scorecardresearch
Saturday, 18 April, 2026
होमदेशCM योगी ने कभी पहलगाम पीड़ित परिवार की हालत सुनकर आंसू बहाए थे, फिर ‘सिस्टम’ उन्हें भूल गया

CM योगी ने कभी पहलगाम पीड़ित परिवार की हालत सुनकर आंसू बहाए थे, फिर ‘सिस्टम’ उन्हें भूल गया

पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद, कानपुर के श्याम नगर के एक फ्लैट में ऐशान्या और उनके ससुराल वाले अब भी शुभम द्विवेदी के गम में डूबे हैं, जिनकी 31 साल की उम्र में जान चली गई.

Text Size:

कानपुर: सत्ताईस-साल की ऐशान्या द्विवेदी ने कहा, “मिल लीजिए हमसे सीएम साहब, हम बहुत समय से मिलना चाह रहे हैं”, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील कर रही हैं.

ऐशान्या, कानपुर के व्यापारी शुभम द्विवेदी की पत्नी हैं, जिन्हें पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने उनकी आंखों के सामने गोली मार दी थी. ऐशान्या ने उनसे खुद को भी मारने की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

शुभम, जिन्होंने सिर्फ दो महीने पहले ऐशान्या से शादी की थी, उस दिन मारे गए 26 लोगों में शामिल थे.

एक साल बाद, राज्य की राजधानी लखनऊ से करीब 100 किमी दूर कानपुर के श्याम नगर के एक फ्लैट में, ऐशान्या और उनके ससुराल वाले अब भी शुभम का शोक मना रहे हैं और सरकार से अपनी मांगों के पूरे होने का इंतज़ार र रहे हैं: पत्नी के लिए सरकारी नौकरी और हमले में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा.

पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों द्वारा मारे गए शुभम द्विवेदी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों द्वारा मारे गए शुभम द्विवेदी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

जिस गेस्ट रूम में वह अपने ससुराल वालों के साथ रहती हैं, वहां एक दीवार पर शुभम की तस्वीर लगी है, जबकि दूसरी दीवार पर उनके पिता संजय की तस्वीर है, जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं.

शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या, उनके बगल में बैठे उनके पिता राजेश और ससुर संजय (बाएं) अपने कानपुर घर में | फोटो: प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट
शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या, उनके बगल में बैठे उनके पिता राजेश और ससुर संजय (बाएं) अपने कानपुर घर में | फोटो: प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट

दिप्रिंट से बात करते हुए, परिवार कहता है कि उन्हें पीएम और यूपी के सीएम पर पूरा भरोसा है, लेकिन “सिस्टम” की एक साल की अनदेखी से वे निराश हैं. पिछले साल घटना के कुछ ही दिनों के भीतर, मोदी और आदित्यनाथ कानपुर में द्विवेदी परिवार से मिलने आए थे. यहां तक कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी उनसे मिले थे.

ऐशान्या कहती हैं कि उन्हें आज भी याद है जब आदित्यनाथ ने परिवार को सांत्वना देते समय उनकी आंखों में आंसू थे और वह मानती हैं कि वह उनकी मदद करेंगे. हालांकि, द्विवेदी परिवार अब तक सीएम से दूसरी बार मिलने में सफल नहीं हो पाया है.

पिछले तीन महीनों में, ऐशान्या और संजय कहते हैं कि उन्होंने कम से कम पांच बार आदित्यनाथ से मिलने का समय लेने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. वे देरी के लिए सीधे तौर पर सीएम को जिम्मेदार नहीं मानते, लेकिन उन्हें लगता है कि उनकी बात उन तक पहुंच ही नहीं रही. परिवार का कहना है कि सिस्टम में कोई ऐसा है जो उनके संदेश उन्हें तक नहीं पहुंचने दे रहा है.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल कानपुर के हथीपुर गांव में शुभम के परिवार से मुलाकात की थी | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल कानपुर के हथीपुर गांव में शुभम के परिवार से मुलाकात की थी | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

संजय ने बताया, “जब भी मैं उनके OSDs को कॉल करता हूं, वे कहते हैं कि हमारा संदेश ऊपर तक पहुंचा दिया गया है, लेकिन मुझे नहीं पता वे किस संदेश की बात कर रहे हैं क्योंकि योगीजी ने हमें फोन नहीं किया.”

हमले के एक साल बाद, द्विवेदी परिवार मानता है कि पहलगाम और वहां निर्दोष लोगों की मौत पर लोगों और राजनीति का ध्यान कम हो गया है.

ऐशान्या ने कहा, “यह घटना दूसरों के लिए भले ही फीकी पड़ गई हो, लेकिन हमारे लिए दर्द बिल्कुल वैसा ही है. एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब हमने शुभम को याद न किया हो. घटना के तुरंत बाद कई नेता हमसे मिलने आए और समर्थन का भरोसा दिया, लेकिन 12 महीने बाद वह समर्थन कहीं दिखाई नहीं देता.”

‘शुभम जाने को तैयार नहीं थे’

31-साल के शुभम और ऐशान्या की शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी. दो महीने बाद, इस जोड़े ने परिवार के 9 अन्य सदस्यों के साथ कश्मीर जाने की योजना बनाई थी. उस दिन, वह और ऐशान्या बैसरन घाटी के ऊपरी हिस्से में गए थे, जबकि बाकी परिवार नीचे ही रुका था.

ऐशान्या उस डरावने पल को याद करती हैं जब उन्होंने अपने पति को मरते हुए देखा.

उन्होंने कहा, “शुभम शुरुआत में बैसरन घाटी जाने के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि वहां मोबाइल नेटवर्क खराब था और वह आमतौर पर बिना सिग्नल वाली जगहों से बचते थे, लेकिन एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वहां नेटवर्क मिलेगा, जिसके बाद वह मान गए.”

“हम अपनी यात्रा का आनंद ले रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति, जो स्थानीय लग रहा था, हमारे पास आया. उसने मेरे पति से उनका धर्म पूछा और फिर मेरी आंखों के सामने उन्हें गोली मार दी.”

उन्होंने कहा कि उस दिन सबसे पहले शुभम को ही मारा गया था.

कानपुर के धोरी घाट पर शुभम द्विवेदी का अंतिम संस्कार | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
कानपुर के धोरी घाट पर शुभम द्विवेदी का अंतिम संस्कार | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

“उन पलों को फिर से याद करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है. मैंने शादी के सिर्फ दो महीने बाद अपने पति को खो दिया. हमने साथ में बहुत सपने देखे थे, अब सब खत्म हो गया है.”

कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट ऐशान्या, जिन्हें डांस और म्यूजिक का शौक है, बताती हैं कि इस घटना के बाद वह आगे बढ़ नहीं पाईं और अपने करियर पर ध्यान नहीं दे पा रही हैं. फिलहाल उनकी एक ही प्राथमिकता है—अपने पति के लिए न्याय, “पिछले एक साल से मेरी ज़िंदगी सदमे में है. मैंने अपने ससुराल वालों के साथ रहने का फैसला किया और हम साथ मिलकर न्याय के लिए लड़ रहे हैं. पूरा कानपुर हमारे साथ है, सिर्फ सिस्टम ही हमारे लिए बाधा बन रहा है.”

‘हम चाहते हैं कि योगीजी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आएं’

द्विवेदी परिवार की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि कई महीनों की कोशिशों के बावजूद वे आदित्यनाथ से दूसरी बार नहीं मिल पाए हैं.

संजय को पिछले साल सीएम से मुलाकात याद है.

उन्होंने कहा, “उन्होंने पूछा था कि मेरी बहू के लिए क्या किया जा सकता है. मैंने उसके लिए सरकारी नौकरी मांगी थी और उन्होंने कहा था कि वह इस पर विचार करेंगे.”

परिवार ने कहा, लेकिन इस मांग पर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है.

अब वे 22 अप्रैल को कानपुर में शुभम के लिए श्रद्धांजलि कार्यक्रम करने की योजना बना रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री इसमें शामिल होंगे. फिलहाल, उनका कहना है कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक आने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके लिए यह पर्याप्त नहीं है.

संजय के अनुसार, परिवार ने कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मांगा, बल्कि लगातार ऐशान्या के लिए सरकारी नौकरी की मांग की है.

उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर सतीश महाना (जो पहले स्थानीय विधायक भी थे) के प्रयासों से शुभम के नाम पर एक स्मारक द्वार बनाया गया है और एक पार्क का नाम उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव पास हुआ है, लेकिन संजय का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और सरकार से सभी मृतकों को “शहीद” का दर्जा देने की मांग करते हैं.

परिवार का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री और भारत के राष्ट्रपति को दो पत्र लिखे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला.

शुभम, संजय के इकलौते बेटे थे.

उन्होंने कहा, “मेरा एक बेटा था और एक बेटी है; बेटी की शादी हो चुकी है और अब हमारे पास हमारी बहू है, जो हमारी बेटी जैसी है. हम मिलकर शुभम को शहीद का दर्जा दिलाने की लड़ाई जारी रखेंगे.”

घर में पीएम मोदी के साथ लगी अपनी तस्वीर के बारे में संजय कहते हैं कि यह उनकी एकमात्र मुलाकात की तस्वीर है, जब पहलगाम घटना के बाद मोदी उनके परिवार से मिलने कानपुर आए थे. वह बताते हैं कि बाद में उन्होंने अपने बेटे को शहीद का दर्जा देने के लिए पीएम को पत्र लिखा, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला.

शुभम के पिता संजय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र | फोटो: प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट
शुभम के पिता संजय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र | फोटो: प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट

अपनी मांग को जायज बताते हुए, वह कहते हैं कि उनका बेटा निर्दोष था और आरोप लगाते हैं कि पहलगाम घटना सुरक्षा में चूक का नतीजा थी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की है.

ऐशान्या ने कहा, “हम चाहते हैं कि योगीजी हमारे श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आएं, लेकिन अभी तक उनके ऑफिस से कोई जवाब नहीं मिला है.”

हालांकि, वह कहती हैं कि वह उन्हें एक सक्षम नेता मानती हैं, “हम उनसे निराश नहीं हैं, बल्कि सिस्टम से हैं जो स्टाफ चला रहा है.”

पहलगाम हमले के बाद, भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ जगहों पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया.

ऐशान्या कहती हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया और भारतीय सेना पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद खत्म करने के लिए सेना को खुली छूट दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा, “सेना को रोका नहीं जाना चाहिए. सिर्फ हमारी सेना ही आतंकवाद खत्म कर सकती है, लेकिन रास्ते में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए. उनके हाथ नहीं बंधे होने चाहिए.”

अपने निजी नुकसान को याद करते हुए वह कहती हैं: “मैं नहीं चाहती कि किसी और का पति इस तरह उससे छिन जाए, जैसे मेरा सिर्फ शादी के दो महीने बाद छिन गया. मैं न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments