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Wednesday, 29 April, 2026
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मीडिया बिरादरी ने मार्क टली और रघु राय को किया याद

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नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) मार्क टली और रघु राय की पृष्ठभूमि, अंदाज़ और माध्यम अलग थे, लेकिन भारत को समझने और उसकी कहानी दुनिया तक पहुंचाने का जज्बा उन्हें एक साथ जोड़ता था। ब्रिटिश राज में जन्मे टली ‘बीबीसी’ में भारत की आवाज बने, वहीं पंजाब के झांग (अब पाकिस्तान में) के एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए फोटो पत्रकार राय ने कैमरे के जरिए आधुनिक भारत की धड़कनों को कैद किया।

‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में मंगलवार को आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में उनके प्रियजन और सहकर्मी पत्रकारिता के दोनों दिग्गजों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए।

प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और भारत से लगाव रखने वाले टली का 25 जनवरी को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया; भारत के सबसे प्रसिद्ध फोटोग्राफर में से एक राय का 26 अप्रैल को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

उस कमरे में टली की ‘भारतीयता’ और उनके व्यंग्यपूर्ण हास्य की कहानियां गूंज रही थीं, वहीं राय की सहज प्रतिभा और बारीकियों पर पैनी नजर, जगहों के भीतर नयी जगहें तलाशने की उनकी क्षमता और दोनों की अच्छे पेय के प्रति साझा रुचि भी चर्चा का हिस्सा बनी।

उनके सहयोगियों और मित्रों ने दोनों के किस्से सुनाए और उन दिग्गजों के पीछे के इंसानों को समझने की कोशिश की। वर्ष 1966 में राय के मुख्य फोटोग्राफर के रूप में अपना करियर शुरू करने के समय ही ‘द स्टेट्समैन’ में शामिल हुए पत्रकार सईद नकवी ने उन्हें ‘‘प्रतिभाशाली’’ व्यक्ति के रूप में याद किया।

नकवी ने कहा कि उनके साथ काम करना उनके जीवन के सबसे समृद्ध अनुभवों में से एक है। उन्होंने कहा, ‘‘रघु राय अचानक कहीं रुक जाते थे, और उन्होंने कुछ देख लिया होता था, जो मैंने नहीं देखा होता था—और मैं तब तक नहीं देख पाता था, जब तक वह फ्रेम, वह तस्वीर सामने नहीं आ जाती थी। और फिर बार-बार मैंने यह सीखा कि रघु कैसे थे—उनकी नजर कितनी पैनी और हर ओर घूमने वाली थी।’’

छह दशकों के अपने करियर में राय ने भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को अपने कैमरे में कैद किया। उन्होंने इंदिरा गांधी, दलाई लामा, मदर टेरेसा, सत्यजीत रे, हरिप्रसाद चौरसिया और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें लीं, जिनके माध्यम से उनके जीवन के ऐसे पहलू सामने आए जो पहले आम तौर पर देखने को नहीं मिलते थे।

फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता पार्थिव शाह ने ग्रामीण बच्चों के साथ एक कार्यशाला के दौरान की एक घटना को याद किया, जिसे उनके अनुसार रघु राय की विरासत को परिभाषित करने वाला क्षण कहा जा सकता है।

दो दशकों तक बीबीसी में मार्क टली के साथ काम कर चुके और बाद में उनके साथ एक पुस्तक का सह-लेखन करने वाले पत्रकार सतीश जैकब ने उनके बीच के जुड़ाव को 1977 में आंध्र प्रदेश में आए चक्रवात को कवर करने के लिए एक उड़ान के दौरान हुई आकस्मिक मुलाकात से जोड़ा-एक ऐसी मुलाकात जो जीवन भर की दोस्ती में बदल गई।

पत्रकार क़ुर्बान अली ने इस अवसर पर अपने ‘मित्र, दार्शनिक, मार्गदर्शक और गुरु’’ टली को याद किया और सतीश जैकब की तरह उन्हें ‘‘दिल से भारतीय’’ बताया। उन्होंने कहा कि टली ने 1960 के दशक में भारत को कवर करना शुरू किया और 1971 से बीबीसी के लिए देश की घटनाओं पर करीब से रिपोर्टिंग की।

‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि राय और टली दोनों के साथ उनका पेशेवर संबंध काफी हद तक ‘‘औपचारिक’’ था। उन्होंने इस अवसर पर आज पत्रकारिता के सामने मौजूद व्यापक संकट का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि आज जब हम इन दोनों असाधारण व्यक्तित्वों को याद कर रहे हैं, तो हमें मीडिया में एक बार फिर सीमाओं को आगे बढ़ाने के तरीके खोजने होंगे।’’

इस कार्यक्रम में भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज़ हमीदुल्ला, टली की साथी और प्रख्यात लेखिका-अनुवादक गिलियन राइट, तथा इतिहासकार सोहैल हाशमी भी उपस्थित थे।

भाषा आशीष रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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