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Saturday, 31 January, 2026

मेधा देशमुख भास्करन

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मत-विमत

गुज़ारा करने के लिए कर्ज़ा: भारतीय परिवार ज़्यादा बचत करते हैं, फिर भी क्यों हैं कर्ज़ में?

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.

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दिल्ली: जनवरी 2026 में औसत एक्यूआई 307 रहा

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल जनवरी में पिछले वर्ष की तुलना में वायु गुणवत्ता में मामूली गिरावट देखी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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