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Thursday, 12 February, 2026
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शोहरत, संघर्ष और अब तिहाड़ जेल—बॉलीवुड के कॉमिक स्टार राजपाल यादव

15 साल पुराने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को जेल हुई है. अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए लिए गए लोन का भुगतान न करने पर उन्हें दोषी ठहराया गया है.

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नई दिल्ली: राजपाल यादव ने 2012 में फिल्म ‘अता पता लापता’ से निर्देशक के तौर पर शुरुआत की थी और जैसे यह फिल्म एक गुम हुए घर की कहानी बताती है, वैसे ही इसके बाद के सालों में उनका बॉलीवुड करियर भी पटरी से उतर गया. उनके खाते में यादगार फिल्मों की संख्या कम होती गई. बड़े निर्देशकों की नज़रों से वह दूर होते गए, जो उनके जैसे कलाकार के लिए खास भूमिकाएं नहीं लिख पा रहे थे.

अब अभिनेता 15 साल पुराने चेक बाउंस मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. ‘अता पता लापता’ फिल्म के लिए लिए गए लोन का भुगतान न करने पर राजपाल को दोषी ठहराया गया है.

उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर शाहजहांपुर से आने वाले यादव का नाम बॉलीवुड में हमेशा एक बेहतरीन कॉमिक अभिनेता के रूप में याद किया जाएगा.

फिल्म ‘डरना मना है’ (2003) में उनके साथ काम कर चुकी अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने कहा, “यादव ने 2000 के दशक में कॉमेडी का अंदाज़ बदल दिया. 90 के दशक की तेज़ पंचलाइन वाली कॉमेडी से हटकर उन्होंने किरदार और स्थिति पर आधारित कॉमेडी को आगे बढ़ाया. उन्होंने सपोर्टिंग कॉमिक रोल को फिल्म का अहम हिस्सा बना दिया.”

1990 के दशक की मसाला फिल्मों में जहां जॉनी लीवर का दबदबा था, वहीं 2000 के दशक में हिंदी फिल्मों के लिए राजपाल यादव ज़रूरी हिस्सा बन गए. ‘मुझसे शादी करोगी’ (2004), ‘अपना सपना मनी मनी’ और ‘पार्टनर’ (2007) में उनके किरदारों ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया, लेकिन निर्देशक प्रियदर्शन के साथ ‘गरम मसाला’ (2005), ‘चुप चुप के’ (2006), ‘भागम भाग’ (2006), ‘ढोल’ (2007) और ‘भूल भुलैया’ (2007) जैसी फिल्मों में काम ने उन्हें बेहतरीन कॉमिक अभिनेता के रूप में स्थापित किया.

फिल्म ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ के निर्देशक चंदन अरोड़ा, जो राजपाल के तीन दशक लंबे करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है, उन्होंने कहा, “हम ट्रेंड बनाने के काम में हैं, लेकिन अक्सर हम ट्रेंड को इतना फॉलो करते हैं कि हमें राजपाल जैसे कलाकारों के लिए रोल लिखना नहीं आता. वह छोटे शहर से आए, नीचे से शुरुआत की और अपनी जगह बनाई. इसके बाद वह बेहतर भूमिकाएं चाहते थे, लेकिन उन्हें कॉमेडी से अलग रोल नहीं मिले, जिससे वह अपनी अभिनय की पूरी क्षमता दिखा पाते.”

बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग

54 साल के अभिनेता, जिन्होंने 1994 से 1997 के बीच नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में पढ़ाई की, उन्होंने ‘भूल भुलैया’ में छोटे पंडित का किरदार निभाया. इस रोल ने उन्हें उनके अंदाज़ और हरकतों के लिए जबरदस्त फैन फॉलोइंग दिलाई. उन्होंने 2024 की सीक्वल ‘भूल भुलैया 3’ में भी यह किरदार दोबारा निभाया. इस फिल्म में प्रियदर्शन की फिल्म की मुख्य अभिनेत्री विद्या बालन भी थीं.

विद्या बालन ने कहा, “हमारे साथ में ज्यादा सीन नहीं थे, लेकिन वे शानदार अभिनेता हैं. मुझे याद है, प्रमोशन के दौरान जब हम ‘द ग्रेट कपिल शर्मा शो’ में गए थे, तो दर्शकों ने उनका बहुत प्यार और तालियों से स्वागत किया.”

प्रियदर्शन की फिल्मों में ‘चुप चुप के’ में राजपाल का रोल और उनकी कॉमिक टाइमिंग सबसे ज्यादा पसंद की गई. उनका डायलॉग—“मैं कोई बोतल से निकला हुआ भूत हूं कि एक के बाद एक काम देते जा रहे हो?”—आज भी मीम के रूप में इस्तेमाल होता है, खासकर बड़े होने के बाद जिम्मेदारियों और काम के बोझ पर मजाक या झुंझलाहट दिखाने के लिए.

ईशा कोप्पिकर ने कहा, “वह अजीब, संवेदनशील और थोड़े उलझे हुए किरदार निभाते थे, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रहते थे, जैसे ‘भूल भुलैया’ में उनका रोल. उनमें यह खासियत थी कि वह सीन चुरा लेते थे, लेकिन उसे भारी नहीं बनाते थे.”

शाहिद कपूर और करीना कपूर खान जैसे बड़े सितारों के बावजूद, यह फिल्म अपने तेज़ और मजेदार कॉमिक सीन के लिए ज्यादा याद की जाती है, जिनमें से ज्यादातर में राजपाल नज़र आते हैं.

‘पार्टनर’ में उन्होंने 1978 की फिल्म ‘डॉन’ में अमिताभ बच्चन के किरदार की नकल की थी. लंबे काले ओवरकोट में और हाथ में बंदूक लिए उनका अंदाज़ काफी लोकप्रिय हुआ. उन्होंने मशहूर डायलॉग “ग्यारह मुल्कों की पुलिस मेरे पीछे पड़ी है” भी अपने अंदाज़ में बोला.

राजपाल के किरदारों में अक्सर उनकी छोटी लंबाई का ज़िक्र होता था, जैसे ‘पार्टनर’ में उनका नाम ‘छोटा डॉन’ था, या ‘भूल भुलैया’ और उसकी सीक्वल में ‘छोटे पंडित’.

1999 में डेब्यू

राजपाल यादव ने अभी-अभी एनएसडी से पढ़ाई पूरी की थी और काम की तलाश में थे, तभी अनुराग कश्यप ने उन्हें फिल्म ‘शूल (1999)’ के लिए सुझाया. शुरुआत में फिल्म में उनके सिर्फ तीन डायलॉग थे, लेकिन शूटिंग शुरू होने पर उन्हें बढ़ाकर पंद्रह कर दिया गया. इसी फिल्म से राजपाल ने बॉलीवुड में डेब्यू किया.

वह फिल्म में एक कुली का किरदार निभाते हैं, जो ईमानदार पुलिस अफसर समर (मनोज बाजपेयी) से तय किराए से ज्यादा पैसे मांगता है. इसी टकराव से फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है.

उसी साल उन्होंने टीवी पर भी डेब्यू किया, ‘मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल’ से. यह दूरदर्शन की मशहूर कॉमेडी सीरीज ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ का सीक्वल था, जिसका निर्देशन प्रकाश झा ने किया था. मूल शो में रघुबीर यादव मुख्य किरदार में थे.

इन दोनों शोज़ में ऐसे भाइयों की कहानी थी, जो अपनी मौजूदा हालत से बेहतर ज़िंदगी के सपने देखते रहते थे.

इसके बाद राम गोपाल वर्मा ने उन्हें फिल्म ‘जंगल’ में लिया, जो उनके करियर का बड़ा ब्रेक साबित हुई. इस सर्वाइवल थ्रिलर में उन्होंने खतरनाक गुरिल्ला सैनिक सिप्पा का किरदार निभाया. साल 2000 में इस रोल के लिए उन्हें बेस्ट नेगेटिव रोल का स्क्रीन अवॉर्ड मिला.

वर्मा ने ही उन्हें पहली बार लीड रोल दिया फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं (2003)’ में.

निर्देशक और एडिटर चंदन अरोड़ा ने कहा, “एक नए निर्देशक के तौर पर राजपाल यादव जैसे कलाकार के साथ काम करना सीखने का अनुभव था. वह राजा के किरदार में आसानी से ढल गए. मुझे नहीं लगता ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ राजपाल के बिना संभव होती. भले ही अंतरा माली का किरदार कहानी का केंद्र था, लेकिन पहचान राजपाल को भी खूब मिली.”

अरोड़ा ने उसी साल माराकेश फिल्म फेस्टिवल की एक घटना का ज़िक्र भी किया, जहां वह अपनी फिल्म दिखाने गए थे.

उन्होंने कहा, “स्क्रीनिंग के बाद लोगों ने उनकी फिल्म देखकर उन्हें कंधों पर उठा लिया. मोरक्को एयरपोर्ट पर लोग उन्हें ‘सिप्पा’ कहकर बुला रहे थे—जो जंगल में उनके किरदार का नाम था. नॉन-कॉमिक रोल में उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी.”

‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ में राजपाल ने राजाराम नाम के गांव वाले का किरदार निभाया, जो छुटकी (अंतरा माली) का पक्का समर्थक होता है. छुटकी एक गांव की डांसर है, जो बॉलीवुड में माधुरी दीक्षित जैसी बड़ी स्टार बनना चाहती है. राजाराम उसका साथ देता है और उसका सपना पूरा करने में मदद करता है.

इसके बाद अरोड़ा ने फिर उनके साथ ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ में काम किया, जिसमें बंगाली अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता भी थीं. इस फिल्म में राजपाल ने मिथिलेश का किरदार निभाया—34 साल का पढ़ा-लिखा, लेकिन छोटे कद का आदमी, जो खूबसूरत वीना (सेनगुप्ता) से शादी करता है, लेकिन अपनी हीन भावना के कारण जलन महसूस करने लगता है.

फिल्म की समीक्षा में इंद्राणी रॉय मित्रा ने लिखा, “वह हर फिल्म के साथ बेहतर होते जा रहे हैं और किसी भी किरदार में आसानी से ढल जाते हैं.”

इन दोनों फिल्मों के लिए राजपाल को अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन मिला. ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए उन्हें ज़ी अवॉर्ड्स में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया. ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ के लिए उन्हें कॉमिक रोल कैटेगरी में दो नॉमिनेशन मिले.

निर्देशक ने यह भी कहा कि जैसे नवाजुद्दीन सिद्दीकी, जिन्होंने भी वर्मा की फिल्मों से शुरुआत की, टाइपकास्ट हो गए थे, वैसे ही राजपाल भी हो गए. सिद्दीकी को अक्सर पुलिस मुखबिर या पुलिस वाले का रोल मिलता था और राजपाल को ज्यादातर कॉमिक रोल.

सिद्दीकी और राजपाल की आपस में गहरी दोस्ती है.

द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में सिद्दीकी ने बताया था कि राजपाल बहुत मददगार हैं और हमेशा संघर्ष कर रहे कलाकारों का साथ देते रहे हैं.

सिद्दीकी ने कहा, “जब राजपाल को अच्छा काम मिल रहा था, तो वह कई लोगों को खाना खिलाते थे. इंडस्ट्री में जब हम संघर्ष कर रहे थे, तब उन्होंने हमारा साथ दिया. उन्होंने कभी मदद करने से पीछे कदम नहीं खींचा. उन्होंने कई संघर्ष कर रहे कलाकारों की मदद की. उनका घर लंगर की तरह था—कोई भी आकर खाना खा सकता था. वह बहुत मज़ाक करते हैं, लेकिन असल में वह बहुत संवेदनशील इंसान हैं.”

‘उनका इरादा फिल्म डायरेक्ट करने का नहीं था’

हालांकि, राजपाल यादव फिल्मों में काम करते रहे, लेकिन इस दौरान बनने वाली मसाला फिल्मों का अंदाज़ बदल गया. अक्षय कुमार जैसे बड़े अभिनेता भी कॉमिक और लीड रोल दोनों करने लगे, जबकि प्रियदर्शन की बाद की कुछ फिल्में पहले जैसा जादू नहीं दिखा पाईं.

चंदन अरोड़ा ने बताया कि नीना गुप्ता जैसी अभिनेत्री को भी काम पाने के लिए सोशल मीडिया पर अपील करनी पड़ी थी. उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री अक्सर कैरेक्टर एक्टर्स के लिए मजबूत और अहम रोल नहीं लिखती.

‘अता पता लापता’ की मेकिंग राजपाल की पत्नी ने श्री नौरंग गोदावरी एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया था. और इस फिल्म का म्यूजिक अमिताभ बच्चन ने लॉन्च किया था.

अरोड़ा ने कहा, “उनका इरादा फिल्म डायरेक्ट करने का नहीं था. वह इसे अपने एक दोस्त के लिए प्रोड्यूस कर रहे थे, लेकिन हालात ऐसे बने कि उन्हें खुद ही निर्देशन करना पड़ा.”

12 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने सिर्फ 42 लाख रुपये की कमाई की.

इस बीच, अजय देवगन और सलमान खान समेत कई बड़े बॉलीवुड सितारों ने राजपाल यादव के समर्थन में आवाज़ उठाई है.

राजपाल के मैनेजर गोल्डी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “कई लोग राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए हैं. सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे कलाकारों ने अपना समर्थन दिया है. अभी मेरी डेविड धवन से भी बात हुई—उन्होंने भी संपर्क किया. रतन नैन, वरुण धवन…इस बार कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जिसे राजपाल ने दिल से सराहा है.”

(इस फीचर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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