दशकों से सैन्य इतिहास का एक बहुत ही उग्रतापूर्ण और राष्ट्रवादी संस्करण तैयार किया गया है – लेकिन राजनेताओं ने तो जनरलों को भी गलत तरीके से उजागर किया है । इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मोदी के भी तथ्य गड़बड़ा गए
वामपंथी उदारवादियों को कार्पोरेट से प्रायोजकों की भीख मांगने को लेकर कोई समस्या नहीं है जो कि उनके साहित्यिक समारोहों से लेकर वाइन और चीज तक की पार्टियों का आयोजन करते हैं।
बैंगलोर क्लब, मुझे जरूर स्वीकार करना चाहिए, मुझे भी अशिष्ठ महसूस हुआ, एक निर्लज्ज, जीवन भर का अनुभवी संवाददाता जिसे बिना आमंत्रण के सम्मलित होने हेतु प्रशिक्षित किया गया था, उसके वहां होने की उम्मीद नहीं थी।