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Monday, 27 April, 2026
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एआई का लाभ उठाने के लिए कौशल उन्नयन, शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरीः कामत

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(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिग्गज बैंकर के वी कामत ने कृत्रिम मेधा (एआई) को अगले दशक की प्रमुख प्रवृत्ति बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इसका लाभ उठाने के लिए कौशल उन्नयन एवं शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार जरूरी है।

कामत ने यहां ‘एआईएमए’ के एक कार्यक्रम में हीरो एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल के साथ बातचीत में कहा कि भारत को महंगे फाउंडेशनल मॉडल विकसित करने के बजाय एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “एआई के लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) बनाना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है… हमें यह देखना चाहिए कि इसके उपयोग कहां किए जा सकते हैं।”

कामत ने वित्तीय सेवाओं में एआई के उपयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉल सेंटर जैसे क्षेत्रों में इसे आसानी से लागू किया जा सकता है, जिससे दक्षता बढ़ेगी, लागत घटेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व चेयरमैन कामत ने कहा कि एआई-आधारित बदलावों का पूरा लाभ उठाने के लिए शिक्षा पाठ्यक्रम में बड़े स्तर पर सुधार और युवाओं को उपयुक्त प्रशिक्षण देना आवश्यक है।

देश की आर्थिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि फिलहाल महंगाई और ब्याज दरें नियंत्रण में होने से नीति-निर्माताओं के लिए दरें स्थिर रखने या घटाने की गुंजाइश बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान भारतीय उद्योग ने मजबूत जुझारूपन दिखाया और हर बड़े संकट ने उत्पादकता एवं दक्षता बढ़ाने का अवसर दिया है।

कामत ने कहा कि कंपनियों को तेज गति से काम करने के साथ संतुलन भी बनाए रखना होगा, अन्यथा जोखिम बढ़ सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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