इंफाल (मणिपुर): सुरक्षा बलों ने शनिवार को इंफाल वेस्ट जिले में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जब खुरई लामलॉन्ग इलाके में तनाव बढ़ गया था. यह प्रदर्शन ट्रोंगलाओबी बम हमले की घटना के मामले में न्याय की मांग को लेकर किया जा रहा था.
यह विरोध 7 अप्रैल के हमले के बाद हुआ, जो मोइरांग के ट्रोंगलाओबी अवांग लेइकाई इलाके में हुआ था, जहां संदिग्ध उग्रवादियों ने रात करीब 1:00 बजे एक मैतेई परिवार के घर पर बम फेंका था, जिसमें दो नाबालिग भाई-बहन, एक 5 साल का लड़का और उसकी 5 महीने की बहन, जो उस समय सो रहे थे, मारे गए थे. उनकी मां भी इस हमले में घायल हो गई थीं.
इस बीच, मेइरा पाइबी लुप (महिला मशाल वाहक) ने पूरे मणिपुर में सात दिन का पूर्ण बंद शटडाउन लागू किया है और मांग की है कि सरकार 25 अप्रैल तक हमले के जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करे.
इस बंद के आह्वान के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में अधिकतर सड़कें, बाजार, दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे. व्यावसायिक वाहन ज्यादातर सड़कों से दूर रहे, हालांकि कुछ निजी वाहन चलते हुए देखे गए.
पहले 15 अप्रैल को, कथित बम हमले में मारे गए दो बच्चों के दादा ओइनम बाबूटन ने कहा था कि परिवार ने सरकार की एक्स-ग्रेशिया राशि को अस्वीकार कर दिया है और वे “न्याय” चाहते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो.
ओइनम बाबुटन ने कहा, “सरकार ने कहा कि वे हमें एक्स-ग्रेशिया भुगतान देंगे. लेकिन हम इसे नहीं चाहते. हम इससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं. पुलिस टीमें, NIA टीमें और फॉरेंसिक टीमें भी जांच के लिए आईं. लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है.”
उन्होंने आगे बताया कि बच्चों की मां, जिन्हें हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिली थी, अपने मायके चली गई हैं. उन्होंने कहा, “बच्चों की मां को आज अस्पताल से छुट्टी मिल गई और घर लाया गया. उन्होंने कहा कि उनका यहां मन नहीं लग रहा था, उनका दिल नहीं था. इसलिए वे अपने मायके चली गई हैं.”
उन्होंने कहा, “आप किसी इंसान की जान की भरपाई एक्स-ग्रेशिया से नहीं कर सकते. 10-20 लाख रुपये किसी को वापस नहीं ला सकते. हम न्याय चाहते हैं. हम चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा कभी न हों.”