प्रयागराज, 17 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अधिवक्ता द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक वकील अपने उन मुवक्किल के हित में जनहित याचिका दायर नहीं कर सकता जिन्होंने उसे अपने कानूनी मामले देखने के लिए अधिकृत किया है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा, “एक अधिवक्ता द्वारा यह कहते हुए जनहित याचिका दायर करना कि वह कुछ उद्योगों का कानूनी सलाहकार है और उसे इस मामलों को देखने के लिए अधिकृत किया गया है, वह याचिका अनिवार्य रूप से जनहित के दायरे से बाहर हो जाती है।”
अदालत ने कहा, “एक अधिवक्ता से मुवक्किल शिकायतों का निवारण करने के लिए संपर्क करते हैं, याचिकाकर्ता बनने और अपने मुवक्किलों के हित में जनहित याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उसका इस तरह का आचरण पेशेवर कदाचार के समान हो सकता है।”
अधिवक्ता याचिकाकर्ता ने पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर उन उद्योंगो को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने का प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी।
हालांकि, जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पेशे से वकील है और जिला फिरोजाबाद में वकालत करता है।
वह साथ ही फिरोजाबाद जिले स्थित कुछ उद्योगों का कानूनी सलाहकार है और इन उद्योगों के मालिकों ने उसे औद्योगिक प्राधिकरणों के समक्ष औद्योगिक मामले देखने के लिए अधिकृत किया है।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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