नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने समाधान योजना से प्राप्त धनराशि के वितरण को चुनौती देने वाली इंडियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की संयुक्त याचिका खारिज कर दी।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा अपनी व्यावसायिक समझ के आधार पर स्वीकृत समाधान योजना से प्राप्त धन के वितरण की व्यवस्था तथा उसके बाद एनसीएलटी का आदेश वैध, विधिसम्मत एवं बाध्यकारी है।
पीठ ने कहा कि बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद गठित निगरानी समिति इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं कर सकती थी।
एनसीएलएटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य इंदेवर पांडेय की पीठ ने कहा, ‘‘ हमारे विचार में प्रतिवादी संख्या-1 (एसबीआई) को किया गया भुगतान दिवाला संहिता की धारा 30(2)(बी) को धारा 53(1) के साथ पढ़ने पर पूरी तरह अनुरूप है। इसे सीओसी ने विधिवत मंजूरी दी और बाद में प्राधिकरण द्वारा धारा 30(4) के तहत स्वीकृत किया गया। इसमें किसी प्रकार की असमानता या अवैधता नहीं है।’’
यह मामला ओसीएल आयरन एंड स्टील के दिवाला समाधान से जुड़ा है जिसके लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की कटक पीठ ने इंद्राणी पटनायक की बोली को मंजूरी दी थी।
ओसीएल आयरन एंड स्टील के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) सितंबर 2021 में शुरू हुई थी। दावों के संकलन के बाद नौ वित्तीय ऋणदाताओं की एक सीओसी गठित की गई जिनकी मतदान हिस्सेदारी इस प्रकार थी… एशिया ऑपर्च्युनिटीज (III) मॉरीशस लिमिटेड (36.22 प्रतिशत), आईसीआईसीआई बैंक (12.68 प्रतिशत), भारतीय स्टेट बैंक (10.39 प्रतिशत), इंडियन बैंक (10.32 प्रतिशत), यूको बैंक (9.82 प्रतिशत), बैंक ऑफ बड़ौदा (7.87 प्रतिशत), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (7.11 प्रतिशत), पंजाब नेशनल बैंक (0.63 प्रतिशत) और गणेश ओर्स (4.98 प्रतिशत)।
इंद्राणी पटनायक की समाधान योजना को सीओसी ने 88.98 प्रतिशत बहुमत से मंजूरी दी थी और एनसीएलटी ने इसे 20 मार्च 2023 को स्वीकृत किया। इसके बाद योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक समिति गठित की गई। हालांकि, निगरानी समिति की तीसरी और चौथी बैठकों में असहमति जताने वाले वित्तीय ऋणदाताओं को भुगतान के वितरण को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
इस बीच सफल समाधान आवेदक इंद्राणी पटनायक ने 15 मई 2023 को 35.20 करोड़ रुपये की राशि असहमति जताने वाले वित्तीय ऋणदाता के रूप में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को हस्तांतरित की।
इससे असंतुष्ट होकर एसबीआई ने एनसीएलटी में याचिका दायर कर निगरानी समिति की चौथी बैठक में तय वितरण को निरस्त करने का अनुरोध किया।
एनसीएलटी ने पांच फरवरी 2024 को आदेश दिया कि असहमति जताने वाले वित्तीय ऋणदाता एसबीआई को भुगतान दिवाला संहिता की धारा 30(2)(बी) के अनुसार किया जाए और परिसमापन मूल्य की गणना की दोबारा जांच कर उसी आधार पर भुगतान किया जाए।
इस आदेश से असंतुष्ट होकर इंडियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एनसीएलएटी में अपील दायर की थी।
एनसीएलएटी ने हालांकि कहा कि आदेश एसबीआई को कोई अतिरिक्त या अनुचित लाभ नहीं देता बल्कि पहले से तय और स्वीकृत परिसमापन मूल्य के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
