अहमदाबाद, 10 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामलों की सुनवाई करने वाली यहां की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित आठ लोगों को 2016 के ऋण धोखाधड़ी मामले में दोषी करार दिया।
एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में बैंक को 1.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
सीबीआई की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, अदालत ने सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक गुरिंदर सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक केजीसीएस अय्यर और सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक केई सुरेंद्रनाथ को दो साल के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
इसमें कहा गया है कि अदालत ने ‘मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक संजय पटेल को तीन साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
विज्ञप्ति के मुताबिक, इसी मामले में हितेश डोमडिया को भी तीन साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा की गई है।
इसमें कहा गया है कि अदालत ने सतीश दावरा, वैशाली दावरा और रमीलाबेन भीकड़िया को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अदालत ने ‘मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड’ पर भी 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
सीबीआई के मुताबिक, ‘श्री काली टेक्सटाइल्स’ के मालिक शैलेश सतसिया और अन्य के खिलाफ 22 अगस्त 2016 को एक मामला दर्ज किया गया था।
जुलाई 2011 में आरोपी ने 44 वाटर जेट लूम मशीनें खरीदने और अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए पीएनबी की सूरत शाखा में 3.70 करोड़ रुपये के सावधि ऋण और 40 लाख रुपये के नकद ऋण के लिए आवेदन किया था।
ऋण प्रस्ताव की सिफारिश सुरेंद्रनाथ और अय्यर ने की थी और इसे गुरिंदर सिंह ने 29 जुलाई 2011 को स्वीकृत किया था।
सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेज जमा किए थे और बैंक अधिकारियों ने उचित दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना ऋण स्वीकृत कर दिया तथा जाली दस्तावेजों को असली मानकर उन्हें स्वीकार कर लिया।
भाषा धीरज पारुल
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