से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई. साथ ही भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और इंडोनेशिया के आचेह प्रांत तथा सुमात्रा के अन्य हिस्सों के बीच संपर्क (कनेक्टिविटी) बेहतर बनाने पर भी काम शुरू किया गया.
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