द रेसिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने 26 मार्च को इशफाक और उमर डार की हत्या कर दी थी. उनकी मां आज भी उन्हें याद करके रो पड़ती हैं. पिता अब भी उनके लौटने की राह देखते नजर आते हैं, भाइयों के मन में बार-बार सवाल उठता है कि उन्हें गोली क्यों मारी गई.
भारतीय नौसेना हमेशा से भारत की राजनीतिक सीमाओं से परे, राष्ट्रीय कूटनीतिक और अन्य संपर्क प्रयासों को समर्थन देने में सबसे आगे रही है. अब आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने का समय आ गया है.