बेंगलुरु, 18 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में एसएसएलसी (10वीं) परीक्षा के मूल्यांकन को मौजूदा नियमों के अनुसार करने के एकल न्यायाधीश के निर्देश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि एसएसएलसी परीक्षा में तृतीय भाषा के प्रश्न पत्रों में ग्रेड के बजाय अंक दिए जाएं, जिसके खिलाफ सरकार ने अपील की थी।
न्यायमूर्ति ई.एस. इंदिरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि नई मूल्यांकन प्रणाली एसएसएलसी परीक्षा के बाद लागू की गई थी और तो और राज्य सरकार ने परीक्षा में इन परिवर्तनों की अधिसूचना तक जारी नहीं की थी।
अदालत ने कहा कि सरकार ने न तो नियम बनाए और न ही नियमित अधिसूचना जारी की।
नई मूल्यांकन प्रणाली में तृतीय भाषा विषयों को अलग-अलग ग्रेड देने का प्रस्ताव है और उन्हें छात्र के अंतिम एसएसएलसी अंकों की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
अधिवक्ता जनरल शशि किरण शेट्टी ने दलील दी कि लाखों छात्र हिंदी में अनुत्तीर्ण हो गए थे, जो परीक्षा में उनका तृतीय भाषा विषय था इसलिए, छात्रों पर दबाव कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि राज्य सरकार मसौदा नियम में उचित संशोधन ला रही है, जिसके तहत विद्यार्थियों को अंकों के बजाय ग्रेड दिए जाएंगे।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को अधिसूचना जारी करने से पहले इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए था।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि 83 प्रतिशत छात्र परीक्षा में उत्तीर्ण हुए।
अदालत ने कहा कि अगर उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करना था, तो परीक्षा ही क्यों की गई?
अदालत ने इस सप्ताह की शुरुआत में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे हाल ही में हुई एसएसएलसी परीक्षा का मूल्यांकन मौजूदा नियमों के अनुसार करें।
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश
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