नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) उच्च आय वाले देश 2048 तक ‘सर्वाइकल’ कैंसर को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में अगली सदी तक इस बीमारी के आंकड़ों में मामूली कमी होने की संभावना है। ‘द लैंसेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई।
इस कैंसर को टीकाकरण और स्क्रीनिंग के जरिए रोका जा सकता है।
कनाडा के ‘सीएचयू डी क्यूबेक-यूनिवर्सिटी लावल रिसर्च सेंटर’ के शोधकर्ताओं के साथ ही अन्य शोधार्थियों ने कहा कि इससे क्षेत्रों के बीच का अंतर तेजी से बढ़ जाएगा तथा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में महिलाओं को इस रोकथाम योग्य बीमारी की उच्च दर का जोखिम झेलना पड़ेगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, ‘सर्वाइकल’ कैंसर के लगभग सभी मामले (99 प्रतिशत) उच्च जोखिम वाले ‘ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (एचपीवी) के संक्रमण से जुड़े होते हैं, जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलने वाला एक अत्यंत सामान्य संक्रमण है।
शोध में कहा गया है कि एचपीवी टीकाकरण और नियमित जांच के माध्यम से ‘सर्वाइकल’ कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने एक लक्ष्य तय किया है कि ‘सर्वाइकल’ कैंसर की दर प्रति एक लाख महिलाओं में चार से भी कम हो सके।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगली सदी के भीतर ‘सर्वाइकल’ कैंसर को खत्म करने के लिए प्रत्येक देश को 2030 तक ‘90-70-90’ लक्ष्यों को पूरा करना चाहिए। इसका मतलब है कि 15 वर्ष की आयु तक की 90 प्रतिशत लड़कियों का एचपीवी टीकाकरण, 35 से 45 वर्ष तक की आयु तक 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग और प्री-कैंसर तथा कैंसर से पीड़ित 90 प्रतिशत महिलाओं का इलाज।
शोधार्थियों ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में ‘सर्वाइकल’ कैंसर को खत्म करने के मकसद से डब्ल्यूएचओ द्वारा तय किए गए टीकाकरण तथा स्क्रीनिंग उन्मूलन लक्ष्यों को पूरा करना आवश्यक है, जिससे इस बीमारी को लेकर वैश्विक असमानताओं में काफी कमी आएगी।
हालांकि, टीम ने कहा कि ‘मॉडल’ से पता चलता है कि उन्मूलन प्रयासों में अधिक निवेश किए बिना कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए इन लक्ष्यों तक पहुंचना मुश्किल है।
भाषा यासिर अविनाश
अविनाश
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