(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार कम मतदान होने के दावे को लेकर शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह ‘चुनिंदा गणित’ है।
प्रधान ने ‘एक्स’ पर ओ’ब्रायन के बयान का जवाब देते हुए कहा, ‘आपका चुनिंदा गणित गणना केवल उसी बात को पुष्ट करता है जिसे आप नकारने की कोशिश कर रहे हैं।’’
प्रधान ने कहा कि मतदान प्रतिशत में वृद्धि दोहराव एवं संदिग्ध नामों को हटाने के बाद ‘अधिक स्वच्छ और विश्वसनीय’ मतदाता सूची को दर्शाती है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘जब अवैध घुसपैठियों, दोहराव वाली प्रविष्टियों और संदिग्ध नामों को मतदाता सूचियों से हटा दिया जाता है, तो (मतदान) प्रतिशत स्वाभाविक रूप से एक स्वच्छ मतदाता आधार को दर्शाता है।’’
इससे पहले दिन में, ओ’ब्रायन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में उच्च मतदान के बारे में ‘फर्जी विमर्श’ गढ़ने का आरोप लगाया था और कहा था कि 2026 में डाले गए कुल वोट वास्तव में 2021 की तुलना में कम थे।
शाह द्वारा शुक्रवार को कोलकाता में प्रेस वार्ता किये जाने के बाद, ओ’ब्रायन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बृहस्पतिवार को पहले चरण में जिन 152 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, वहां 2021 में मतदाताओं की कुल संख्या 3.67 करोड़ थी, जबकि कुल डाले गए वोट 3.10 करोड़ थे, यानि लगभग 84 प्रतिशत मतदान हुआ।
इस दावे का खंडन करते हुए प्रधान ने कहा कि उच्च भागीदारी इस बात का संकेत है कि लोग ‘‘डर और राजनीतिक धमकियों के बजाय लोकतांत्रिक भागीदारी’’ को चुन रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सुधार के बाद भी तीन करोड़ से अधिक नागरिकों ने मतदान किया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पश्चिम बंगाल के लोग डर और राजनीतिक धमकियों के बजाय लोकतांत्रिक भागीदारी को चुन रहे हैं।’’
प्रधान ने कहा, ‘‘ यह देखना राजनीतिक रूप से शर्मसार करने वाला है कि पश्चिम बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों के बजाय आप हटाये गये नामों का अधिक दृढ़ता से बचाव कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि पारदर्शी मतदाता सूची से तृणमूल कांग्रेस इतनी व्यथित क्यों दिख रही है?’’
ओ’ब्रायन ने इससे पहले कहा था कि 2026 में, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद, इन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदाता घटकर 3.33 करोड़ रह गये और डाले गए कुल वोट 3.09 करोड़ थे, जिसमें मतदान प्रतिशत 92.70 प्रतिशत था।
उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि 2026 में अधिक मतदान होने के बावजूद, डाले गए कुल वोटों की संख्या वास्तव में 2021 की तुलना में 83,674 कम हो गई है। यह अंतर नगण्य है। 2021 में 83.98 प्रतिशत मतदान बनाम 2026 में 92.70 प्रतिशत का उच्च मतदान प्रतिशत पूरी तरह से एसआईआर के बाद मतदाताओं की कुल संख्या में कमी के कारण है।’’
तृणमूल सांसद ने कहा, ‘‘ आपको बेनकाब करना बहुत आसान है। और झूठा विमर्श गढ़ने की आपकी कोशिश को भी ।’’
प्रधान ने कहा, ‘‘मतगणना के दिन, चुनिंदा आंकड़े नहीं बल्कि बंगाल की जनता ही अंतिम फैसला सुनाएगी। तृणमूल के लिए सबसे बड़ा झटका होगा कि कमल चुपचाप खिल गया।’’
भाषा राजकुमार माधव
माधव
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