मुंबई, 29 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने 2013 में तर्कवादी और अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिये गए शरद कलास्कर को बुधवार को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोंसले की पीठ ने उसे 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। इस संबंध में जारी आदेश की विस्तृत प्रति बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत से जमानत देने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन पीठ ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
कलास्कर पर वामपंथी नेता और तर्कवादी गोविंद पानसरे की हत्या का मुकदमा भी चल रहा है। पिछले साल अक्टूबर में उच्च न्यायालय ने उसे इस मामले में जमानत दे दी थी।
दाभोलकर मामले में जमानत मिलने के बाद, कलास्कर जमानत की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल से रिहा हो सकता है।
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक दाभोलकर (67) की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दाभोलकर की संस्था अंधविश्वास के खिलाफ कार्य करती है।
दाभोलकर हत्या मामले की जांच शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद, 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।
सत्र न्यायालय ने 10 मई, 2024 को सचिन अंदुरे और शरद कलास्कर को दाभोलकर की हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सत्र न्यायालय ने हालांकि, उन्हें सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया ।
निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को भी बरी कर दिया था।
कलास्कर ने उच्च न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती दी। उसने अधिवक्ता शुभादा खोट के जरिये दाखिल अर्जी में सुनवाई लंबित रहने के दौरान जमानत देने का अनुरोध किया।
मुक्ता दाभोलकर ने भी अंदुरे और कलास्कर को यूएपीए के आरोपों से बरी करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है।
भाषा धीरज पवनेश
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