फेसबुक पोस्ट में उन्होंने भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन 2015 की बंदी, ‘नेपाल की एक पड़ोसी पर निर्भरता कम करने’ के अपने कदम और जेन ज़ी प्रदर्शनों में ‘साजिशकर्ता और झूठी कहानियों’ का ज़िक्र किया.
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने देश के सामने आने वाली चुनौतियों पर कहा, ‘वापस राजशाही पर नहीं जा सकते. नेपाल में ज्ञानेंद्र और राजशाही को 2–3% से भी कम समर्थन है.’
रैशेल निएले, ब्रिओनी दुआर्ते रोमेरो एवं यू त्रान, क्यूआईएमआर बर्गोफर मेडिकल रिसर्च इन्स्टीट्यूटब्रिसबेन, 19 सितम्बर (द कन्वरसेशन) एक हालिया अध्ययन में दावा किया गया...
रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.