नई दिल्ली: कई राजनीतिक दलों द्वारा जताई गई डिलिमिटेशन की आशंकाओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद को आश्वस्त किया कि पिछले डिलिमिटेशन के दौरान तय किए गए अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने यह भी “गारंटी” दी कि भविष्य में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी में भी यही अनुपात लागू रहेगा.
लोकसभा में सांसदों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और उन्होंने अपील की कि सरकार के उन विधेयकों को राजनीतिक रंग न दिया जाए, जिनका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्दी लागू करना है.
उन्होंने कहा, “आज मैं इस सदन के सामने पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि—चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम; छोटे राज्य हों या बड़े—इस फैसले की प्रक्रिया में किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा. पहले की सरकारों द्वारा तय किए गए अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा—खासतौर पर जिनके समय में डिलिमिटेशन हुआ था—और आगे भी कोई बढ़ोतरी उसी अनुपात के अनुसार होगी.”
सांसदों से विधेयकों का समर्थन करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, “अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, अगर वादा चाहिए तो मैं वादा करता हूं, अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द है तो बताइए, मैं वह भी बोल दूंगा—क्योंकि जब नीयत साफ होती है तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं होती.”
बीजेपी सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को आसानी से पास कराने की कोशिश कर रही है, जिसमें लोकसभा की कुल सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. हालांकि, कई विपक्षी दलों ने संघीय अधिकारों की रक्षा की जरूरत बताई है.
प्रधानमंत्री संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर बोल रहे थे, जिसमें महिला आरक्षण कानून में भी बदलाव का प्रस्ताव है. इसके साथ ही डिलिमिटेशन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए.
पीएम ने यह भी कहा कि जो लोग इस फैसले का श्रेय लेना चाहते हैं, उन्हें वह “ब्लैंक चेक” देने को तैयार हैं.
लोकसभा में बोलते हुए पीएम ने कहा कि जब-जब महिला आरक्षण पर चर्चा हुई और चुनाव आए, तब-तब जिन लोगों ने इसका विरोध किया, उन्हें महिलाओं ने माफ नहीं किया.
उन्होंने कहा, “2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि तब यह बिल सर्वसम्मति से पास हुआ था, इसलिए यह मुद्दा ही नहीं बना.”
कई राज्यों, खासकर दक्षिण के नेताओं ने कहा है कि डिलिमिटेशन के बाद उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है और कुछ बड़े राज्य लोकसभा में ज्यादा सीटों के कारण नीतियों पर हावी हो सकते हैं.
पीएम मोदी के भाषण के बाद आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री नारा लोकेश ने उनका धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि पीएम ने देश को भरोसा दिया है कि डिलिमिटेशन में राज्यों के सीट अनुपात पर असर नहीं पड़ेगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा.
Grateful for the Hon’ble Prime Minister’s assurance to the nation, on behalf of the NDA, that the proportion of seats of each state in the parliament would not be affected in the delimitation exercise. No injustice would be done to any state.
This is NDA’s guarantee.… pic.twitter.com/LYwnAFkCLU
— Lokesh Nara (@naralokesh) April 16, 2026
तेलुगु देशम पार्टी ने भी इन विधेयकों को समर्थन देने का भरोसा दिया है.
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने प्रस्तावित डिलिमिटेशन के खिलाफ राज्यभर में काला झंडा आंदोलन शुरू किया और केंद्र को चेतावनी दी कि अगर राज्य की आवाज नहीं सुनी गई तो “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी.
अपने भाषण में पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि इसमें उनका राजनीतिक फायदा है. “अगर वे विरोध करेंगे तो मुझे फायदा होगा, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी को राजनीतिक फायदा नहीं होगा. हमें श्रेय नहीं चाहिए. यह पास होते ही मैं कल से विज्ञापन चला दूंगा, सबका धन्यवाद करूंगा, सबकी फोटो छाप दूंगा—जिसकी फोटो छपवानी है, बताइए,” उन्होंने कहा.
सभी दलों के सांसदों से अपील करते हुए पीएम ने कहा कि इस फैसले को राजनीति के तराजू पर न तौला जाए, बल्कि इसे राष्ट्रीय हित का फैसला समझा जाए.
उन्होंने कहा, “इसे राजनीतिक नजर से मत देखिए, यह राष्ट्रीय हित का फैसला है. आज देश और दुनिया की महिलाएं हमारे फैसले को देखेंगी, लेकिन उससे ज्यादा हमारे इरादे को परखेंगी. अगर हमारे इरादे में कमी हुई तो देश की महिलाएं हमें कभी माफ नहीं करेंगी.”
पीएम ने दोहराया कि सरकार की नीयत साफ है और किसी को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि सरकार महिलाओं को कुछ “दे” रही है. “यह उनका अधिकार है,” उन्होंने कहा.
उन्होंने कहा, “हम यह अहंकार न रखें कि हम देश की महिलाओं को कुछ दे रहे हैं… बिल्कुल नहीं! यह उनका अधिकार है. हमने इसे दशकों तक रोके रखा. आज मौका है कि हम उस गलती को सुधारें.”
मोदी ने कहा कि जब 2023 में महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही थी, तब लोग इसे जल्द लागू करने की बात कर रहे थे.
उन्होंने कहा, “2024 में यह संभव नहीं था क्योंकि इतना कम समय था. अब 2029 में समय है. अगर तब भी नहीं करेंगे तो स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. समय की मांग है कि अब और देरी न हो.”
उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ, तब उसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया गया.
उन्होंने सांसदों से अपील की कि इसे राजनीतिक रंग न दें. “25-30 साल पहले जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने इसे राजनीति से ऊपर नहीं उठने दिया. आज वही गलती न करें. अब महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता आ चुकी है. पहले वे चुप रहती थीं, अब खुलकर बोलती हैं,” उन्होंने कहा.
पीएम ने कहा कि जो लोग राजनीति में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें समझना होगा कि पिछले 25-30 साल में महिलाएं जमीनी स्तर पर नेता बन चुकी हैं.
उन्होंने कहा, “वे सिर्फ यहां नहीं, वहां भी हैं और आपके फैसलों को प्रभावित कर रही हैं. जो आज इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी. अगर हम सब साथ आएंगे, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक दल के पक्ष में नहीं जाएगा.”
उन्होंने कहा, “यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, सामूहिक निर्णय की ताकत के पक्ष में जाएगा और हम सभी इसके हकदार होंगे. न सरकार और न ही मोदी इसका श्रेय लेंगे. इसलिए इसमें राजनीति की गंध ढूंढने वालों को अपने पिछले 30 साल का परिणाम देखना चाहिए. उनका भी फायदा इसी में है. इसलिए इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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