scorecardresearch
Tuesday, 21 April, 2026
होमराजनीतिDMDK की नई सियासी शुरुआत: प्रभाकरण की कैप्टन विजयकांत की विरासत को फिर से जिंदा करने की कोशिश

DMDK की नई सियासी शुरुआत: प्रभाकरण की कैप्टन विजयकांत की विरासत को फिर से जिंदा करने की कोशिश

DMDK के संस्थापक और अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत का दिसंबर 2023 में निधन हो गया. उनके बेटे वी. प्रभाकरन तब से पार्टी का चेहरा बन गए हैं, और उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए DMK के साथ गठबंधन कर लिया है.

Text Size:

विरुधुनगर (तमिलनाडु): सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साथ नए गठबंधन पर भरोसा करते हुए देशिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने और अपने संस्थापक, दिवंगत अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत की विरासत को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रही है.

उनके बेटे वी. विजय प्रभाकरन, जो अब पार्टी का चेहरा हैं, ने दिप्रिंट को दिए इंटरव्यू में कहा कि DMK के साथ यह गठबंधन पार्टी को विधानसभा चुनावों में वापसी का मौका देगा. DMDK नेता, जो विरुधुनगर से DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) के तहत चुनाव लड़ रहे हैं, ने भरोसा जताया कि पार्टी इस चुनाव में वापसी करेगी.

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग होगी.

सीट बंटवारे में DMDK को 10 सीटें मिली हैं. प्रभाकरन ने कहा कि अब पूरे गठबंधन का ध्यान उनकी पार्टी पर है.

“DMK के साथ गठबंधन के जरिए हम अपने पिता के उस विजन को फिर से जीवित करेंगे जिसमें साफ राजनीति, ईमानदारी और लोगों के लिए काम करना शामिल है,” उन्होंने कहा.

उन्होंने कहा कि उनके पिता की खराब सेहत के कारण पार्टी और कार्यकर्ताओं को “कठिन समय” से गुजरना पड़ा.

दिसंबर 2023 में कैप्टन विजयकांत की मौत को उन्होंने “हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान” बताया. “कार्यकर्ता परेशान थे कि पार्टी को आगे कैसे बढ़ाया जाए. तभी मेरी मां आगे आईं और मैं भी कार्यकर्ताओं के समर्थन से यहां हूं. इस चुनाव में DMK का गठबंधन हमें मेरे पिता का सपना पूरा करने का मौका देता है,” विजय प्रभाकरन ने कहा.

विरासत को आगे बढ़ाना

विजय प्रभाकरन ने कहा कि पिता की मौत के बाद राजनीति में आना उनके लिए निजी और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों थी.

“विजयकांत का बेटा होना ही एक बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि लाखों लोग हम पर निर्भर थे और अचानक उन्हें लगा कि उनका कोई नेता नहीं है. यह मेरी जिम्मेदारी है कि उस खाली जगह को भरूं और पिछले दो दशकों में बनाई गई विरासत को आगे बढ़ाऊं,” उन्होंने कहा.

2006 में नई पार्टी के रूप में DMDK ने 234 में से 232 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और सिर्फ एक सीट जीती, हालांकि उसे 8.38 प्रतिशत वोट मिले.

2011 में, जब उसने AIADMK के साथ गठबंधन किया, तब उसने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा और 29 सीटें जीतीं.

2016 में, AIADMK के साथ रहते हुए, DMDK ने 104 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी नहीं जीती और उसका वोट शेयर घटकर 2.39 प्रतिशत रह गया.

2021 में भी पार्टी AIADMK के साथ थी और 60 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती और उसे सिर्फ 0.43 प्रतिशत वोट मिले.

“मेरे पिता के साथ खड़े रहने वाले कार्यकर्ता अब देखेंगे कि DMDK एक्शन के जरिए वापस आएगी, सिर्फ वादों से नहीं.”

वी. विजय प्रभाकरन

प्रभाकरन ने अपनी मां और DMDK की महासचिव प्रेमालता विजयकांत को मुश्किल समय में पार्टी की “ढाल” बनने का श्रेय दिया.

“मेरी मां के मार्गदर्शन में, हम ठोस काम करके अपने नेता का समर्थन फिर से हासिल करेंगे. कार्यकर्ता देखेंगे कि DMDK सिर्फ वादे नहीं करती, काम करती है,” उन्होंने कहा.

वंशवाद और परिवारवाद के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वे अपने पिता के कहने पर राजनीति में आए थे.

उन्होंने कहा कि पिता की मौत के बाद कार्यकर्ताओं को संभालना उनकी जिम्मेदारी थी. “मैं सिर्फ अपने पिता के लिए नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं के लिए भी यहां हूं, जिन्होंने मुश्किल समय में हमारा साथ दिया.”

DMK बनाम AIADMK

DMDK नेता ने बताया कि अलग-अलग पार्टियों ने DMDK के साथ अलग व्यवहार किया. उन्होंने कहा कि पहले DMK के साथ मतभेद थे, लेकिन कोई निजी दुश्मनी नहीं है.

“जब 2005 में DMDK बनी, तब DMK सत्ता में थी. हर नई पार्टी सत्ता वाली पार्टी का विरोध करती है. लेकिन व्यक्तिगत तौर पर दोनों में सम्मान है,” उन्होंने कहा.

विजय प्रभाकरन ने बताया कि उनके पिता की शादी में थाली बांधने की रस्म एम. करुणानिधि ने निभाई थी. उन्होंने कहा कि एम.के. स्टालिन ने एक रैली में कहा था कि उन्होंने पहले उनके पिता के लिए फिल्म में प्रचार किया था और अब बेटे के लिए असल जिंदगी में कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि DMDK DMK के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी क्योंकि उन्हें सम्मान मिला और वादे पूरे किए गए. उन्होंने कहा कि स्टालिन ने राज्यसभा सीट देने जैसे वादे जल्दी पूरे किए.

उन्होंने कहा कि यह गठबंधन सम्मान और शांति पर आधारित है, जिसमें उधयनिधि स्टालिन और कनिमोझी जैसे नेता सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं.

“DMK के साथ गठबंधन हमें फिर से मजबूत बनाएगा और अगली सरकार बनाने में हमारी भूमिका होगी,” उन्होंने कहा.

इसके विपरीत, उन्होंने कहा, “AIADMK ने अपने वादे पूरे नहीं किए. उन्हें हमेशा डर रहता था कि दूसरे दल हावी हो जाएंगे. यह हमारे लिए सही नहीं था.”

“DMK ने ईमानदारी दिखाई है, इसलिए SPA से कोई नहीं जा रहा. लोग पूछ रहे थे कि DMDK को 10 सीटें क्यों मिलीं, लेकिन हम साबित करेंगे कि हमारे पास अच्छा वोट शेयर है,” प्रभाकरन ने कहा.

उन्होंने भरोसा जताया कि DMDK के पास अभी भी पूरे तमिलनाडु में मजबूत संगठन है.

“कम सीटें मिलने के बावजूद DMDK फीनिक्स की तरह वापस आएगी. 234 की 234 सीटों पर हमारी पकड़ है. हर बूथ पर कम से कम पांच कार्यकर्ता हैं. यह गठबंधन हमें फिर से प्रभावशाली बनाएगा,” उन्होंने कहा.

‘विजय भीड़ खींचते हैं लेकिन विचारधारा की कमी है’

जब उनसे अभिनेता विजय और उनकी पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने माना कि विजय लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन नेतृत्व में कमी है.

“मैंने खुद देखा है कि फैन बेस राजनीति में बदल सकता है. लेकिन नेता को विनम्र और लोगों के बीच रहना चाहिए. विजय कहते हैं कि वह महीने में एक बार लोगों से मिलेंगे, यह सही नहीं है. एक विधायक को हमेशा लोगों के लिए उपलब्ध रहना चाहिए,” उन्होंने कहा.

उन्होंने TVK की विचारधारा पर भी सवाल उठाया.

“विजय भीड़ खींचते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के पास मजबूत विचारधारा नहीं है. DMDK को कैप्टन ने सामाजिक न्याय, साफ प्रशासन और जनता के हितों पर बनाया था,” उन्होंने कहा.

‘डिलिमिटेशन पर AIADMK चुप है’

परिसीमन के मुद्दे पर, विजय प्रभाकरन ने पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया.

“परिसीमन विधेयक पर DMK का जो रुख है, वही DMDK का भी है. हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं. तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक आवाज़ को कमज़ोर करने वाले किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा.

'I've come to Virudhunagar & moved to a house here,' says Vijay Prabhakaran | Shweta Tripathi/ThePrint
विजय प्रभाकरन कहते हैं, ‘मैं विरुधुनगर आया हूं और यहां एक घर में रहने लगा हूं.’ श्वेता त्रिपाठी/दिप्रिंट

हालांकि, AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने हाल ही में कोयंबटूर में एक रोडशो में कहा कि जब केंद्रीय मंत्री अमित शाह तमिलनाडु आए थे, तो उन्होंने भरोसा दिलाया था कि राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा. EPS ने कहा, “NDA, स्टालिन की उम्मीद से भी बेहतर तरीके से परिसीमन लागू करेगा. केंद्र का रुख साफ़ है कि परिसीमन से किसी भी राज्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा.”

AIADMK, जो पहले DMDK की सहयोगी थी, ने 5 मार्च 2025 को सत्ताधारी DMK द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया था. इस बैठक का मकसद दक्षिणी राज्य की, भविष्य में होने वाले किसी भी परिसीमन अभ्यास से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करना था.

हालांकि, 14 अप्रैल को जब DMK ने ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के ख़िलाफ़ आंदोलन का आह्वान किया, तो AIADMK—जो इस समय BJP की सहयोगी है—ने इसका कोई विरोध नहीं किया.

परिसीमन के मुद्दे पर AIADMK की चुप्पी के बारे में पूछे जाने पर—जबकि पार्टी ने पहले सर्वदलीय बैठक के दौरान DMK को समर्थन दिया था—प्रभाकरन ने कहा, “अब उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं, क्योंकि अब वे BJP के सहयोगी हैं, और उनके पास विकल्प बहुत सीमित रह गए हैं.”

विरुधुनगर निर्वाचन क्षेत्र DMDK के लिए विशेष महत्व रखता है.

प्रभाकरन, जिनका इस क्षेत्र में पहले कड़ा मुकाबला हुआ था, राज्य विधानसभा चुनावों में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं; वे अपने पिता की लोकप्रियता और गठबंधन के गणित पर भी भरोसा कर रहे हैं. DMDK के लिए, मौजूदा गठबंधन का मकसद सिर्फ़ सीटें जीतना ही नहीं है, बल्कि पार्टी की प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करना और पार्टी कार्यकर्ताओं का पार्टी में विश्वास बहाल करना भी है. “हम यहां सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए चुनाव लड़ने नहीं आए हैं. मैं पार्टी के दूसरे सदस्यों को भी चुनाव लड़ने का मौका देने को तैयार था. लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं विरुधुनगर के लोगों के लिए कुछ कर पाऊंगा, क्योंकि मैं चेन्नई में रहा हूँ. मैं विरुधुनगर आया हूं और यहीं एक घर में रहने लगा हूं, क्योंकि मैं यहाँ की ज़मीनी राजनीति को समझता हूँ, और मैंने यहीं अपने पिता की विरासत को बढ़ते हुए देखा है.

“हम लोगों की मांगों को पूरा करना चाहते हैं, जिनमें बेहतर शासन, बिना भ्रष्टाचार के विकास, और आम आदमी को फ़ायदा पहुंचाने वाली नीतियां शामिल हैं,” विजय प्रभाकरन ने ज़ोर देकर कहा.

उन्होंने कहा कि विरुधुनगर में पानी की कमी की समस्या है; हालांकि AIADMK के शासनकाल में जहां 10 दिनों में एक बार पानी की सप्लाई होती थी, वहीं पिछली सरकार के दौरान यह स्थिति सुधरकर चार दिनों में एक बार हो गई थी. अब उनका लक्ष्य इस क्षेत्र में नियमित पानी की सप्लाई सुनिश्चित करना और अपने चुनाव क्षेत्र का समग्र विकास करना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?


 

share & View comments