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Thursday, 9 April, 2026
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गांदरबल मुठभेड़ पर विवाद: परिवार ने कहा—‘आतंकी’ का आरोप हटे, नहीं तो करेंगे प्रदर्शन

राशिद अहमद मुगल के परिवार ने शव देने की मांग की, कहा—अगर इंसाफ नहीं मिला और ‘आतंकी’ का आरोप नहीं हटाया गया तो सड़कों पर उतरेंगे. J&K एल-जी पहले ही मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दे चुके हैं.

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गांदरबल, जम्मू-कश्मीर: राशिद अहमद मुगल की व्हाट्सएप डिस्प्ले फोटो में अब भी तिरंगा लगा है. 31 मार्च से लापता राशिद का शव बाद में गोलियों के निशानों से भरा मिला, जब उनके बड़े भाई एजाज़ पहचान के लिए गए.

पूरा गांव और परिवार गुस्से में है क्योंकि चाउंट वालीवार के रहने वाले इस व्यक्ति को अरहामा जंगल में सेना और पुलिस के संयुक्त सर्च ऑपरेशन में मारे जाने के बाद ‘आतंकी’ बताया गया.

गांव वालों का कहना है कि 28 साल का राशिद पुलिस कांस्टेबल बनने की तैयारी कर रहा था. घर पर राशिद के चचेरे भाई इमरान अहमद मुगल एक बैग खोलते हैं, जिसमें कई दस्तावेज़ हैं और इसमें से पासपोर्ट साइज फोटो, उर्दू-से-अंग्रेज़ी डिक्शनरी और कई कागज़ बाहर निकलते हैं.

गुस्से में इमरान ने कहा, “मेरा भाई राशिद अहमद यही काम करता था. वह आतंकी नहीं था. वह गांव वालों की कंप्यूटर से जुड़े दस्तावेज़ बनाने में मदद करता था, क्योंकि यहां वही सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था.”

राशिद अहमद मुगल के रिश्तेदारों द्वारा दिखाया गया एक कार्ड बताता है कि उनका PDP से संबंध था | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट
राशिद अहमद मुगल के रिश्तेदारों द्वारा दिखाया गया एक कार्ड बताता है कि उनका PDP से संबंध था | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट

इमरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा आदेशित मजिस्ट्रेट जांच के नतीजे का इंतज़ार कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर इंसाफ नहीं मिला, तो गांव वाले सड़कों पर उतरेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी, “अगर हमें शव नहीं मिला और उस पर लगा आतंकी का आरोप वापस नहीं लिया गया, तो हम सड़कों पर उतरेंगे.”

परिवार का आरोप है कि 1 अप्रैल को जब एजाज़ शव की पहचान करने गए, तो कपड़े वह नहीं थे जो राशिद काम पर जाते समय पहनकर गए थे. एजाज़ इस समय श्रीनगर में जांच के कारण रुके हुए हैं.

इमरान अहमद मुगल का कहना है कि परिवार अपने रिश्तेदार राशिद अहमद मुगल का शव चाहता है और उस पर लगे आतंकी के आरोप को हटाने की मांग कर रहा है | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट
इमरान अहमद मुगल का कहना है कि परिवार अपने रिश्तेदार राशिद अहमद मुगल का शव चाहता है और उस पर लगे आतंकी के आरोप को हटाने की मांग कर रहा है | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट

राशिद की मौत के बाद “फर्ज़ी मुठभेड़” के आरोप लग रहे हैं और स्थानीय राजनीतिक दल भी परिवार के समर्थन में आए हैं. यह घटना गांदरबल में गुस्से का कारण बनी है, जो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का निर्वाचन क्षेत्र है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी इस मामले को लेकर हंगामा हुआ, जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने न्यायिक जांच की मांग की.

बाद में उपराज्यपाल ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया और सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा. 3 अप्रैल को सिन्हा के कार्यालय ने पोस्ट किया, “मैंने अरहामा, गांदरबल घटना की पूरी और निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है. जांच में घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा.”

लेकिन एल-जी द्वारा मजिस्ट्रेट जांच के आदेश के बाद सेना के ऑपरेशन पर भी सवाल उठ रहे हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम तथ्यों की जांच कर रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि वह एक एनजीओ चलाता था, जिसके जरिए वह समाज की मदद करता था.”

दिप्रिंट ने मुठभेड़ से जुड़े आरोपों पर रक्षा प्रवक्ता से मैसेज और कॉल के जरिए संपर्क किया. जवाब मिलने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा.

मुठभेड़

गांदरबल के चाउंट वालीवार गांव में लोग रोज़ इकट्ठा होकर इस मुठभेड़ के बारे में बात कर रहे हैं. गांव में डर का माहौल है. कई युवा काम पर जाना बंद कर चुके हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगला नंबर उनका हो सकता है. इस गांव में ज्यादातर पहाड़ी समुदाय के लोग रहते हैं.

जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन एजाज़ लगातार राशिद को फोन करते रहे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. थोड़ी देर बाद उसका फोन बंद हो गया. गांव वालों के अनुसार, अगले दिन एजाज़, जो मजदूरी करते हैं, को श्रीनगर के पुलिस कंट्रोल रूम बुलाया गया. वहां उन्हें बताया गया कि उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया है और उनसे शव की पहचान करने को कहा गया.

चाउंट वालीवार गांव में राशिद अहमद मुगल का वह कमरा, जहां वह रहते थे | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट
चाउंट वालीवार गांव में राशिद अहमद मुगल का वह कमरा, जहां वह रहते थे | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट

पड़ोसी अब्दुल कयूम का दावा है, “एजाज़ ने हमें बताया कि शव की हालत बहुत खराब थी. शरीर पर गोलियों के कई निशान थे. वह सिर्फ बाल देखकर पहचान पाए.” जब एजाज़ ने शव मांगा, तो पुलिस ने देने से मना कर दिया.

गांव वाले राशिद की एक फोटो दिखाते हैं, जिसमें वह तिरंगे के साथ खड़े हैं—यह वही तस्वीर है जो ज्यादातर लोगों के पास है. राशिद के रिश्तेदार 70 साल के गुलाम रसूल मुगल सवाल करते हैं, “अगर वह आतंकी था, तो पुलिस ने उसे पहले क्यों नहीं पकड़ा? वह डीसी और एसपी के दफ्तर जाता रहता था.”

इस मामले को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. कुछ गांव वालों का मानना है कि अधिकारियों को लगा होगा कि वह अनाथ था, इसलिए मामला जल्दी शांत हो जाएगा. कुछ लोगों को शक है कि किसी ‘मुखबिर’ ने सुरक्षा बलों से फायदा पाने के लिए गलत जानकारी दी.

तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे राशिद ने जन्म से पहले ही अपने पिता को खो दिया था और कुछ समय बाद मां की भी मौत हो गई. बचपन का कुछ समय उसने अनाथालय में बिताया. गांव वालों के अनुसार, वह विराट कोहली का बहुत बड़ा फैन था और उनका कोई भी मैच नहीं छोड़ता था.

बीकॉम की डिग्री होने के कारण वह गांव का सबसे पढ़ा-लिखा व्यक्ति माना जाता था. गांव वालों के अनुसार, वह अक्सर अंग्रेज़ी के ऐसे शब्द बोलता था, जिन्हें दूसरे लोग समझ नहीं पाते थे.

गांव के युवा उससे प्रेरणा लेते थे और लोग नौकरी कार्ड, आधार कार्ड बनवाने से लेकर पेंशन के लिए आवेदन करने तक हर काम में उसकी मदद लेते थे. गांव की विधवाएं और परिवार भी मदद के लिए उसी के पास जाते थे.

राजनीतिक दल सेना की बदलती बातों पर सवाल उठा रहे हैं—पहले राशिद को विदेशी आतंकी बताया गया और बाद में स्थानीय व्यक्ति बताया गया, जिससे मुठभेड़ पर शक पैदा हो रहा है.

सेना की चिनार कॉर्प्स ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया था कि ‘ऑपरेशन अरहामा’ के तहत गंदरबल के अरहामा जंगल में “एक आतंकी को मार गिराया गया”. पोस्ट में कहा गया, “31 मार्च 2026 की रात बीच-बीच में फायरिंग के दौरान घेराबंदी को दोबारा व्यवस्थित किया गया. हमारी सेना ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक आतंकी मारा गया. ऑपरेशन जारी है.”

जम्मू-कश्मीर पुलिस की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस ने इस मुठभेड़ को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है.

राशिद के दो कमरों वाले घर में, जिसकी दीवारें खाली हैं और अलग से कोई हॉल नहीं है, रिश्तेदार उसके शव के आने का इंतज़ार कर रहे हैं. वहां ‘नून चाय’ का बड़ा फ्लास्क रखा है. जिस बिस्तर पर राशिद सोता था, वह अभी भी वैसे ही रखा है.

राशिद की बहन नसीमा बेगम (हरे कपड़ों में) और उनकी मौसी सिरजा बानो 28 साल के राशिद के लिए इंसाफ चाहती हैं | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट
राशिद की बहन नसीमा बेगम (हरे कपड़ों में) और उनकी मौसी सिरजा बानो 28 साल के राशिद के लिए इंसाफ चाहती हैं | फोटो: माहिरा खान/दिप्रिंट

मौत से दो दिन पहले राशिद ने अपनी मौसी सिरजा बानो से वादा किया था कि वह उनका डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाने में मदद करेगा. इसके लिए वह पासपोर्ट साइज फोटो भी लेकर आया था.

सिरजा ने कहा, “मुझे अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहिए. मुझे उसका शव चाहिए और जिस मुखबिर ने गलत जानकारी दी, उसे भी सजा मिलनी चाहिए.”

राशिद की बहन नसीमा बेगम ने कहा, “वह जम्मू-कश्मीर पुलिस में भर्ती होना चाहता था. वह लोगों की सेवा करना चाहता था. वह देशभक्त था, और उसे आतंकी बताकर मार दिया गया.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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