इंदौर (मध्यप्रदेश), 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को दावा किया कि महिला आरक्षण के बारे में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए राज्य में पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
हालांकि, पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई लेकिन कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे इस मामले को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
दरअसल, महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में गिरने के बाद राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से तेजी से प्रसारित हो रहा है। हालांकि उन्होंने इसका खंडन किया है।
इस पत्र में उन्होंने कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठाए हैं।
पटवारी ने राजे के इस कथित पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पत्र केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक ऐसा दस्तावेज़ है, जो महिला आरक्षण की आड़ में संभावित अवैध परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दे की ओर संकेत करता है।
पटवारी ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर की गई प्राथमिकी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है और एक पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना भाजपा सरकार की असहिष्णुता और डर को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वही पत्र लाखों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया है तो कार्रवाई केवल चुनिंदा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही क्यों की जा रही है?
उन्होंने पूछा कि क्या कानून का उपयोग अब राजनीतिक प्रतिशोध के औज़ार के रूप में किया जा रहा है?
पटवारी ने कहा कि राजे के पत्र में उठाए गए प्रश्न न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता से भी सीधे जुड़े हुए हैं।
उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि 15 तारीख को लिखा गया यह पत्र जब सार्वजनिक हुआ और व्यापक स्तर पर चर्चा में आया, तो मात्र कुछ दिनों के भीतर ही वसुंधरा राजे द्वारा उसका खंडन कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि पत्र में लिखी गई बातें निराधार हैं, तो भाजपा को सामने आकर स्पष्ट तथ्यों के साथ उसका खंडन करना चाहिए लेकिन यदि उसमें सच्चाई का अंश भी है, तो उसे दबाने या उससे ध्यान भटकाने के बजाय उस पर गंभीरता से विचार और कार्रवाई की जानी चाहिए।
इससे पहले कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य तन्खा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले 27 घंटों से मध्यप्रदेश की साइबर पुलिस ने भोपाल में कांग्रेस के आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को बिना किसी वाजिब कारण के हिरासत में रखा है और यह उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस की इस हरकत से आश्चर्य और निराशा है कि वसुंधरा राजे के जिस पोस्ट को लाखों लोगों ने देखा और साझा किया उसे लेकर कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें रिहा नहीं किया गया तो वे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस ‘गैर कानूनी गिरफ्तारी और प्रक्रिया’ को चुनौती देगें।
उन्होंने कहा, ‘राजस्थान पुलिस के नाम से मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को इस तरह से हिरासत में लिया जाना आपत्तिजनक है।’
भाषा सं ब्रजेन्द्र रंजन
रंजन
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