नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख विजया राहटकर ने बिहार के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव द्वारा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए मंगलवार को इसे आपत्तिजनक, असंवेदनशील और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह बयान अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। यह एक संकीर्ण और भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जो महिलाओं के अधिकारों को सीमित करना चाहती है। बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।”
आयोग की प्रमुख ने कहा, “संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और वे ‘पंचायतों से लेकर संसद तक सशक्त नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। ऐसी टिप्पणियां न केवल उनकी क्षमताओं और उपलब्धियों का अपमान करती हैं बल्कि सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों को भी कमजोर करती हैं।”
राहटकर ने इस बयान को ‘निंदनीय और पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि देश ‘महिलाओं की गरिमा और समान भागीदारी को कमजोर करने वाले किसी भी विचार को बर्दाश्त नहीं करेगा’।
उन्होंने यादव से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पूर्णिया से निर्दलीय सांसद महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर पत्रकारों से कहते हैं कि ‘90 प्रतिशत महिलाएं किसी नेता के कमरे में जाए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं।’
सांसद ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने केवल ‘इस तथ्य को उजागर किया कि कई महिलाएं उन लोगों द्वारा शोषित की जाती हैं जिन्हें वे अपना मार्गदर्शक मानती हैं।’
भाषा जितेंद्र रंजन
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