वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर आरोप लगाया कि उसने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे दो हफ्ते के सीजफायर समझौते का “कई बार” उल्लंघन किया है. यह सीजफायर पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए लागू किया गया था. वहीं, इस नाजुक समझौते की समय सीमा करीब आने के साथ ही पूरी समस्या के समाधान को लेकर बातचीत अधर में लटकी हुई है.
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “ईरान ने सीजफायर का कई बार उल्लंघन किया है.”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. दो हफ्ते का यह सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है, जिससे क्षेत्र में फिर से संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
इस महीने की शुरुआत में यह सीजफायर बातचीत के लिए समय देने के मकसद से कराया गया था, लेकिन यह लगातार कमजोर बना हुआ है और दोनों पक्ष इसके पालन को लेकर संदेह जता रहे हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक और दौर की बातचीत कराने की कोशिशें जारी हैं, हालांकि इसमें ईरान की भागीदारी को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है.
ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार अब तक कोई भी ईरानी राजनयिक दल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है.
प्रसारक ने अपने बयान में साफ तौर पर पाकिस्तान में किसी भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से इनकार किया.
बयान में कहा गया, “अब तक कोई भी ईरानी राजनयिक दल, चाहे वह मुख्य हो या सहायक टीम, या प्रारंभिक या फॉलो-अप मिशन, इस्लामाबाद, पाकिस्तान नहीं गया है.”
हालांकि, अल अरबीया की रिपोर्ट, जिसमें एक वरिष्ठ पाकिस्तानी स्रोत का हवाला दिया गया है, के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को एक साथ पाकिस्तान की राजधानी पहुंच सकते हैं, जो क्षेत्रीय कूटनीति में एक संभावित प्रगति का संकेत है.
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पक्ष इस्लामाबाद में उच्च स्तर की बातचीत में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं, जिसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना है.
दोनों के एक साथ पहुंचने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान खींचा है, हालांकि तेहरान की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल, ईरान ने इस विशेष जानकारी की पुष्टि नहीं की है, जबकि यह खबरें बढ़ रही हैं कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के लिए जगह तैयार कर ली गई है.
यह कूटनीतिक गतिविधि ऐसे समय में हो रही है जब वॉशिंगटन की ओर से कड़े बयान भी सामने आ रहे हैं.
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए इस संघर्ष का बचाव किया और सोमवार को 50 मिनट के भीतर चार पोस्ट किए.
इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि इससे ईरान के “न्यूक्लियर डस्ट साइट्स का पूरी तरह से खात्मा” हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति के इन बयानों पर तेहरान की ओर से तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया आई, जिससे बातचीत से पहले माहौल और जटिल हो गया है.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद ग़ालिबाफ ने अमेरिकी नेता पर आरोप लगाया कि वे “बातचीत की मेज को सरेंडर की मेज” में बदलना चाहते हैं.
एक्स पर पोस्ट करते हुए ग़ालिबाफ ने कहा कि ईरान पर दबाव नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा, “हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते, और पिछले दो हफ्तों में हमने मैदान में नए कदम दिखाने की तैयारी कर ली है.”
तनाव बढ़ने और ट्रंप के यह संकेत देने के बावजूद कि मौजूदा सीजफायर बढ़ाया नहीं जा सकता, पर्दे के पीछे कूटनीतिक कोशिशों के संकेत भी मिल रहे हैं.
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कथित तौर पर ईरानी वार्ता दल को इस्लामाबाद जाने की “हरी झंडी” दे दी है.
यह कदम बुधवार को होने वाली नई उच्च स्तरीय बातचीत के लिए संभावित रास्ता खोल सकता है, जबकि सीजफायर की समय सीमा नजदीक आने से पहले दोनों देश एक-दूसरे को चेतावनी भी दे रहे हैं.
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