मुंबई, 29 अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बैंक अब उधारकर्ताओं के अनुरोध का इंतजार किए बिना ही उन्हें राहत दे सकेंगे। नए नियम एक जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे।
केंद्रीय बैंक ने अपने निर्देश में कहा है कि कर्जदाताओं को सभी पात्र उधारकर्ताओं को अपने स्तर पर ही राहत देने की अनुमति होगी। हालांकि ग्राहक चाहें तो प्राकृतिक आपदा घोषित होने के 135 दिनों के भीतर इससे बाहर निकल सकते हैं।
नए दिशा-निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों, एनबीएफसी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे।
आरबीआई के मुताबिक, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बैंक अस्थायी परिसरों से शाखाएं चला सकेंगे और सैटेलाइट ऑफिस, एक्सटेंशन काउंटर या मोबाइल बैंकिंग के जरिए सेवाएं बहाल कर सकेंगे। एटीएम सेवाओं को जल्द चालू करने और नकदी जरूरतों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बैंक अपने विवेक से एक वर्ष तक शुल्क और अन्य मदों में छूट या कटौती कर सकते हैं। राहत केवल उन खातों को मिलेगी जो ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में हैं और आपदा के समय 30 दिन से अधिक बकाया में नहीं थे।
आरबीआई ने यह भी कहा, ‘अगर आपदा के बाद कोई खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) हो जाता है, तो समाधान योजना लागू होने पर उसे फिर से ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में अद्यतन किया जा सकेगा।’
साथ ही, बैंकों को ऐसे खातों पर बकाया कर्ज का अतिरिक्त पांच प्रतिशत प्रावधान करना होगा, जो मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त होगा।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह ढांचा आपदा से प्रभावित एवं किसी तरह के वित्तीय तनाव से मुक्त उधारकर्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और यह मौजूदा नियमों की तुलना में अधिक लचीला है।
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