लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते हुए पूछा कि पार्टी से कितनी महिला मुख्यमंत्री बनी हैं.
कन्नौज के सांसद ने महिला आरक्षण कानून में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी कोटा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जाति जनगणना कराई जानी चाहिए.
उन्होंने गुरुवार को लोकसभा में कहा, “एनडीए 21 राज्यों में सत्ता में है, लेकिन उनमें से कितने राज्यों में महिला मुख्यमंत्री हैं? जो लोग अपनी पार्टी में महिलाओं को जगह नहीं देते, वे उन्हें सम्मान कैसे देंगे? बीजेपी के मूल संगठन में कितनी महिलाएं हैं? बीजेपी 21 जगह सत्ता में है, बताइए उनमें से कितने राज्यों में महिला मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली में भले ही महिला मुख्यमंत्री हो, लेकिन उनके पास पूरे अधिकार नहीं हैं, वह केवल ‘आधी’ मुख्यमंत्री हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी बीजेपी को लगता है कि लोग उसकी नीतियों से नाराज हो रहे हैं, तब वह ऐसे मुद्दे लेकर आती है ताकि ध्यान भटकाया जा सके.
उन्होंने कहा कि बीजेपी खुद को सबसे बड़ी पार्टी बताती है, लेकिन उसके कुल विधायकों में 10 प्रतिशत भी महिलाएं नहीं हैं, “नारी को नारा बनाना चाहती है बीजेपी.”
उन्होंने महिला आरक्षण की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी इसे बहाना बनाकर जनगणना टाल रही है. उन्होंने कहा कि जनगणना में देरी करके सरकार जाति जनगणना से भी बचना चाहती है, क्योंकि उसके बाद आरक्षण का मुद्दा उठेगा.
अखिलेश ने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन जिस तरह इसे पेश किया जा रहा है, उससे लगता है कि बीजेपी इसे सिर्फ एक नारा बनाना चाहती है.
उन्होंने सदन को याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण समाजवादी पार्टी के समय ही लागू किया गया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का वोट प्रतिशत घट रहा है, इसलिए उसने ये बिल लाए हैं.
उन्होंने कहा, “जब लोगों को समझ में आ जाता है कि बीजेपी किसी के साथ नहीं खड़ी है, तो पार्टी ऐसे नारों के जरिए नए वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश करती है. हमारी मांग है कि पहले जनगणना कराई जाए. हमने पहले भी यह बात उठाई थी. पिछड़े वर्गों और खासकर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए. इनके बिना हमारा उद्देश्य पूरा नहीं होगा.”
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी सरकार की नीतियों और “कमीशन आधारित कामकाज” के कारण महंगाई बढ़ी है, जिससे कई परिवार परेशान हैं और रसोई खाली हो रही हैं. उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है.
नोएडा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां करीब 40,000 मजदूर सड़कों पर हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं. हाल के मजदूरों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “बीजेपी उनके लिए क्या कर रही है?”
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