नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बांग्लादेश प्रत्यर्पित किये गये कुछ लोगों को वापस लाने संबंधी एक याचिका पर रुख स्पष्ट करने के लिए केंद्र सरकार को शुक्रवार को अंतिम अवसर दिया।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश वकील से इस मुद्दे पर निर्देश लेकर शीर्ष अदालत को अवगत कराने को कहा।
भोदू शेख की गर्भवती बेटी को बांग्लादेश भेज दिया गया था। शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि इस मामले में केंद्र का अदालत को अपने विचारों से अवगत न कराना ‘‘कुछ हद तक अनुचित’’ है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह केंद्र को आखिरी मौका दे रहे हैं और यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो पीठ अंतिम सुनवाई करेगी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि इस याचिका को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष तीन दिसंबर को “मानवीय आधार” पर एक गर्भवती महिला और उसके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। उन्हें कुछ महीने पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती महिला सुनाली खातून को प्रसव सहित सभी आवश्यक चिकित्सा सहायता निःशुल्क उपलब्ध कराने को कहा था।
न्यायालय ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील को भी दर्ज किया कि सक्षम प्राधिकारी ने केवल मानवीय आधार पर महिला और उसके बच्चे को देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमति जताई है और उन्हें निगरानी में रखा जाएगा।
शीर्ष अदालत केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 26 सितंबर 2025 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी।
उस आदेश में सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को “अवैध” करार देते हुए रद्द कर दिया गया था।
भाषा सुरेश अविनाश
अविनाश
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