इसके अलावा ‘समर्थ 2.0’ की शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसका उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से टेक्सटाइल स्किलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाना है, ताकि भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से कुशल और तकनीक-सक्षम कार्यबल तैयार किया जा सके.
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार एमएसएमई को आर्थिक विकास की अहम ताकत मानती है. उन्होंने बताया कि इन्हें “भविष्य के चैंपियन” बनाने के लिए तीन स्तरों पर मदद की जाएगी, जिसमें इक्विटी सपोर्ट भी शामिल है.
जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?