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Tuesday, 28 April, 2026
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बेंगलुरु: उमर खालिद से जुड़े कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

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बेंगलुरु, 28 अप्रैल (भाषा) दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपी उमर खालिद से संबंधित कार्यक्रम को रद्द करने की मांग को लेकर बेंगलुरु के पूर्व महापौर एम. गौतम कुमार के नेतृत्व में यहां बीआईसी के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मंगलवार को एहतियातन हिरासत में ले लिया।

सूत्रों के मुताबिक, बैंगलोर अंतरराष्ट्रीय केंद्र (बीआईसी) में मंगलवार को प्रस्तावित कार्यक्रम में ‘उमर खालिद और उसकी दुनिया’ नामक पुस्तक के संपादक पुस्तक के कुछ अंश पढ़ सकते हैं, जिसके बाद एक परिचर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें कुछ “इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों” के हिस्सा लेने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम रद्द करने की मांग करते हुए नारे लगाए और पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड तोड़ते हुए आयोजन स्थल में प्रवेश करने का प्रयास किया।

सूत्रों ने बताया कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया।

सोमवार को भाजपा की कर्नाटक इकाई के नेताओं ने बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर खालिद से जुड़े कार्यक्रम को रद्द करने का अनुरोध किया था।

पार्टी नेताओं ने कहा था कि खालिद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है और ऐसे व्यक्ति का महिमामंडन करना आपराधिक तत्वों को प्रोत्साहित करने के बराबर होगा।

कर्नाटक भाजपा ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि जहां अदालतें अब भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही हैं, वहीं कांग्रेस समर्थित तंत्र उन व्यक्तियों का महिमामंडन करने में व्यस्त है, जिनका मकसद भारत को विभाजित करना है।

पार्टी ने कहा, “बेंगलुरु को ऐसे तत्वों के महिमामंडन का केंद्र क्यों बनाया जा रहा है? क्या सिद्धरमैया सरकार इसी ‘सांस्कृतिक योगदान’ को बढ़ावा देना चाहती है? हमारा शहर नवप्रवर्तकों और देशभक्तों की भूमि है, न कि ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के विमर्श को बढ़ावा देने का अड्डा।”

खालिद 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में फिलहाल जेल में है।

शीर्ष अदालत ने 20 अप्रैल को खालिद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि दंगों की साजिश में उसके खिलाफ लगे आरोपों पर विश्वास करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

फरवरी 2020 में संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे।

भाषा पारुल शफीक

शफीक

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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