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Wednesday, 29 April, 2026
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शराबबंदी पर सियासी टकराव तेज, 46 करोड़ के चंदे को लेकर जदयू का राजद पर निशाना

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पटना, सात अप्रैल (भाषा) बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बार विवाद का केंद्र शराब कंपनियों से प्राप्त कथित चुनावी चंदा है।

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को शराबबंदी के कारण राज्य में बढ़ रहे भ्रष्टाचार के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नीतीश कुमार सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। इस बयान के बाद जदयू ने मंगलवार को तीखी प्रतिक्रिया दी।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राजद शराब कंपनियों से चंदा लेता है, इसलिए वह शराबबंदी पर सवाल उठा रहा है।

जदयू के अनुसार, जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच राजद को शराब कंपनियों से करीब 46 करोड़ 64 लाख रुपये का चंदा मिला। इसी आधार पर पार्टी ने राजद की नीयत पर सवाल उठाया है।

जदयू का कहना है कि ऐसे हालात में शराबबंदी के खिलाफ बयान देना राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है।

पार्टी ने कहा कि बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसके बाद कई सामाजिक बदलाव देखने को मिले हैं।

जदयू के मुताबिक, विभिन्न संस्थानों द्वारा कराए गए सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोगों ने इस कानून के पक्ष में राय व्यक्त की है।

उधर, तेजस्वी यादव ने हाल ही में शराबबंदी कानून को पूरी तरह विफल बताया था। उन्होंने दावा किया था कि राज्य में एक समानांतर अवैध व्यवस्था खड़ी हो गई है। इसी बयान को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है।

जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी पर सवाल उठाने से पहले राजद नेतृत्व अपने परिवार और पार्टी नेताओं से परामर्श ले कि क्या वे इसे खत्म करने के पक्ष में हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान शराब कंपनियों से मिले चंदे पर भी राजद को जवाब देना चाहिए।

जदयू का कहना है कि शराबबंदी जनहित से जुड़ा फैसला है और इसे लेकर गलत संदेश देने की कोशिश की जा रही है, जबकि राजद लगातार इस कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है।

भाषा कैलाश

संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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