प्रयागराज, 17 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि वह करंट लगने के कारण दोनों हाथ गंवाने वाले व्यक्ति को 26.65 लाख रुपये मुआवजा दे।
यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने पीड़ित पप्पू द्वारा दायर प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए 15 अप्रैल को पारित किया।
जानकारी के अनुसार मार्च 1997 में आगरा के नागला पाड़ी का है जब पीड़ित पप्पू सात वर्ष का था। पप्पू जब इलाके के एक प्राथमिक विद्यालय के पास खेल रहा था तो वह दुर्घटनावश 11,000 वोल्ट के ट्रांसफॉर्मर के संपर्क में आया गया जिससे वह बुरी तरह झुलस गया और उसकी जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसके दोनों हाथ काटने पड़े।
ट्रांसफार्मर की घेराबंदी नहीं की हुई थी।
पीड़ित बच्चे के पिता ने मुआवजे के लिए वाद दायर किया था, जिसे 2005 में अधीनस्थ अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि घटना बच्चे की लापरवाही के कारण हुई।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए पीड़ित ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने अधीनस्थ अदालत के फैसले को पलट दिया।
अदालत ने कहा, “पीड़ित पप्पू अपनी इस स्थिति के लिए 26.65 लाख रुपये मुआवजा पाने का हकदार है, जो उसे इस मामले के दायर होने की तिथि 30 मई 1997 से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ मिलेगा।”
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ित उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड से मुकदमे और अपील का खर्च भी प्राप्त करने का हकदार है, जिसमें संबंधित अदालत शुल्क शामिल हैं।
इसने उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को आदेश की तिथि से एक महीने के भीतर उक्त राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया और ऐसा न होने पर वादी को विभाग के खिलाफ वसूली की कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता होगी।
भाषा सं राजेंद्र खारी
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