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Thursday, 16 April, 2026
होमविदेशUS और चीन के बाद, रूस ने वेस्ट एशिया युद्ध में शांति के लिए पाकिस्तान की ‘असरदार’ भूमिका की तारीफ की

US और चीन के बाद, रूस ने वेस्ट एशिया युद्ध में शांति के लिए पाकिस्तान की ‘असरदार’ भूमिका की तारीफ की

पाकिस्तान में रूसी दूतावास ने पूर्व रूसी राजदूत का लेख पोस्ट किया, जिसमें इस्लामाबाद को ‘ऐसे बाहरी मुद्दों को सुलझाने में प्रभावी खिलाड़ी’ बताया गया है जो उसके सीधे हितों से जुड़े नहीं हैं.

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नई दिल्ली: एक रिटायर्ड रूसी राजनयिक ने पश्चिम एशिया युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों की तारीफ की है और उसे “ऐसे बाहरी मुद्दों को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी खिलाड़ी” बताया है जो उसके सीधे हितों से जुड़े नहीं हैं.

यह तारीफ अमेरिका और चीन की ओर से मिली ऐसी ही सराहना के बाद आई है.

न्यू ईस्टर्न आउटलुक में लिखते हुए, रिटायर्ड एंबेसडर एक्स्ट्राऑर्डिनरी एंड प्लेनिपोटेंशियरी अनवर अज़ीमोव ने कहा कि पाकिस्तानी मध्यस्थों ने इस संघर्ष को सुलझाने के लिए “राजनीति और कूटनीति में उच्च कौशल” दिखाया है.

एंबेसडर एक्स्ट्राऑर्डिनरी एंड प्लेनिपोटेंशियरी सबसे उच्च रैंक का राजनयिक प्रतिनिधि होता है, जो किसी देश के प्रमुख का दूसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन में स्थायी, व्यक्तिगत प्रतिनिधि होता है. अज़ीमोव 2015 से 2020 तक क्रोएशिया में रूस के राजदूत रहे और इससे पहले जाम्बिया में भी देश के प्रतिनिधि रह चुके हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1994 में भारत में रूसी दूतावास में मिनिस्टर काउंसलर के रूप में की थी.

पूर्व सोवियत राजदूत सरवर अज़ीम के बेटे अज़ीमोव ने 47 साल में पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संपर्क कराने को इस्लामाबाद की कूटनीतिक पहुंच का सबूत बताया.

अज़ीमोव ने सोमवार को रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज द्वारा प्रकाशित पत्रिका में लिखा

“इस्लामाबाद द्वारा आयोजित अमेरिका-ईरान के अभूतपूर्व संपर्क, चाहे उनका परिणाम कुछ भी हो, पाकिस्तानी कूटनीति की एक निश्चित सफलता को दिखाते हैं.”

लेकिन उनकी तारीफ के साथ एक टिप्पणी भी थी. अज़ीमोव ने कहा कि पाकिस्तान की बाहरी कूटनीतिक सफलताएं उसके पड़ोस में जारी तनाव से बिल्कुल अलग हैं, खासकर भारत और अफगानिस्तान के साथ.

उन्होंने लिखा, “दुर्भाग्य से, इस्लामाबाद खुद अपने सबसे नजदीकी पड़ोसियों, भारत और अफगानिस्तान के साथ सामान्य संबंध बनाने से अभी भी दूर है.”

उन्होंने कहा कि मॉस्को इन तनावों को कम करने में रुचि रखता है और इस्लामाबाद के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है, साथ ही नई दिल्ली के साथ अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी भी जारी रखना चाहता है.

अज़ीमोव ने कहा, “रूस भारतीय उपमहाद्वीप में स्थिरता और सुरक्षा में रुचि रखता है, साथ ही पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान के बीच संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने में भी. भारत के साथ अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी और अफगानिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा के साथ-साथ, रूस पाकिस्तान के साथ भी बहुआयामी और पारस्परिक लाभ वाले संबंध बढ़ाना चाहता है.”

बुधवार को, चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-ईरान के अस्थायी युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की “मदद” और “निष्पक्ष और संतुलित मध्यस्थ की भूमिका” की सराहना की. युद्ध में शामिल दोनों पक्षों—अमेरिका और ईरान—ने भी अलग-अलग इस बात की सराहना की कि इस्लामाबाद ने 11-12 अप्रैल को बातचीत के पहले दौर की मेजबानी की.

पाकिस्तान ने, जिसे अज़ीमोव ने “ईमानदार मध्यस्थ” और एक तटस्थ बीच का रास्ता निकालने वाला बताया, वॉशिंगटन, बीजिंग और तेहरान के साथ एक साथ संबंधों का इस्तेमाल किया. पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा के लिए उसकी कूटनीतिक कोशिशों में 29 मार्च को इस्लामाबाद में हुई बैठक शामिल थी, जिसमें मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्री शामिल हुए, और इसके बाद उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार की बीजिंग यात्रा हुई.

इन प्रयासों ने 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के उच्च स्तर के प्रतिनिधिमंडलों के बीच सीधी बातचीत कराने की जमीन तैयार की—यह एक अभूतपूर्व बैठक थी, जिससे लंबी अवधि की शांति योजना तो नहीं बनी, लेकिन अज़ीमोव के अनुसार इसने इस्लामाबाद की अहमियत को दिखाया.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी बुधवार को तेहरान गए, जहां उन्होंने वॉशिंगटन के संदेश पहुंचाए और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उनसे मुलाकात की.

अमेरिका ने संकेत दिया है कि इस्लामाबाद में बातचीत का दूसरा दौर होने वाला है, हालांकि, अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि दुनिया को “दो शानदार दिन” देखने को मिलेंगे और ईरान के साथ युद्ध “खत्म होने के बहुत करीब” है.

अज़ीमोव ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि इस्लामाबाद क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को कितनी गंभीरता से लेता है.

उन्होंने लिखा, “मार्च 2026 के अंत में, जब मैं इस्लामाबाद में रूस और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों पर रूसी दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में था, तब मैंने देखा कि यह बड़ा दक्षिण एशियाई देश, जिसके पास परमाणु क्षमता है, क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को कितनी जिम्मेदारी से लेता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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