मुंबई, 11 अप्रैल (भाषा) आलोचकों की सराहना बटोरने वाली 'परिंदा', '1942: ए लव स्टोरी', ‘‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’’ और 'चमेली' जैसी शानदार फिल्मों की पटकथाओं...
83 साल के हो चुके इस याचिकाकर्ता के मामले को 20 साल में 147 बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन एक बार भी इसकी सुनवाई नहीं की गई. माननीय उच्चतम न्यायालय ने इसे 'खेदजनक स्थिति' बताया जो मामलों के त्वरित निवारण के लिए बनाए गए कानूनों के 'उद्देश्य को विफल’ करता है'.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.