राहुल तिवारी फंदे से लटके हुए थे जबकि उनकी पत्नी और तीन बेटियों की गला काट कर हत्या की गई थी. पुलिस को शक है कि तिवारी ने पहले उनकी हत्या की और फिर खुद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. लेकिन परिवार के सदस्य इसके लिए तिवारी के साले को दोषी ठहरा रहे हैं.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.